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योगी नहीं, कर्मयोगी कहिए! अपने 53वें जन्मदिन पर राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा के यजमान बने योगी आदित्यनाथ, ये संयोग नहीं, स्वर्णिम योग है!

अपने 53वें जन्मदिन पर योगी आदित्यनाथ ने राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा की, वो इस आयोजन के मुख्य यजमान थे. अपने जन्मदिवस पर प्राण प्रतिष्ठा करना कोई संयोग नहीं स्वर्णिम योग है!

योगी नहीं, कर्मयोगी कहिए! अपने 53वें जन्मदिन पर राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा के यजमान बने योगी आदित्यनाथ, ये संयोग नहीं, स्वर्णिम योग है!
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए 5 जून सुनहरे पन्नों में दर्ज हो गया. 5 जून 2025 को अपना 53वें वसंत में प्रवेश कर रहे योगी के लिए आज का दिन किसी वरदान से कम नहीं है. वैसे तो सूबे का मुख्यमंत्री बनना भी किसी चमत्कार से कम नहीं होता लेकिन लाखो-करोड़ों सनातनियों के अनन्य इष्ट और मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री राम के राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा का मौका मिले वो भी आपके जन्म दिवस पर ही मिले तो इसे क्या कहा जाए? इसे इश्वर की विशेष कृपा कहा जाएगा कि आप सूबे के सीएम हैं, योगी हैं, आपका जन्म है और पंचाग के अनुसार भी राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा के लिए यह दिन उपयुक्त पाया जाता है और आप बतौर यजमान पूरी प्रक्रिया को पूरी भक्ति और तन्मयता से निभाते हैं. योगी ने विधि-विधान के साथ राम दरबार (श्रीराम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान) की प्राण प्रतिष्ठा में भाग लिया, जो उनके लिए धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण था. यह समारोह अभिजीत मुहूर्त (दोपहर 1:25-1:40 बजे) में 101 वैदिक आचार्यों द्वारा संपन्न हुआ. धर्मज्ञों के अनुसार राम दरबार में प्राण प्रतिष्ठा और जन्मदिन का पड़ना एक स्वर्णिम संयोग है. अयोध्या के संत समाज और स्थानीय लोगों ने इसे विशेष रूप से पुण्य और ऐतिहासिक अवसर के रूप में देखा.

योगी का अयोध्या से विशेष और गहरा लगाव
योगी आदित्यनाथ का अयोध्या और राम मंदिर से गहरा भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव रहा है. वे नियमित रूप से अयोध्या का दौरा करते हैं और राम मंदिर से जुड़े विकास कार्यों की निगरानी करते हैं. इस समारोह में उनकी उपस्थिति ने उनके नेतृत्व में राम मंदिर आंदोलन और निर्माण कार्यों के महत्व को और मजबूत किया. 

योगी ने अपने जन्मदिन के दिन राम मंदिर के अलावा अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया, जैसे मां सरयू त्रयोदशी जन्मोत्सव, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के जन्मोत्सव समारोह, और विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पौधरोपण. इन सब आयोजनों ने उनके जन्मदिन को और भी विशेष बना दिया. तमाम योग बनना, एक योगी के लिए संभव हो सकता है.

500 साल के संघर्ष के बाद बने राम जन्म भूमि मंदिर में प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा का गवाह बनना किसी आशीर्वाद से कम नहीं है, उसमें भी आपके नेतृत्व में पूरा कार्यक्रम हो तो कहा जा सकता है कि स्वयं देव, गंधर्व ने चाहा होगा तो ये योग, योगी के लिए बना होगा. 

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अयोध्या राम मंदिर परिसर के पहले तल पर पूरे वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ राम दरबार की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कर दी गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित दुनिया भर से आए श्रद्धालु इस मौके पर विशेष तौर पर मौजूद रहे. योगी ही इस खास कार्यक्रम के यजमान थे. श्रीराम जन्मभूमि परिसर में राजा राम और परकोटे में विराजमान अन्य देवी-देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन भी हुआ. योगी ने इस अवसर पर साधु-संतों की मौजूदगी में भगवान श्रीराम का आशीर्वाद भी लिया. 

कहने को तो योगी अपना जन्मदिन नहीं मनाते लेकिन ग्रेगेरियन कैलेंडर ही सही, योगी कभी भी इस दिन को नहीं भूलेंगे. एक सच्चा योगी जो आया तो था संन्यासी बनने, बन गया शासक.

योगी में भविष्य देखती बीजेपी, टकटकी लगा रहे समर्थक!
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ख़ुद अपना जन्मदिन मनाने में यकीन नहीं रखते हैं. संसद में देश-समाज की सुरक्षा का मुद्दा उठाने वाले योगी, जो कभी संसद में भावुक हो जाते थे. वो देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश की ओर ले जाने, विकसित बनाने का ऐलान करता है और तमाम सोशल इंजीनियरिंग के बैरियर को तोड़ देता है और सबसे लंबे वक्त तक यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करने का रिकॉर्ड बनाता है. ये भी भी दुर्लभ संयोग है और ये यात्रा अभी भी अनवरत जारी है.

‘जीवन शैली सामान्य, प्रशासक कड़क’

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, एक संन्यासी, राजनेता और गोरखनाथ मठ के महंत के रूप में अपनी अनुशासित और संतुलित दिनचर्या के लिए जाने जाते हैं. उनकी दिनचर्या न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन को दर्शाती है, बल्कि अध्यात्म, जनसेवा और प्रशासनिक दायित्वों के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को भी उजागर करती है. योगी की यही छवि और मेहनत लगातार उन्हें आगे बढ़ा रही है. एक प्रभावी प्रशासक, सफल योजनाकार और सुशासन के प्रबल समर्थक होने के कारण उनकी छवि राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती जा रही है और वो पहले की तुलना में, हर दिन एक शक्तिशाली राजनेता बनते जा रहे हैं. 

योगी की दिनचर्या

जानकारों की मानें तो योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या की शुरुआत सुबह ब्रह्म मुहूर्च में लगभग 3:30 से 4:00 बजे के बीच होती है. एक संन्यासी के रूप में, वे अपनी सुबह को आध्यात्मिक साधना और योग के साथ शुरू करते हैं. गोरखनाथ मठ, जहां वे महंत के रूप में निवास करते हैं, उनकी आध्यात्मिक गतिविधियों का केंद्र है. 

कहा जाता है कि योगी का करिश्मा लगातार बढ़ता जा रहा है. उनके कार्यकाल में सनातन धर्म के समक्ष खड़े विवादास्पद मामलों का तेजी से निपटारा हो रहा है. उनके कार्यकाल में श्रीराम का दिव्य और भव्य मंदिर का निर्माण हुआ. हिंदुत्व के मुद्दे पर बिना लाग लपेट, बिना खुद को पॉलिटिकली करेक्ट बनने की कोशिश किए योगी आदित्यनाथ की मुखर आवाज उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है. यही कारण है कि राम मंदिर के निर्माण के बाद उनके यश में पूर्ण महाकुंभ 2025 के सफल आयोजन की ख्याति भी जुड़ गई. 

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जो लोग कहते थे कि एक योगी, एक संन्यासी को सत्ता से दूर रहना चाहिए उन्हें पता लग गया कि फर्क योगी और एक आम व्यक्ति के सत्ता में रहने से नहीं पड़ता है, कुछ असर डालता है तो उसका संस्कार, इच्छाशक्ति और सोच है. इस लिहाज से देखें तो योगी की दिनचर्या एक कर्मयोगी की जीवंत मिसाल है, जहां अध्यात्म, अनुशासन और जनसेवा का अनूठा संगम देखने को मिलता है. सुबह की साधना से लेकर रात की समीक्षा बैठक तक, उनका हर क्षण उत्तर प्रदेश की प्रगति और जनता के कल्याण के लिए समर्पित है. योगी का जीवन न केवल उनके व्यक्तित्व को उजागर करती है, बल्कि सनातन धर्म और उसके प्रहरियों पर पूर्वाग्रह रखने वालों को भी जवाब देता है.

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