Advertisement

Loading Ad...

बच्चे को आ रहा है हर बात पर गुस्सा? ज़रूरी नहीं की ये जिद हो, डिप्रेशन और एंग्जायटी के हो सकते हैं लक्षण

नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार, बच्चों का बात बात पर गुस्सा करना या चिल्लाना, जिद नहीं होता। कई बार यह बच्चे की एक खामोश मदद की पुकार होती है। दरअसल, बच्चों में मानसिक तनाव, एंग्जायटी या डिप्रेशन के शुरुआती संकेत अक्सर शारीरिक और व्यवहारिक रूप में दिखते हैं। वो अक्सर अपनी मानसिक उथल-पुथल या डर को शब्दों में नहीं बता पाते, जिस वजह से ये स्ट्रेस गुस्से या चिड़चिड़ेपन के रूप में बाहर आता है।

Image Credit: ChatGPT
Loading Ad...

बचपन बहुत नाजुक और संवेदनशील समय होता है। इस उम्र में बच्चे बड़ी तेजी से नई चीजें सीखते हैं, साथ ही वे अपने आसपास के माहौल से प्रभावित भी होते हैं। अक्सर ऐसा होता है कि बच्चे अगर बात-बात पर गुस्सा करें, चिड़चिड़े या उदास हो जाएं तो माता-पिता इसे उनकी जिद या शरारत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन ऐसा करना सही नहीं है। हेल्थ एक्सपर्ट बच्चों के कुछ असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह देते हैं।

नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार, बच्चों का बात बात पर गुस्सा करना या चिल्लाना, जिद नहीं होता। कई बार यह बच्चे की एक खामोश मदद की पुकार होती है। दरअसल, बच्चों में मानसिक तनाव, एंग्जायटी या डिप्रेशन के शुरुआती संकेत अक्सर शारीरिक और व्यवहारिक रूप में दिखते हैं। वो अक्सर अपनी मानसिक उथल-पुथल या डर को शब्दों में नहीं बता पाते, जिस वजह से ये स्ट्रेस गुस्से या चिड़चिड़ेपन के रूप में बाहर आता है।

अगर बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव आए तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो ये समस्याएं आगे चलकर और भी गंभीर हो सकती हैं।

Loading Ad...

ये लक्षण दिखने पर हो जाएं सावधान!

Loading Ad...

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, अगर बच्चों में हर बात पर गुस्सा, हताशा समेत अन्य लक्षण दिखें तो सावधान हो जाएं, ये गंभीर हो सकते हैं।

लगातार हताशा - बच्चा बार-बार हताश महसूस करता हो या कुछ करने में रुचि न ले।

Loading Ad...

सिर दर्द व पेट दर्द की शिकायत - बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार पेट व सिर में दर्द की शिकायत।

बढ़ता चिड़चिड़ापन - छोटी-छोटी बातों पर चिढ़ना।

अचानक मूड बदलना - खुश से अचानक उदास या गुस्सैल हो जाना।

Loading Ad...

हर बात पर गुस्सा - हर छोटी बात पर गुस्सा करना या झगड़ालू व्यवहार।

नेशनल हेल्थ मिशन ने माता-पिता से अपील की है कि बच्चों के इन व्यवहारों को सिर्फ शरारत न समझें। ये कई बार स्कूल में दबाव, दोस्तों के साथ समस्या, परिवार में कलह या अकेलेपन का संकेत हो सकते हैं। बच्चों के साथ खुलकर बात करें, उनकी बातों को ध्यान से सुनें और जरूरत पड़ने पर किसी बाल मनोवैज्ञानिक या काउंसलर से सलाह लें।

माता-पिता बने बच्चों के सबसे अच्छे दोस्त 

Loading Ad...

एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि माता-पिता बच्चों के सबसे पहले और सबसे अच्छे दोस्त बनें। छोटी-छोटी बातों पर उन्हें डांटने की बजाय समझने की कोशिश करें। अगर ऊपर बताए गए 6 लक्षण लगातार दिख रहे हैं तो इसे अनदेखा न करें। समय पर ध्यान देने से बच्चे की कई समस्याओं को रोका जा सकता है।

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और जागरूकता के उद्देश्य से है. प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं. इसलिए, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

LIVE
Loading Ad...
Loading Ad...