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मध्य प्रदेश में कार्बाइड गन की तबाही : भोपाल और ग्वालियर में प्रशासन का सख्त एक्शन, आंखों को नुकसान पहुंचाने वाले खिलौने पर रोक

मध्य प्रदेश सरकार ने भोपाल और ग्वालियर में खतरनाक ‘कार्बाइड गन’ पर पूरी तरह बैन लगा दिया है. यह खिलौना बच्चों की आंखों के लिए घातक साबित हो रहा था. प्रशासन ने इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाते हुए बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है.

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दीपावली के त्योहार पर मध्य प्रदेश में एक खतरनाक ट्रेंड ने सैकड़ों परिवारों की जिंदगी तहस-नहस कर दी. महज 150-200 रुपये में बिकने वाली 'कार्बाइड गन', जिसे देसी पटाखा गन भी कहा जाता है, के धमाकों से प्रदेशभर में 300 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं. इनमें ज्यादातर 7 से 14 साल के बच्चे हैं, जिनकी आंखों में गंभीर चोटें आई हैं. भोपाल में अकेले 162 से ज्यादा मामले दर्ज हो चुके हैं, जबकि ग्वालियर में पिछले तीन दिनों में 19 युवा प्रभावित हुए. इस घातक खिलौने के खतरे को देखते हुए भोपाल, ग्वालियर और विदिशा के प्रशासनों ने तत्काल प्रभाव से बैन लगा दिया है. उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश जारी हो चुके हैं.

कार्बाइड गन का कहर

कार्बाइड गन एक घरेलू तरीके से तैयार किया गया उपकरण है, जो PVC पाइप, लाइटर, ग्लू और कैल्शियम कार्बाइड से बनाया जाता है. इसमें पानी डालते ही कैल्शियम कार्बाइड एसिटिलीन गैस पैदा करता है, जो लाइटर से जलकर जोरदार धमाका करता है. सोशल मीडिया पर 'ग्रीन पटाखा' के नाम से वायरल वीडियो ने इसे बच्चों के बीच लोकप्रिय बना दिया. लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, यह गैस आंखों, दिमाग और नर्वस सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है. अगर गन तुरंत न फटे तो उत्सुक बच्चे झुककर देखते हैं, और ठीक उसी पल ब्लास्ट हो जाता है, जिससे कॉर्निया जल जाता है. भोपाल के सेवा सदन अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि चार बच्चे गंभीर हालत में हैं, और 10-14 मासूमों की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई.

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बैन के बाद गिरफ्तारियां शुरू

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भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने गुरुवार रात आदेश जारी कर कार्बाइड गन के निर्माण, बिक्री, भंडारण और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया. एडीएम प्रकाश नायक ने कहा कि उल्लंघन पर FIR दर्ज होगी. इसी क्रम में आनंद नगर, पिपलानी क्षेत्र में छापेमारी कर मोहम्मद ताहा (27 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास सामग्री बरामद हुई. पुलिस कमिश्नर हरिनारायण मिश्रा ने बताया कि अब तक 100 से ज्यादा कार्बाइड गन जब्त हो चुकी हैं. कोलार रोड पर एक युवक अजय को 80 यूनिट बेचते पकड़ा गया. हमीदिया अस्पताल में भर्ती 14 साल के हेमंत पंथी और 15 साल के आरिस के परिजनों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया.

ग्वालियर में 19 मामले

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ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने भी तत्काल प्रभाव से कार्बाइड गन पर रोक लगाई. भितरवार, लोहिया बाजार, नया बाजार बाड़ा और हीरा वेल्डिंग सेंटर जैसे क्षेत्रों में जांच टीमों को सक्रिय किया गया. पिछले तीन दिनों में 19 युवा घायल हो चुके हैं. डीडी नगर के सत्येंद्र सिंह गुर्जर और सूरज गुर्जर ने सोशल मीडिया पर 200 रुपये में गन ऑनलाइन खरीदी, लेकिन चलाते समय धमाका हो गया. सूरज का ऑपरेशन हो चुका है, लेकिन सत्येंद्र की हालत चिंताजनक है. मुरार जिला अस्पताल, जेएच और रतन ज्योति नेत्रालय में दर्जनों मामले भर्ती हैं. एक आरोपी को गिरफ्तार कर केस दर्ज किया गया.

अन्य जिलों में हाहाकार

यह समस्या भोपाल और ग्वालियर तक सीमित नहीं. विदिशा, इंदौर और जबलपुर में भी सैकड़ों मामले सामने आए हैं. प्रदेशभर में 300 से ज्यादा घायलों में 24 बच्चों की आंखों की रोशनी चली गई. ऑप्थेलमोलॉजी सोसाइटी ने सरकार से अपील की है कि उत्पादन और बिक्री पर सख्त बैन लगे. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 18 अक्टूबर को ही जिलाधिकारियों को निर्देश दिए थे, लेकिन गैस लाइटर, प्लास्टिक पाइप और कैल्शियम कार्बाइड आसानी से उपलब्ध रहे.

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क्यों है यह खिलौना इतना खतरनाक?

डॉ. हेमलता यादव ने बताया कि कैल्शियम कार्बाइड की क्षारीय प्रकृति से रासायनिक जलन होती है, जो अंधापन का कारण बन सकती है. राजस्थान के कोटा जैसे इलाकों में किसानों को इससे नुकसान हुआ है. प्रशासन अब पटाखा बाजारों में लगातार जांच कर रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है. यह पब्लिक सेफ्टी का सीधा मामला है, और अगर अभी कदम न उठे तो आने वाले त्योहारों में और हादसे हो सकते हैं. प्रशासन का यह एक्शन सराहनीय है, लेकिन परिवारों को भी बच्चों पर नजर रखनी होगी. दिवाली की रोशनी अब दर्द की आग बुझाने का वक्त है.

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