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पाकिस्तान की हवा निकालने वाले MiG-21 की जगह लेगा स्वदेशी Tejas Mk1A फाइटर जेट, जानिए इसकी मारक क्षमता और अन्य खासियत
भारतीय वायुसेना पुराने और बार-बार दुर्घटनाग्रस्त हो रहे मिग-21 लड़ाकू विमान को स्वदेशी रूप से विकसित LCA तेजस Mk1A से बदलने वाली है. तेजस, भारत का पहला स्वदेशी मल्टीरोल सुपरसोनिक लड़ाकू विमान है, जिसे हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) ने संयुक्त रूप से विकसित किया है.
19 सितंबर 2025 को भारतीय वायुसेना (IAF) अपने सबसे पुराने, ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित लड़ाकू विमान मिग-21 को औपचारिक रूप से सेवा से विदा देने जा रही है. यह एक युग के अंत जैसा होगा, जब चंडीगढ़ एयरबेस पर स्थित 23 स्क्वाड्रन (पैंथर्स) एक विशेष समारोह में इस दिग्गज विमान को अंतिम सलामी देगा.अब जब यह विमान सेवा से बाहर होने जा रहा है, तो यह न केवल एक तकनीकी परिवर्तन है, बल्कि भारतीय सैन्य इतिहास का एक भावनात्मक मोड़ भी है.
भारतीय वायुसेना की योजना थी कि पुराने और बार-बार दुर्घटनाग्रस्त हो रहे मिग-21 लड़ाकू विमान को स्वदेशी रूप से विकसित LCA तेजस Mk1A से बदला जाए. तेजस, भारत का पहला स्वदेशी मल्टीरोल सुपरसोनिक लड़ाकू विमान है, जिसे हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) ने संयुक्त रूप से विकसित किया है.
हालांकि, तेजस की उत्पादन और डिलीवरी में देरी के कारण भारतीय वायुसेना को मिग-21 जैसे पुराने प्लेटफॉर्म को अपेक्षा से कहीं अधिक वर्षों तक सेवा में बनाए रखना पड़ा. यह स्थिति सुरक्षा, रखरखाव और पायलट सुरक्षा जैसे कई स्तरों पर चुनौतीपूर्ण रही.
क्यों हो रही देरी?
इंजन की कमी: तेजस Mk1A में GE F404 इंजन लगता है, जो अमेरिका से आता है. सप्लाई चेन की दिक्कतों की वजह से इंजन की डिलीवरी मार्च 2024 की बजाय मार्च 2025 में शुरू हुई. अभी तक सिर्फ दो इंजन आए हैं. मार्च 2026 तक हर महीने दो इंजन मिलने की उम्मीद है.
प्रोडक्शन में देरी: HAL ने 6 तेजस Mk1A तैयार किए, लेकिन इंजन न होने की वजह से ये ग्राउंडेड हैं. HAL ने बेंगलुरु में 16 और नासिक में 24 विमानों की प्रोडक्शन लाइन शुरू की है.
सर्टिफिकेशन: तेजस Mk1A में नए सिस्टम (जैसे AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम) जोड़े गए, जिनके टेस्टिंग में समय लगा. पहली उड़ान मार्च 2024 में हुई थी.
तेजस Mk1A की क्या है खासियत
स्वदेशी तकनीक: 50-60% स्वदेशी पुर्जे. भविष्य में उत्तम AESA रडार (भारत में बना) लगेगा.
उन्नत सिस्टम: नए रडार, मिसाइल्स और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम इसे मिग-21 से कई गुना बेहतर बनाते हैं.
सुरक्षा: अब तक तेजस का सिर्फ एक हादसा हुआ, जो मिग-21 के रिकॉर्ड से बहुत बेहतर है.
भारतीय वायुसेना ने वर्ष 2021 में तेजस Mk1A के 83 लड़ाकू विमानों के लिए 48,000 करोड़ रुपये का ऑर्डर दिया था. इसके अलावा, 97 और तेजस जेट की खरीद की योजना है, जिससे कुल संख्या बढ़कर 220 हो जाएगी. यह बेड़ा वायुसेना के लिए 10 स्क्वाड्रन तैयार करेगा, जो देश की हवाई रक्षा क्षमता को और मजबूत बनाएगा.
हालांकि, तेजस Mk1A की डिलीवरी में लगातार देरी के कारण भारतीय वायुसेना को पुराने मिग-21 विमानों को 2025 तक सेवा में बनाए रखना पड़ा. यह फैसला मजबूरी में लिया गया, क्योंकि पुराने विमानों के विकल्प समय पर उपलब्ध नहीं हो सके.
मिग-21 का सुनहरा इतिहास
बता दें आपको कि 1963 में पहली बार शामिल हुआ मिग-21 भारत का पहला सुपरसोनिक लड़ाकू जेट था. इसने अपने 62 वर्षों के लंबे सेवा काल में भारतीय वायुसेना की हवाई शक्ति को अभूतपूर्व मजबूती दी और कई युद्धों में निर्णायक भूमिका निभाई — चाहे वह 1965 और 1971 के युद्ध हों या कारगिल और बालाकोट जैसी आधुनिक कार्रवाई.
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