×
जिस पर देशकरता है भरोसा

एक रिपोर्ट में बड़ा दावा- आपस में भिड़े राष्ट्रपति पेजेशकियान और विदेश मंत्री अराघची, ईरान की सियासत में मची खलबली!

Iran Internal Conflicts: ईरान में राष्ट्रपति पेजेशकियान द्वारा विदेश मंत्री अब्बास अराघची को उनके पद से हटाने की तैयारी की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है.

Author
01 May 2026
( Updated: 01 May 2026
05:33 PM )
एक रिपोर्ट में बड़ा दावा- आपस में भिड़े राष्ट्रपति पेजेशकियान और विदेश मंत्री अराघची, ईरान की सियासत में मची खलबली!
Image Source: IANS
Advertisement

ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच ईरानी सरकार के भीतर अंदरूनी कलह की कई बार खबरे आ चुकी हैं, जिसे ईरान ने हमेशा नकारा है. लेकिन एक बार फिर से कुछ इसी तरह का दावा किया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबफ कथित तौर पर विदेश मंत्री अब्बास अराघची को पद से हटाने की मांग कर रहे हैं.

अराघची पर राष्ट्रपति की अनदेखी का आरोप

ब्रिटेन स्थित मीडिया संस्थान 'ईरान इंटरनेशनल' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने राष्ट्रपति की सत्ता को दरकिनार करते हुए 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' (IRGC) के निर्देशों का अधिक पालन किया है. आरोप ये भी है कि अराघची एक कैबिनेट मंत्री के बजाय रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर अहमद वाहिदी के सहायक के रूप में ज्यादा काम किया है. सूत्रों का कहना है कि विदेश मंत्री वाहिदी के साथ पूर्ण समन्वय में काम कर रहे हैं और कथित तौर पर राष्ट्रपति पेजेशकियान को सूचित किए बिना उनके निर्देशों पर आधारित नीतियों को लागू कर रहे हैं..

सैन्य दखल से नाराज राष्ट्रपति पेजेशकियान ने दी चेतावनी

इस अंदरूनी विवाद की वजह से राष्ट्रपति पेजेशकियान में गहरी असंतोष की भावना है और उन्होंने अपने करीबियों से स्पष्ट कर दिया है कि अगर कूटनीतिक फैसलों में सैन्य दखल इसी तरह बना रहा, तो वह अराघची को पद से हटा देंगे. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति इस बात से आहत हैं कि संवेदनशील समय में विदेश मंत्री का झुकाव सैन्य कमान की ओर ज्यादा है.

Advertisement

युद्ध प्रबंधन और नियुक्तियों को लेकर गहरा मतभेद

हालांकि, सत्ता की यह खींचतान कोई नई नहीं है. राष्ट्रपति पेजेशकियान और सैन्य कमांडर वाहिदी के बीच मतभेद मार्च के अंत में ही स्पष्ट हो गए थे. विवाद का मुख्य कारण युद्ध के प्रबंधन और देश की चरमराती अर्थव्यवस्था पर इसके दुष्प्रभाव हैं.

सेना का महत्वपूर्ण पदों पर कब्जे का दावा

यह भी पढ़ें

अब हालात इतने पेचीदा हो गए हैं कि राष्ट्रपति खुद को एक 'राजनीतिक गतिरोध' में फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं. ऐसा भी दावा किया जा रहा है कि उनसे संघर्ष के दौरान मारे गए सरकारी अधिकारियों की जगह नए अधिकारियों को नियुक्त करने का अधिकार छीन लिया गया है. दूसरी ओर, वाहिदी का तर्क है कि वर्तमान 'युद्धकालीन आपातकाल' को देखते हुए सभी महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों का नियंत्रण सीधे तौर पर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के हाथ में होना चाहिए.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें