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रामनगरी का भव्य मंदिर, माता कैकेयी ने मुंह दिखाई में जनकनंदिनी को दिया महल, विश्वकर्मा देव ने किया था निर्माण

माता सीता को यह भवन स्नेहपूर्वक उपहार स्वरूप दिया गया था. यह उनका व्यक्तिगत महल था, जहां वे आराम और विश्राम कर सकें. कनक भवन की भव्य दीवारें, शांत प्रांगण और अलौकिक वातावरण आज भी उस युग की खूबसूरती, पारिवारिक प्रेम और सम्मान की कहानी सुनाते हैं.

रामनगरी का भव्य मंदिर, माता कैकेयी ने मुंह दिखाई में जनकनंदिनी को दिया महल, विश्वकर्मा देव ने किया था निर्माण
Image Credits:Kanak bhawan mandir/ UP Tourism/Instagram
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रामनगरी अयोध्या की पावन भूमि पर रामजन्मभूमि के अलावा और भी कई मंदिर हैं, जो अपने आप में भक्ति की कथा को समेटे हुए हैं. ऐसा ही एक मंदिर है कनक भवन, जो न केवल एक मंदिर बल्कि प्रेम, स्नेह और पारिवारिक मर्यादाओं का प्रतीक भी है. यहां राम पंचायत का अद्भुत मंदिर है, जहां भगवान श्रीराम, माता सीता और अन्य परिवारजनों की मूर्तियां ऐसी व्यवस्था में विराजमान हैं जैसे कोई सच्ची राम पंचायत बैठी हो.  

कैकेयी ने मुंह दिखाई में जनकनंदिनी को दिया महल

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता सीता के अयोध्या पहुंचने पर माता कैकेयी ने उन्हें ‘मुंह दिखाई’ के रूप में यह भव्य महल उपहार में दिया था. कहा जाता है कि त्रेता युग में जब भगवान श्रीराम का माता जानकी से विवाह हुआ, तब विवाह की रात्रि में श्रीराम के मन में विचार आया कि अयोध्या में सीता जी के लिए एक सुंदर भवन होना चाहिए. उसी क्षण महारानी कैकेयी को स्वप्न में एक दिव्य महल दिखाई दिया. उन्होंने यह सपना राजा दशरथ से साझा किया और अयोध्या में उसी महल की प्रतिकृति बनाने का आग्रह किया. राजा दशरथ के अनुरोध पर देवताओं के शिल्पकार विश्वकर्मा जी ने स्वयं इस भवन का निर्माण किया, जो भव्य और खूबसूरत है.

माता सीता को ये भवन स्नेहपूर्वक उपहार स्वरूप दिया गया था

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माता सीता को यह भवन स्नेहपूर्वक उपहार स्वरूप दिया गया था. यह उनका व्यक्तिगत महल था, जहां वे आराम और विश्राम कर सकें. कनक भवन की भव्य दीवारें, शांत प्रांगण और अलौकिक वातावरण आज भी उस युग की खूबसूरती, पारिवारिक प्रेम और सम्मान की कहानी सुनाते हैं. वर्तमान कनक भवन का जीर्णोद्धार 19वीं शताब्दी में ओरछा के राजा सवाई महेन्द्र प्रताप सिंह की धर्मपत्नी महारानी वृषभानु कुंवरि ने करवाया था. 1891 ईस्वी में यहां प्राचीन मूर्तियों के साथ दो नए राम-सीता विग्रहों की भी स्थापना की गई.

ये मंदिर अपनी भव्यता और पवित्रता के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है

मंदिर के मुख्य गर्भगृह में भगवान श्रीराम और माता सीता की सुंदर प्रतिमाएं विराजमान हैं. मंदिर की अद्भुत वास्तुकला और कलाकृति देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देती है. राम जन्मभूमि के उत्तर-पूर्व दिशा में स्थित यह मंदिर अपनी भव्यता और पवित्रता के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. मान्यता है कि यहां आज भी भगवान श्रीराम और माता सीता भ्रमण करने आते हैं.

यहां का शांत वातावरण मन को शांति प्रदान करता है

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कनक भवन न सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि रघुकुल की परंपराओं, आपसी प्रेम और पारिवारिक बंधनों को भी जीवंत रखता है. जब भी श्रद्धालु अयोध्या आते हैं तो कनक भवन के दर्शन अवश्य करते हैं. यहां का शांत वातावरण मन को शांति प्रदान करता है. मंदिर में राम परिवार की मूर्तियां ऐसी लगती हैं मानो वे सजीव बैठकर राम पंचायत कर रहे हों.

मंदिर के दर्शन करने कैसे पहुंचे 

त्रेता युग की झलक दिखाते कनक भवन पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा लखनऊ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो अयोध्या से 152 किलोमीटर दूर है. अन्य हवाई अड्डे फैजाबाद-गोरखपुर (158 किमी), प्रयागराज (172 किमी) और वाराणसी (224 किमी) हैं.

वहीं, फैजाबाद और अयोध्या रेलवे स्टेशन प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़े हैं. लखनऊ से फैजाबाद 128 किमी और अयोध्या 135 किमी दूर है. उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसें 24 घंटे उपलब्ध हैं. लखनऊ से अयोध्या सड़क मार्ग द्वारा 172 किलोमीटर की दूरी है.

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Source INPUT- IANS

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