जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

महाकाल दर्शन के बाद जरूर जाए जूना महाकाल मंदिर, जाने यहां पूजा-अर्चना का धार्मिक महत्व और विशेषता

पंडित आकाश रावल ने आगे बताया कि यह मंदिर श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर के निर्गम मार्ग पर स्थित है. निर्गम मार्ग में सबसे पहले अनादि कल्पेश्वर महादेव के दर्शन होते हैं. इसके बाद सप्तर्षि मंदिर के समीप स्थित वृद्ध महाकाल या जूना महाकाल मंदिर आता है.

महाकाल दर्शन के बाद जरूर जाए जूना महाकाल मंदिर, जाने यहां पूजा-अर्चना का धार्मिक महत्व और विशेषता
Image Credit: IANS
Advertisement

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गर्भगृह में प्रवेश पर निर्धारित व्यवस्थाओं के कारण अनेक श्रद्धालु भगवान महाकाल का स्पर्श कर पूजन नहीं कर पाते. ऐसे श्रद्धालुओं के लिए ऐतिहासिक जूना महाकाल मंदिर विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है, जहां साल भर भक्त खुद अपने हाथों से भगवान शिव को जल अर्पित कर सकते हैं, पंचामृत अभिषेक कर सकते हैं और शिवलिंग का स्पर्श कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सकते हैं. 

महाकाल के गर्भगृह में प्रवेश न हो तो जाएं जूना महाकाल

जूना महाकाल मंदिर के पंडित आकाश रावल ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि भगवान श्री जूना महाकालेश्वर का यह स्थान अत्यंत प्राचीन और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि जूना का अर्थ ही पुराना या प्राचीन होता है और यह स्थान भगवान महाकाल की प्राचीन उपासना परंपरा का प्रतीक माना जाता है. भगवान महाकालेश्वर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं, जिनका उल्लेख प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में भी मिलता है. शास्त्रों में महाकालेश्वर को मृत्युलोक के अधिष्ठाता शिव के रूप में वर्णित किया गया है.

भगवान जूना महाकालेश्वर का विधि-विधान से करें पूजन-अभिषेक

आकाश रावल ने बताया कि जब भी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव उज्जैन आते हैं और महाकालेश्वर के दर्शन करते हैं, तब वे जूना महाकाल मंदिर भी पहुंचते हैं. यहां वे सपरिवार भगवान जूना महाकालेश्वर का विधि-विधान से पूजन-अभिषेक कराते हैं. इस दौरान ब्राह्मणों और मंदिर के पंडितों द्वारा दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक कराया जाता है तथा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न होती है.

Advertisement

जूना महाकाल मंदिर में पूजन का विशेष महत्व 

उन्होंने कहा कि जूना महाकाल मंदिर में पूजन का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है. स्कंद पुराण का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान महाकाल की साक्षी में किए गए संकल्प और पूजा को विशेष फलदायी माना गया है. श्रद्धालु यहां स्वास्थ्य, दीर्घायु, आरोग्य, धन-समृद्धि, शिक्षा, बुद्धि, रोजगार, व्यापार और अन्य मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए संकल्प लेकर पूजा-अर्चना करते हैं. मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए पंचामृत पूजन, रुद्राभिषेक, लघु रुद्राभिषेक सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों की व्यवस्था उपलब्ध है. रुद्र सूक्त, नमक-चमक जैसे वैदिक मंत्रों के साथ अभिषेक कराया जाता है. सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां आने वाले श्रद्धालु स्वयं अपने हाथों से भगवान शिवलिंग पर जल, दूध और पंचामृत अर्पित कर सकते हैं. साथ ही, शिवलिंग का स्पर्श कर पूजा करने का अवसर प्राप्त करते हैं.

यह भी पढ़ें

पंडित आकाश रावल ने आगे बताया कि यह मंदिर श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर के निर्गम मार्ग पर स्थित है. निर्गम मार्ग में सबसे पहले अनादि कल्पेश्वर महादेव के दर्शन होते हैं. इसके बाद सप्तर्षि मंदिर के समीप स्थित वृद्ध महाकाल या जूना महाकाल मंदिर आता है. इसी प्रांगण में बाल हनुमान मंदिर, अनादि कल्पेश्वर महादेव और सप्तर्षि मंदिर भी स्थित हैं, जिससे यह संपूर्ण क्षेत्र श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक परिसर बन जाता है.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें