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30 वर्षों में किसका धरती से सफाचट हो जाएगा ? शंकराचार्य की भविष्यवाणी

शंकराचार्य ने मानवजाति के विनाश की तारीख़ घोषित कर दी है..या फिर यूँ कहे कि कितने वर्षों में विश्व के 195 देशों को मौत निगल जाएगी, इस बात की उन्होंने सांकेतिक भविष्यवाणी कर दी है. शंकराचार्य होते हुए स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज आख़िर क्यों मानवजाति के विनाश की तस्वीर इन दिनों दिखा रहे है ?

30 वर्षों में किसका धरती से सफाचट हो जाएगा ? शंकराचार्य की भविष्यवाणी
पुरी पीठ शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती महाराज संत समाज से आने वाली एक ऐसी पूजनीय शख़्सियत हैं, ज़िनका नाम बड़े ही आदर के साथ लिया जाता है. इनकी कहीं बातों को नजरअंदाज नहीं किया जाता है. भले ही दो देशों के बीच युद्ध विराम लागू है, लेकिन शंकराचार्य की मानें तो युद्ध रोका नहीं जा सकता है, भगवान श्री कृष्ण भी युद्ध को रोकने में विफल रहे थे. शंकराचार्य ये मानते हैं कि शांति का प्रयास करना चाहिए लेकिन अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए युद्ध जरूरी है।जहां बात पाकिस्तान की आती है, तो वहाँ शंकराचार्य को लाचारी, गरीबी, बेबसी नजर आती है, जिन्हें छुपाने के लिए पाकिस्तान भारत पर आतंकी हमले करवाता है. हालाँकि इन सबके बीच शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती की चेतावनी समस्त दुनिया के लिए भयावह भविष्यवाणी बन गई है, अबकी बार शंकराचार्य की आँखें विश्व का अंधकारमय भविष्य देख चुकी है. शंकराचार्य ने मानवजाति के विनाश की तारीख़ घोषित कर दी है या फिर यूँ कहे कि कितने वर्षों में विश्व के 195 देशों को मौत निगल जाएगी, इस बात की उन्होंने सांकेतिक भविष्यवाणी कर दी है. शंकराचार्य होते हुए स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज आख़िर क्यों मानवजाति के विनाश की तस्वीर इन दिनों दिखा रहे है ? 

इतिहास गवाह है भारत हमेशा से ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रही है. यहाँ एक से बढ़कर एक संत महात्मा हुए हैं.जिनके अतुल्य ज्ञान ने पूरी दुनिया को प्रकाशित किया. ऋषि-मुनियों ने घोर तप, कर्म, उपासना, संयम के जरिए वेदों में छिपे ज्ञान को दुनिया के आगे उजागर किया. दुनिया को सनातन धर्म का पाठ पढ़ाया, महर्षि वाल्मिकि से लेकर महर्षि कपिल ने धर्म ग्रंथों की रचना की तो वहीं महर्षि दधिचि से लेकर आचार्य कणाद के अविष्कारों ने इस दुनिया की तस्वीर बदल दी. इसी कारण आज भी भारत की इस धरा पर संत महात्माओं को सम्मान दिया जाता है. संतों के मुख से निकली बातों पर गौर किया जाया है. उनके मुख से निकली भविष्यवाणियों पर यक़ीन किया जाता है. इसी के चलते देश के चारों में से कोई  भी पूजनीय शंकराचार्य कुछ भी कहते हैं या फिर किसी भी विषय पर अपनी बात रखते हैं, तो उसे पूरी दुनिया कान लगाकर सुनती है। आज का भारत जब पुनः विश्व गुरु बनने का ख्वाब देख रहा है. 2047 तक आत्म निर्भर भारत को विकसित भारत बनाने का संकल्प लिया जा रहा है, तो ऐसे में क्संपूर्ण मानवजाति के भविष्य को क्या मौत के मुँह में देखा सकता है?  दरअसल सोशल मीडिया पर पुरी शंकराचार्य का एक बयान वायरल हो रहा है. उन्होंने अपने इस बयान में मानवजाति के विनाश की भविष्यवाणी की है, दावा किया है कि 30 वर्षौं में मानव जाति का सफ़ाचट हो जाएगा. 

पूरे विश्व ने अज्ञ के वशीभूत होकर जिस ढंग से विकास को परिभाषित और क्रियान्वित करने का प्रकल्प प्रारंभ किया है. अगर इस प्रकल्प पर विराम नहीं प्राप्त होता, तो मानव सृष्टि कुल 30 वर्षों की रह गई है। वृक्षों की सैकड़ों प्रजातियाँ लुप्त हो गईं. गीद की प्रजाति लुप्त , गीद का दर्शन भी अब नहीं होता है. हंस का दर्शन कहां से होगा. स्थावर प्राणी जंगम प्राणियों की प्रजातियाँ लुप्त हो रही हैं. अब मनुष्य की प्रजाति भी कुल 30 वर्षों की शेष है इसलिए हमने कहा, इस प्रकार से अपने इन दावों के पीछे शंकराचार्य के तर्क क्या वास्तविकता को दर्शाते हैं ? क्या सच में आज की मानवजाति अपनी उलटी गिनती गिन रही है और जब मानवजाति ही नहीं रहेगी, तो क्या 195 देशों का अंत निकट है?

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