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16 अक्टूबर का पंचांग: मां कात्यायनी की पूजा करने से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष की होती है प्राप्ति, रात 2:39 से 4:27 बजे तक अमृतकाल

इस दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाएगी. महर्षि कात्यायन की तपस्या और उनके यहां पुत्री के रूप में मां के प्रकट होने के कारण 'कात्यायनी' नाम पड़ा. देवी सिंह (शेर) पर सवारी करती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी कात्यायनी मानव शरीर के आज्ञा चक्र की अधिष्ठात्री हैं. इनकी उपासना से भक्तों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है. विवाह में आ रही बाधाएं भी इनकी कृपा से दूर होती हैं.

16 अक्टूबर का पंचांग: मां कात्यायनी की पूजा करने से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष की होती है प्राप्ति, रात 2:39 से 4:27 बजे तक अमृतकाल
Image Credits: AI/IANS
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हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है. कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है. पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है.  16 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि सुबह 5:54 बजे तक रहेगी. इसके बाद सप्तमी तिथि शुरू हो जाएगी. शुक्रवार को सुबह 6:28 बजे सूर्योदय और शाम 5:56 बजे सूर्यास्त होगा. वहीं, सुबह 11:24 बजे चंद्रोदय और रात 10:01 बजे चंद्रास्त होगा.

इस दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाएगी

16 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार) को शारदीय नवरात्र का छठा दिन है. इस दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाएगी. महर्षि कात्यायन की तपस्या और उनके यहां पुत्री के रूप में मां के प्रकट होने के कारण 'कात्यायनी' नाम पड़ा. देवी सिंह (शेर) पर सवारी करती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी कात्यायनी मानव शरीर के आज्ञा चक्र की अधिष्ठात्री हैं. इनकी उपासना से भक्तों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है. विवाह में आ रही बाधाएं भी इनकी कृपा से दूर होती हैं.

नक्षत्र 

पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में रहेंगे. ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं या इस नक्षत्र में स्थित होते हैं, तो इसके विशेष और गहरे प्रभाव देखने को मिलते हैं. चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं, जिन्हें सूर्य का मित्र माना जाता है. सूर्य और मंगल के इस मेल से व्यक्ति के भीतर गजब का आत्मविश्वास, साहस, पराक्रम और ऊर्जा बढ़ती है. नौकरीपेशा लोगों के काम की उच्च अधिकारियों द्वारा सराहना होती है. प्रशासन, उच्च पदों या प्रबंधन से जुड़े लोगों को विशेष लाभ, नई जिम्मेदारी या प्रमोशन मिल सकते हैं.

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योग

शुक्रवार रात 10:05 बजे तक शोभन योग रहेगा. ज्योतिष के अनुसार, शोभन योग को 27 नित्य योगों में से 5वां योग माना जाता है. 'शोभन' शब्द का अर्थ सुंदर, शुभ, सुहावना या कल्याणकारी होता है. इस योग के स्वामी बृहस्पति (गुरु) हैं, जो ज्ञान, समृद्धि और शुभता के कारक माने जाते हैं. इस योग को अधिकांश मांगलिक और शुभ कार्यों के लिए बहुत श्रेष्ठ माना जाता है. नए वस्त्र धारण करना, आभूषण खरीदना, विवाह, सगाई, सौंदर्य उपचार और विशेष रूप से यात्रा शुरू करने के लिए यह योग अत्यंत मंगलकारी माना गया है.

अभिजीत मुहूर्त

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इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 से दोपहर 12:35 बजे तक रहेगा. यह दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय माना जाता है. आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवां मुहूर्त) होता है. माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं. जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर रहते हैं, तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है.

अमृतकाल 

शुक्रवार को रात 2:39 से 4:27 बजे तक अमृतकाल रहेगा. ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) है. इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है. इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है. यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना गया है.

राहुकाल

इस दिन राहुकाल रात 10:46 बजे से 12:12 बजे तक रहेगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है, जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है. स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है. इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है.

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गुलिक काल 

शुक्रवार को गुलिक काल सुबह 7:54 से 9:20 बजे तक रहेगा. गुलिक काल को 'विषैला समय' भी कहा जाता है. यह एक उपग्रह है, जिसे अशुभ माना जाता है. माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं. इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है. जो काम बार-बार करने हों, वे इस काल में किए जा सकते हैं. बैंक में पैसे जमा करना, दान देना, या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है.

यमगंड काल

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इस दिन यमगंड काल दोपहर 3:04 से 4:30 बजे तक रहेगा. यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है. इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु, या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है. इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए. इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने और पैसों के लेनदेन से भी बचना चाहिए.

शुक्रवार को सूर्य देव कन्या राशि में स्थित रहेंगे

शुक्रवार को सूर्य देव कन्या राशि में स्थित रहेंगे. जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन, कामकाज और बौद्धिक क्षमता पर विशेष रूप से पड़ता है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस दौरान व्यावहारिक और योजनाबद्ध तरीके से काम करना लाभकारी माना जाता है.

इस दिन चंद्रमा सुबह 6:47 धनु राशि में प्रवेश करेंगे. ज्योतिष के अनुसार, जन्म कुंडली या गोचर में जब चंद्रमा धनु राशि में स्थित होता है, तो इसका व्यक्ति के स्वभाव, सोच और जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है. धनु राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं, इसलिए चंद्रमा पर गुरु का सीधा प्रभाव रहता है. बिना सोचे-समझे आवेग में निर्णय लेना या जल्दबाजी करना इनकी कमजोरी हो सकती है.

दिशाशूल

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शुक्रवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है.

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