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बच्चों पर न डालें 'परफेक्ट' बनने का दबाव, मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है नकारात्मक असर | ऐसे करें डील

परफेक्ट बनने की कोशिश में कई माता-पिता बच्चों की हर छोटी-बड़ी चीज पर नजर रखने लगते हैं कि वे क्या पढ़ रहे हैं, किससे बात कर रहे हैं, क्या खेल रहे हैं और क्या पहन रहे हैं। धीरे-धीरे यह कंट्रोल इतना बढ़ जाता है कि बच्चा खुद फैसले लेना बंद कर देता है। उसमें आत्मविश्वास कम होने लगता है और वह हर बात के लिए माता-पिता पर निर्भर हो जाता है। यह स्थिति बच्चे के विकास के लिए ठीक नहीं होती।

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आज के दौर में parenting एक चुनौती बन गई है। बहुत से माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे हर चीज में सबसे आगे हों, पढ़ाई में टॉप करें, हर काम सही करें और किसी भी तरह की गलती न करें। हर चीज़ में परफेक्शन की ये चाहत कई बार अनजाने में बच्चों की मासूमियत छीन लेती है और उनपर मानसिक दबाव डाल देती है। 

ज़रुरत से ज़्यादा कंट्रोल करने का असर  

परफेक्ट बनने की कोशिश में कई माता-पिता बच्चों की हर छोटी-बड़ी चीज पर नजर रखने लगते हैं कि वे क्या पढ़ रहे हैं, किससे बात कर रहे हैं, क्या खेल रहे हैं और क्या पहन रहे हैं। धीरे-धीरे यह कंट्रोल इतना बढ़ जाता है कि बच्चा खुद फैसले लेना बंद कर देता है। उसमें आत्मविश्वास कम होने लगता है और वह हर बात के लिए माता-पिता पर निर्भर हो जाता है। यह स्थिति बच्चे के विकास के लिए ठीक नहीं होती।

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बच्चों को भी गलती करने और उससे सीखने का मौका मिलना चाहिए। अगर हर बार माता-पिता ही सब कुछ तय करेंगे, तो बच्चा कभी खुद से सोचने और समझने की क्षमता नहीं विकसित कर पाएगा। इसलिए जरूरी है कि बच्चों पर पूरा कंट्रोल करने के बजाय उन्हें थोड़ा स्पेस दिया जाए।

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अपने बच्चे पर करें भरोसा 

पेरेंटिंग में सबसे जरूरी चीज है भरोसा। अगर आप अपने बच्चे पर भरोसा करेंगे, तो वह भी आपसे अपनी बातें शेयर करेगा। लेकिन अगर हर बात पर रोक-टोक होगी, तो बच्चा धीरे-धीरे आपसे चीजें छुपाने लगेगा। इसलिए बेहतर है कि बच्चों के साथ दोस्त की तरह पेश आएं। उससे पूछें कि उसका दिन कैसा रहा, उसे क्या अच्छा लगा और क्या नहीं।

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इसके साथ ही बच्चों की भावनाओं को समझना भी बहुत जरूरी है। अगर बच्चा किसी बात से परेशान है, तो उसे तुरंत डांटने के बजाय उसकी बात सुनें। कई बार बच्चे चाहते हैं कि उनकी बातों को सुना जाए। ऐसे में अगर माता-पिता शांत होकर उनकी बात सुनते हैं, तो बच्चे को बहुत राहत मिलती है।

परफेक्ट पैरेंट बनने के चक्कर में अक्सर माता-पिता बच्चों से बहुत ज्यादा उम्मीदें रखने लगते हैं। हर बच्चा एक जैसा नहीं होता। किसी की पढ़ाई में रुचि होती है, तो किसी की खेल-कूद में। इसलिए जरूरी है कि आप अपने बच्चे की क्षमता और रुचि को समझें और उसी के हिसाब से उसे आगे बढ़ने दें।

आपसे गलती होने पर बच्चे से माफ़ी मांगने में न शर्माएं 

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इसके अलावा, अगर कभी आपसे भी गलती हो जाए, तो बच्चे से माफी मांगने में कोई शर्म नहीं होनी चाहिए। इससे बच्चा यह सीखता है कि गलतियां सभी से होती हैं और उन्हें सुधारना जरूरी है।

गलतियां करना विकास का हिस्सा है, ये बात समझना बेहद ज़रूरी है। अगर बच्चा गलती करके खुद उसे सुधारना नहीं सीखेगा, तो आगे जाकर जीवन की बड़ी चुनौतियों का सामना कैसे करेगा? इसीलिए बच्चों को गाइड करते हुए अपनी गलतियां खुद सुधारने का मौका दें।

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