खर्राटे आना गहरी नींद की निशानी नहीं बल्कि शरीर में पनपती बीमारियों का है अलार्म, हो जाएं सावधान!
मेडिकल रिसर्च की मानें तो खर्राटे तब आते हैं जब नींद के दौरान सांस लेने का रास्ता पूरी तरह खुला नहीं रह पाता। जब व्यक्ति सांस लेता है, तो हवा को नाक और गले से होकर फेफड़ों तक पहुंचना होता है। अगर इस रास्ते में कहीं भी रुकावट आ जाए, तो हवा को गुजरने में ज्यादा दबाव लगाना पड़ता है। इस दौरान गले के टिश्यू हिलने लगते हैं और कंपन पैदा करते हैं। यही कंपन खर्राटों की आवाज में बदल जाता है। जितनी ज्यादा रुकावट होगी, आवाज भी उतनी तेज हो सकती है।
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी की वजह से हमारे अंदर कई तरह की लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याएं दिखने लगी हैं। इन्हीं में से एक समस्या है खर्राटे आना जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। खर्राटों की समस्या पहले के मुकाबले काफी ज्यादा देखने को मिल रही है जिसका कारण है बढ़ता मोटापा, अनियमित खानपान, देर तक जागना और शारीरिक गतिविधियों की कमी।
खर्राटों को सिर्फ एक सामान्य आदत मानकर छोड़ देना या इसे गहरी नींद की निशानी समझना बिल्कुल गलत है। असल में खराब स्वास्थ्य और शरीर के अंदर पनप रही दिक्कतों की वजह से खर्राटों की समस्या होती है।
मेडिकल रिसर्च की मानें तो खर्राटे तब आते हैं जब नींद के दौरान सांस लेने का रास्ता पूरी तरह खुला नहीं रह पाता। जब व्यक्ति सांस लेता है, तो हवा को नाक और गले से होकर फेफड़ों तक पहुंचना होता है। अगर इस रास्ते में कहीं भी रुकावट आ जाए, तो हवा को गुजरने में ज्यादा दबाव लगाना पड़ता है। इस दौरान गले के टिश्यू हिलने लगते हैं और कंपन पैदा करते हैं। यही कंपन खर्राटों की आवाज में बदल जाता है। जितनी ज्यादा रुकावट होगी, आवाज भी उतनी तेज हो सकती है।
बढ़ता वजन खर्राटों की सबसे बड़ी वजहों में से एक
विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ता वजन खर्राटों की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। जब शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने लगती है तो उसका असर केवल पेट या कमर तक सीमित नहीं रहता। गले के आसपास भी चर्बी जमा हो सकती है, जिससे सांस का रास्ता संकरा हो जाता है। रात में सोते समय मांसपेशियां स्वाभाविक रूप से ढीली पड़ती हैं और ऐसे में हवा के आने-जाने में और अधिक बाधा पैदा हो सकती है। यही कारण है कि अधिक वजन वाले लोगों में खर्राटों की शिकायत ज्यादा देखी जाती है।
शराब का सेवन भी है कारण
शराब का सेवन और कुछ प्रकार की नींद की दवाएं भी इस समस्या को बढ़ा सकती हैं। मेडिकल विशेषज्ञ बताते हैं कि ये चीजें गले और सांस की नली की मांसपेशियों को जरूरत से ज्यादा ढीला कर देती हैं, जिससे सांस का रास्ता पहले से ज्यादा सिकुड़ सकता है। परिणामस्वरूप खर्राटों की आवाज बढ़ जाती है और कुछ मामलों में सांस लेने में भी परेशानी होने लगती है।
नाक से जुड़ी समस्याएं भी खर्राटों का बड़ा कारण हो सकती हैं। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से साइनस की समस्या है, बार-बार एलर्जी होती है या नाक के अंदर सूजन बनी रहती है, तो नाक से हवा का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति मुंह से सांस लेने लगता है। मुंह से सांस लेने पर खर्राटों की संभावना काफी बढ़ जाती है।
कभी-कभी आने वाले खर्राटे चिंता का कारण नहीं
डॉक्टरों का कहना है कि हल्के और कभी-कभी आने वाले खर्राटे आमतौर पर चिंता का कारण नहीं होते। लेकिन अगर खर्राटे रोजाना आते हैं, बहुत तेज आवाज करते हैं या उनके साथ कुछ और लक्षण भी दिखाई देते हैं, तो सावधान होने की जरूरत है। खासकर अगर सोते समय सांस रुकने लगे, अचानक घुटन महसूस हो, बार-बार नींद टूट जाए या सुबह उठने पर बहुत ज्यादा थकान महसूस हो, तो यह एक गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर सकता है।
मेडिकल रिसर्च में जिस समस्या को सबसे ज्यादा गंभीर माना जाता है, उसे ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया कहा जाता है। इस स्थिति में सोते समय सांस कुछ सेकंड के लिए बार-बार रुक जाती है। कई बार व्यक्ति को इसका एहसास भी नहीं होता, लेकिन शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। लंबे समय तक ऐसा होने पर ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी, याददाश्त की समस्या और दिनभर अत्यधिक नींद आने जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
ऐसे में अगर खर्राटे लगातार बढ़ रहे हों या उनके साथ अन्य लक्षण भी दिखाई दें, तो जांच करवाना जरूरी है।
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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और जागरूकता के उद्देश्य से है. प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं. इसलिए, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.