पाकिस्तानी कारोबारी ने रची थी ट्रंप-बाइडन को मारने की साजिश, ईरान ने दी थी सुपारी, शूटर्स निकले FBI एजेंट्स, ऐसे फूटा भांडा
एक पाकिस्तानी बिजनेसमैन ने ट्रंप-बाइडन और निक्की हेली को मारने की साजिश रची थी. उसे सुपारी अयातुल्लाह अली खामेनेई की IRGC ने दी थी. जिन्हें इस काम के लिए शूटर्स के तौर पर भर्ती किया गया, वही FBI एजेंट्स निकले.
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अमेरिका में टेररिज्म के प्रयास के आरोप में केस का सामना कर रहे एक पाकिस्तानी बिजनेसमैन ने कोर्ट में माना है कि उसे ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक हैंडलर द्वारा 2024 में तीन लोगों की हत्या करने के लिए भर्ती किया गया था.
पाकिस्तानी कारोबारी ने ली ट्रंप को मारने की सुपारी!
आपको बता दें कि पाकिस्तानी मूल के 47 वर्षीय कारोबारी आसिफ मर्चेंट (Asif Merchant) ने न्यूयॉर्क की अदालत में गवाही देते हुए कहा कि उसने यह काम IRGC के कहने पर किया.
IRGC ने परिवार को बनाया मोहरा!
उसने आगे कहा कि उसे और उसके परिवार को धमकियां दी गईं कि अगर उसने ऐसा नहीं किया तो उसके ईरान में रह रहे दूसरे परिवार को खत्म कर दिया जाएगा.
आसिफ मर्चेंट ने कोर्ट में क्या कहा?
जूरी के सामने उर्दू ट्रांसलेटर के जरिए मर्चेंट ने कहा, “मेरे परिवार की जान खतरे में थी और मुझे यह करना पड़ा.” आपको बता दें कि जुलाई 2024 में गिरफ्तार किए गए मर्चेंट ने अदालत में यह भी दावा किया कि उसे पहले से अंदेशा था कि वह पकड़ा जाएगा और उसने योजना बनाई थी कि गिरफ्तारी के बाद वह अमेरिकी अधिकारियों के साथ सहयोग करेगा.
जिन्हें समझा था शार्प शूटर्स, वो निकले FBI एजेंट्स!
ट्रायल में सामने आई जानकारी के मुताबिक मर्चेंट खुद हत्या नहीं करने वाला था, बल्कि उसकी भूमिका एक प्लानर की थी. उस पर आरोप है कि उसने डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की गतिविधियों और रैलियों की जानकारी जुटाई और हत्या के लिए दो हिटमैन की व्यवस्था की. इसके लिए उसने अपने एक रिश्तेदार से करीब 5,000 डॉलर भी लिए.
हालांकि मर्चेंट की यह पूरी साजिश इसलिए नाकाम हो गई क्योंकि जिन लोगों को उसने ट्रंप की हत्या के लिए हिटमैन के तौर पर हायर किया था, वे कोई और नहीं बल्कि FBI के अंडरकवर एजेंट्स थे.
कोर्ट ने नहीं मानी मर्चेंट की दलील!
मर्चेंट ने जब यह कहा कि उसे डर था कि वह पकड़ा जाएगा, तो उसने एडमिनिस्ट्रेशन और एजेंसियों से सहयोग करने की बात कही. इस पर सरकारी वकील Nina Gupta ने अदालत में सवाल उठाया कि अगर मर्चेंट सचमुच दबाव में था तो उसने गिरफ्तारी से पहले कानून प्रवर्तन एजेंसियों से संपर्क क्यों नहीं किया.
मर्चेंट ने अदालत को यह भी बताया कि पाकिस्तान में वह करीब 20 वर्षों तक बैंकिंग सेक्टर में काम कर चुका है और कपड़ों के कारोबार, कार बिक्री, केले के निर्यात और इंसुलेशन आयात जैसे कई व्यवसायों से जुड़ा रहा है.
2022 में IRGC के संपर्क में आया मर्चेंट!
उसके मुताबिक 2022 में उसका संपर्क ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) से जुड़े लोगों से हुआ, जिन्होंने बाद में उसे चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और यहां तक कि किसी की हत्या करवाने जैसे काम सौंपे.
दो परिवार के झोल में फंसा पाकिस्तानी कारोबारी
मर्चेंट का कहना है कि उसके दो परिवार हैं. एक पाकिस्तान में और दूसरा ईरान में. ईरान में रह रहे उसके परिवार को धमकियां दी जा रही थीं, जिसके कारण उसे इस साजिश में शामिल होना पड़ा.
अमेरिका क्या बोला?
इसी बीच अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश रचने वाले मास्टरमाइंड को मारने का दावा किया है. अमेरिका के युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने बुधवार को दावा किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की असफल साजिशों के मास्टरमाइंड को ढूंढकर मार दिया गया है. वहीं एक पाकिस्तानी व्यक्ति पर साजिशों में शामिल होने के आरोप में मुकदमा चलाया जा रहा है.
वॉशिंगटन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हेगसेथ ने कहा, “कल उस यूनिट के नेता को, जिसने राष्ट्रपति ट्रंप की हत्या का प्रयास किया था, ढूंढकर मार गिराया गया.” हालांकि उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) की उस यूनिट के नेता का नाम नहीं बताया. हेगसेथ ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने आखिरकार बदला ले लिया.”
ईरान जंग के बीच मुकदमे का संयोग!
पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट का मुकदमा न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन स्थित संघीय अदालत में पहले से निर्धारित था, जो ईरान युद्ध शुरू होने से काफी पहले तय किया गया था. मुकदमे की सुनवाई कर रहे जज एरिक कोमिटी ने संयोग पर टिप्पणी करते हुए कहा, “यह मुकदमा दिलचस्प समय में हो रहा है.”
आसिफ पर क्या आरोप लगे हैं?
आसिफ पर आतंकवाद के आरोप लगाए गए हैं. उस पर 2024 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान ट्रंप पर हमला करने के लिए शूटरों को किराए पर रखने की कथित साजिश में ईरान के साथ काम करने का आरोप है.
मामले की अभियोजक नीना गुप्ता ने सोमवार को अदालत को बताया कि मर्चेंट ने ऑपरेशन के लिए कपड़ों के व्यवसाय को आड़ के रूप में इस्तेमाल किया और वह उन लोगों पर हमला करना चाहता था, जिन्हें वह पाकिस्तान और मुस्लिम दुनिया के खिलाफ मानता था.
कब गिरफ्तार हुआ था आसिफ मर्चेंट?
आसिफ को जुलाई 2024 में अमेरिका छोड़ने की कोशिश करते समय गिरफ्तार किया गया था.
इस कथित साजिश से असंबंधित रूप से, मर्चेंट की गिरफ्तारी के एक दिन बाद पेनसिल्वेनिया में एक चुनावी रैली के दौरान एक अमेरिकी व्यक्ति ने ट्रंप की हत्या की कोशिश की, लेकिन गोली कुछ इंच से चूक गई और केवल उनके कान को चोट पहुंची.
और क्या खुलासे हुए, समझिए
चुनाव अभियान के दौरान बाइडेन प्रशासन ने ट्रंप के लिए संभावित खतरों को लेकर चेतावनी जारी की थी.
अभियोजन पक्ष ने कहा कि मर्चेंट ने अपने संपर्क में रहे एक पाकिस्तानी व्यक्ति से शूटरों को किराए पर लेने की बात की थी, जो फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) का मुखबिर निकला.
उस व्यक्ति ने उसे ऐसे अंडरकवर एजेंटों से मिलवाया, जो खुद को किराए के शूटर बताकर पेश कर रहे थे. आसिफ ने उन्हें अपनी योजना बताई और अग्रिम के तौर पर पांच हजार डॉलर भी दिए.
FBI एजेंट जैकलीन स्मिथ ने अदालत को बताया कि आसिफ ने स्वीकार किया था कि उसे IRGC से प्रशिक्षण मिला था.
कैसे संपर्क करता था आसिफ?
अधिकारियों के अनुसार वह पाकिस्तान के रास्ते भेजे गए उपहार पैकेजों में जानकारी छिपाकर उनसे संपर्क करता था. 2024 में ट्रंप के खिलाफ एक और कथित साजिश भी सामने आई थी.
उस वर्ष दायर एक अलग मामले में अभियोजकों ने अफगान नागरिक फरहाद शकेरी पर हत्या के लिए सुपारी देने का आरोप लगाया था. उस पर अनुपस्थिति में आरोप तय किए गए, क्योंकि वह अमेरिका से बाहर था.
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IRGC ने ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में अपने शीर्ष नेता कासिम सुलेमानी की हत्या का बदला लेने की कसम खाई थी.
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