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अब टोल चोरी नहीं चलेगी! दोगुना जुर्माना और RTO सेवाएं भी हो सकती हैं बंद
Toll Tax: इस नई तकनीक में गाड़ी को टोल प्लाजा पर रोकने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि कैमरे और डिजिटल सिस्टम अपने आप वाहन की पहचान करके टोल काट लेते है. लेकिन कई लोग यह सोच लेते हैं कि जब बैरियर ही नहीं है तो शायद बिना पैसे दिए निकलना आसान होगा.
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Toll Tax: भारत में अब टोल सिस्टम पूरी तरह हाई टेक होता जा रहा है. सरकार की कोशिश है कि लोगों को लंबी लाइनों में खड़ा न रहना पड़े और सफर बिना रुके आसानी से पूरा हो सके. इसी वजह से कई जगहों पर बैरियर - फ्री टोलिंग सिस्टम शुरू किया गया है. इस नई तकनीक में गाड़ी को टोल प्लाजा पर रोकने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि कैमरे और डिजिटल सिस्टम अपने आप वाहन की पहचान करके टोल काट लेते है. लेकिन कई लोग यह सोच लेते हैं कि जब बैरियर ही नहीं है तो शायद बिना पैसे दिए निकलना आसान होगा. अब ऐसा करना पहले जितना आसान नहीं रहा..सरकार ने इस सिस्टम को इतना स्मार्ट बना दिया है कि नियम तोड़ने वालों पर तुरंत नजर रखी जा सके..
कैमरों की नजर से बचना अब लगभग नामुमकिन
नई व्यवस्था में हाई रिजॉल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं, जो हर गुजरने वाली गाड़ी की नंबर प्लेट पढ़ लेते हैं. ये कैमरे हर समय एक्टिव रहते हैं और आपकी गाड़ी की पूरी जानकारी रिकॉर्ड करते हैं। अगर किसी वजह से फास्टैग से पैसे नहीं कटते, तो सिस्टम तुरंत उसे नोटिस कर लेता है.
सरकार लोगों को सीधे जुर्माना लगाने के बजाय पहले 72 घंटे का समय देती है, ताकि वे ऑनलाइन या ऐप के जरिए भुगतान कर सकें. लेकिन अगर तय समय में टोल फीस जमा नहीं की जाती, तो दोगुना जुर्माना देना पड़ सकता है. यानी छोटी सी लापरवाही जेब पर भारी पड़ सकती है.
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टोल चोरी करने वालों पर डिजिटल कार्रवाई
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अगर कोई जानबूझकर सिस्टम को चकमा देकर निकलने की कोशिश करता है, तो उसकी गाड़ी की जानकारी तुरंत वाहन डेटाबेस से निकाल ली जाती है. इसके बाद वाहन मालिक के मोबाइल नंबर पर ई-चालान भेज दिया जाता है.
सरकार अब सिर्फ मौके पर रोककर कार्रवाई नहीं कर रही, बल्कि पूरा सिस्टम डिजिटल तरीके से काम कर रहा है. इसलिए यह सोचना कि “कैमरे से बच जाएंगे” अब लगभग नामुमकिन है.
बार-बार गलती करने पर गाड़ी हो सकती है ब्लैकलिस्ट
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सबसे बड़ी परेशानी उन लोगों के लिए हो सकती है जो बार-बार टोल चोरी करने की कोशिश करते हैं. अगर किसी वाहन पर लंबे समय तक टोल बकाया रहता है या बार-बार नियम तोड़े जाते हैं, तो सरकार उस गाड़ी को ब्लैकलिस्ट या फ्लैग कर सकती है.
ऐसी स्थिति में वाहन से जुड़े कई जरूरी काम अटक सकते हैं. जैसे फिटनेस सर्टिफिकेट, गाड़ी ट्रांसफर, आरटीओ से जुड़े काम या दूसरी सरकारी सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं.. यानी छोटी सी चालाकी भविष्य में बड़ी परेशानी बन सकती है.
समझदारी इसी में है कि नियमों का पालन करें
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विशेषज्ञों का कहना है कि अब टोल सिस्टम पहले से कहीं ज्यादा सख्त और डिजिटल हो चुका है. इसलिए सबसे जरूरी बात यही है कि फास्टैग में हमेशा पर्याप्त बैलेंस रखें. अगर तकनीकी कारणों से भुगतान नहीं हो पाता, तो तय समय के भीतर उसे क्लियर कर दें. बैरियर हट गए हैं, लेकिन निगरानी पहले से ज्यादा मजबूत हो गई है. अब सड़क पर सफर आसान जरूर हुआ है, लेकिन नियम तोड़ना पहले से ज्यादा महंगा पड़ सकता है.