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30 अक्टूबर का पंचांग: शुक्रवार के दिन शिव योग और आर्द्रा नक्षत्र का शुभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व

30 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 37 मिनट पर होगा. चंद्रोदय रात 9 बजकर 18 मिनट पर होगा, जबकि चंद्रास्त सुबह 10 बजकर 56 मिनट पर बताया गया है.

30 अक्टूबर का पंचांग: शुक्रवार के दिन शिव योग और आर्द्रा नक्षत्र का शुभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व
Image Credit: IANS/AI generated
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हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है. कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है. पंचांग हिंदू काल-गणना की एक पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है.

30 अक्टूबर का पंचांग

30 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि रहेगी. हिंदू धर्म में इस तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित होती है. इस दिन संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणपति बप्पा की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है.

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पंचांग के अनुसार, 30 अक्टूबर को कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि शाम 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी. इसके बाद पंचमी तिथि शुरू होगी. शुक्रवार होने के कारण इस दिन का धार्मिक महत्व और भी खास माना जाता है. नक्षत्र की बात करें तो आर्द्रा नक्षत्र रात 1 बजकर 12 मिनट तक रहेगा. वहीं, व्याघात योग रात 9 बजकर 46 मिनट तक रहेगा और बव करण शाम 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगा.

शुक्रवार को बन रहा शुभ संयोग

शुभ मुहूर्त की बात करें तो इस दिन सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा. वहीं, राहुकाल सुबह 10 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 9 मिनट तक रहेगा. गुलिक काल सुबह 8 बजे से 9 बजकर 24 मिनट तक और यमगण्ड काल दोपहर 2 बजकर 54 मिनट से शाम 4 बजकर 18 मिनट तक रहेगा. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल में नए शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचा जाता है.

दक्षिण दिशा की यात्रा करने से बचे 

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30 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 37 मिनट पर होगा. चंद्रोदय रात 9 बजकर 18 मिनट पर होगा, जबकि चंद्रास्त सुबह 10 बजकर 56 मिनट पर बताया गया है. इस दिन दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा. इसलिए इस दिन दक्षिण दिशा की यात्रा करने से बचना चाहिए. अगर यात्रा करना जरूरी हो तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उचित उपाय करके यात्रा की जा सकती है.

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