मार्च नहीं यहां दिसंबर में खेली जाती है होली… राक्षसों के संहार से जुड़ी है मान्यता, हल्दी से दूर होते हैं कष्ट!

खंडोबा मंदिर में देश के कोने-कोने से लोग आते हैं. मान्यता है कि अगर विवाह में देरी हो रही है या कोई संतान सुख से वंचित हैं, तो यहां आकर कष्टों से निवारण मिलता है.

मार्च नहीं यहां दिसंबर में खेली जाती है होली… राक्षसों के संहार से जुड़ी है मान्यता, हल्दी से दूर होते हैं कष्ट!

Maharashtra Khandoba Temple: क्या आपने कभी सुना है कि दिसंबर में होली खेली गई. संभवत नहीं, लेकिन महाराष्ट्र में एक ऐसी जगह है जहां दिसंबर में होली खेली जाती है. ये होली रंग-गुलाल से नहीं बल्कि हल्दी से खेली जाती है. 

हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र के पुणे के जेजुरी में स्थित खंडोबा मंदिर की. जहां हर साल दिसंबर के महीने में भक्त हल्दी की होली खेलते हैं. इसके लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं. इस मंदिर में भगवान शिव के मार्तंड भैरव स्वरूप की पूजा की जाती है. 

खंडोबा मंदिर में क्यों खेली जाती है हल्दी की होली? 

खंडोबा मंदिर में हर साल सर्दियों में खेले जाने वाली इस होली की खास मान्यता और संदेश है. कहा जाता है शत्रुओं पर विजय पाने के उपलक्ष्य में यहां हल्दी की होली होती है और भगवान शिव को भी हल्दी अर्पित की जाती है. 

क्या है खंडोबा मंदिर की मान्यता और पौराणिक कथा? 

खंडोबा मंदिर के मुख्य द्वार पर राक्षस मणि की छोटी सी प्रतिमा विराजमान है. मंदिर में हर साल 42 किलो की तलवार उठाने की प्रतियोगिता भी रखी जाती है. माना जाता है कि इसी तलवार से भगवान मार्तंड भैरव ने राक्षसों का संहार किया था. कहा जाता है कि भगवान मार्तंड भैरव के दर्शन तब तक अधूरे माने जाते हैं, जब तक भक्त राक्षस मणि के दर्शन पूरे नहीं कर लेते. 

इसके पीछे का कारण एक पौराणिक कथा में छुपा है. कथा के मुताबिक जब ब्रह्मा पृथ्वी की रचना कर रहे थे तो उनकी पसीने की बूंद से मल्ल और मणि राक्षसों का जन्म हुआ. दोनों राक्षसों ने मिलकर धरती पर उत्पात मचाना शुरू कर दिया और कई बेगुनाह लोगों को मौत के घाट उतार दिया. राक्षस से त्रस्त भक्तों ने भगवान शिव से प्रार्थना की. अपने भक्तों को बचाने के लिए भगवान शिव खंडोबा या मार्तंड भैरव रूप में प्रकट हुए. उन्होंने अपनी तलवार से मल्ल राक्षस का वध किया. अपने भाई की मौत को देखकर मणि ने भगवान शिव के सामने आत्मसमर्पण किया और क्षमा मांगी. भगवान शिव ने प्रसन्न होकर मणि को क्षमा किया और उसे अपने मंदिर में स्थान भी दिया. 

खंडोबा मंदिर में भगवान शिव के मार्तंड भैरव रूप की पूजा होती है। यह रूप भगवान शिव का सबसे अनोखा रूप है. इस रूप में भगवान शिव योद्धा अवतार में हैं और उनके हाथ में बड़ी तलवार है. मार्तंड भैरव घोड़े पर सवार होकर भक्तों की रक्षा करने के लिए मौजूद हैं. भगवान शिव के मार्तंड भैरव रूप की गिनती उनके उग्र रूपों में की जाती है, जो अपनी तलवार से बुरी महाशक्तियों का नाश करते हैं. 

विवाह और संतान संकट दूर होने की मान्यता

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खंडोबा मंदिर में महाराष्ट्र से ही नहीं बल्कि देश के कोने-कोने से लोग आते हैं. मान्यता है कि अगर विवाह में देरी हो रही है या कोई संतान सुख से वंचित हैं, तो महाराष्ट्र में स्थापित इस मंदिर में हर मनोकामना को पूरा करने की शक्ति है. भक्त दूर-दूर से भगवान शिव के योद्धा अवतार के दर्शन करने आते हैं. 

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