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भारत के किस शहर को 'सन सिटी' के नाम से जाना जाता है? जानिए इस शहर से जुड़ी ख़ास बातें

थार रेगिस्तान के पास बसे इस शहर में हर साल भारी मात्रा में देशी-विदेशी पर्यटकों का आना जाना लगा रहता है। लोग इस जगह की खूबसूरती देखने के साथ साथ इसकी कहानी जानने के लिए भी उत्साहित रहते हैं। इस वैभवशाली शहर की स्थापना राव जोधा ने साल 1459 में की थी। दूर दूर से लोग यहाँ के विशाल किले और ऐतिहासिक महल, रंग-बिरंगे बाजार और स्वादिष्ट खाने के लिए खिंचे चले आते हैं। यहाँ साल के लगभग हर दिन आसमान बिल्कुल साफ, चमकीला और बादलों से मुक्त रहता है और बाकी जगहों के मुकाबले यहाँ चमकदार धूप भी रहती है जिस वजह से इस शहर का नाम 'सन सिटी' पड़ा। इसके अलावा चारों तरफ नीले रंग के घर होने की वजह से इसे ब्लू सिटी के नाम से भी जाना जाता है।

Image Credit: ChatGPT
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भारत में कुछ ऐसे राज्य हैं जो पर्यटकों के घूमने की लिस्ट में सबसे ऊपर होते हैं। उन्हीं राज्यों में से एक है राजस्थान जिसका हर शहर अपने आप में एक कहानी समेटे हुए है। राजस्थान का ऐसा ही एक शहर है जोधपुर, जो अपने नीले रंग के घरों की वजह से पूरी दुनिया में 'ब्लू सिटी' के नाम से मशहूर है। लेकिन क्या आपको पता है की इस खूबसूरत और ऐतिहासिक शहर का एक और नाम भी है? जी हाँ, चमकते हुए आसमान और साल के ज़्यादातर दिन मेहरबान रहने वाली धूप की वजह से जोधपुर को 'सन सिटी ऑफ इंडिया' भी कहा जाता है।

क्यों पड़ा इस शहर का नाम 'सन सिटी'?

थार रेगिस्तान के पास बसे इस शहर में हर साल भारी मात्रा में देशी-विदेशी पर्यटकों का आना जाना लगा रहता है। लोग इस जगह की खूबसूरती देखने के साथ साथ इसकी कहानी जानने के लिए भी उत्साहित रहते हैं। इस वैभवशाली शहर की स्थापना राव जोधा ने साल 1459 में की थी। दूर दूर से लोग यहाँ के विशाल किले और ऐतिहासिक महल, रंग-बिरंगे बाजार और स्वादिष्ट खाने के लिए खिंचे चले आते हैं। यहाँ साल के लगभग हर दिन आसमान बिल्कुल साफ, चमकीला और बादलों से मुक्त रहता है और बाकी जगहों के मुकाबले यहाँ चमकदार धूप भी रहती है जिस वजह से इस शहर का नाम 'सन सिटी' पड़ा। इसके अलावा चारों तरफ नीले रंग के घर होने की वजह से इसे ब्लू सिटी के नाम से भी जाना जाता है।

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यहाँ घूमने की जगहें 

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जोधपुर घूमने का प्लान अगर बना रहे हैं तो आपकी यात्रा तब तक पूरी नहीं मानी जा सकती, जब तक कि आप देश के सबसे विशाल और भव्य किलों में से एक 'मेहरानगढ़ किला' न देखें। ये विशाल किला जमीन से लगभग 400 फीट ऊंची पहाड़ी पर बना है जिसकी दीवारें इतनी ऊंची और मजबूत हैं कि प्राचीन काल में इसे भेदना किसी के लिए भी लगभग नामुमकिन था। इस किले की ऊंचाई पर जब आप खड़े होंगे तो आपको जोधपुर शहर के मशहूर नीले घरों का एक अनंत समंदर दिखाई देगा जो अपने आप में एक अद्भुत नज़ारा है।

मेहरानगढ़ के अलावा यहाँ घूमने के लिए है 'जसवंत थड़ा' जो की सफेद संगमरमर से बनी एक बेहद खूबसूरत इमारत है। इसे 'मारवाड़ का ताजमहल' के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा 'तूरजी का झालरा' है जो 18वीं शताब्दी में बनी एक ऐतिहासिक बावड़ी है। अगर आप फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो ये आपके लिए एक परफेक्ट जगह है। शहर के शोर-शराबे और भीड़ से ब्रेक चाहते हैं तो 'मंडोर गार्डन' जाएं। यहाँ आप इतिहास के साथ-साथ प्रकृति की गोद में कुछ शांत पल बिता सकते हैं। 

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खाने के शौकीनों के लिए जन्नत

शाही महलों और किलों के अलावा राजस्थान लोगों को दीवाना बनाता है अपने ज़ायकेदार खाने से। जोधपुर शहर पहुँचते ही आपको पारंपरिक खाने की खुशबू अपनी ओर खींचेगी। आपको यहाँ का दाल बाटी चूरमा, लाल मास, केर सांगरी और गट्टे की सब्जी ज़रूर खानी चाहिए। मीठे के शौकीनों के लिए गरमा-गरम कुरकुरी जलेबियां, रबड़ी और मुंह में घुल जाने वाले गुलाब जामुन भी हैं। 

खाने पीने के साथ साथ शॉपिंग का भी लुत्फ़ उठाना हो तो क्लॉक टॉवर मार्केट ज़रूर जाएं। ये यहाँ की सबसे व्यस्त जगहों में गिना जाता है जहाँ राजस्थानी मसालों से लेकर स्थानीय कलाकृतियां और हस्तशिल्प, पारंपरिक स्नैक्स और लेदर का सामान भी मिलेगा। वहीं नई सड़क और सोजती गेट पर बांधनी कपड़े, राजस्थानी जूतियां और अनोखी ट्राइबल ज्वेलरी की खरीदारी आप कर सकते हैं। 

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