जंग के हालात के बीच UAE ने पाकिस्तान को याद दिलाई उसकी औकात, शहबाज सरकार से मांग लिए अपने 2 अरब डॉलर
ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध से खाड़ी देशों की तेल-गैस सप्लाई प्रभावित हुई है और क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है. इसी बीच UAE ने पाकिस्तान से अपना कर्ज तुरंत लौटाने को कहा है. पाकिस्तान ने महीने के अंत तक 2 अरब डॉलर चुकाने का फैसला किया है.
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मिडिल ईस्ट बढ़ते तनाव ने अब सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित न रहकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी झकझोरना शुरू कर दिया है. अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई का सीधा असर खाड़ी देशों पर पड़ रहा है. सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के इशारे पर बिचौलिया वाली भूमिका निभा रहा पाकिस्तान अब कंगाली के हालात पर आ गया है और इस बुरे हालात पर उसके मित्र मुस्लिम देश ने उसे बड़ा झटका दिया है.
पाकिस्तान पर कर्ज वापसी का दबाव
इसी बीच एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, UAE ने पाकिस्तान को दिए गए अरबों डॉलर के कर्ज की तुरंत वापसी की मांग कर दी है. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब क्षेत्रीय हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं और हर देश अपने आर्थिक संसाधनों को सुरक्षित करने में लगा है.
2 अरब डॉलर लौटाने का फैसला
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए इस महीने के अंत तक करीब 2 अरब डॉलर लौटाने का फैसला किया है. यह रकम पहले पाकिस्तान के भुगतान संतुलन को संभालने के लिए दी गई थी और स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान में जमा थी. पाकिस्तान इस कर्ज पर लगभग 6 प्रतिशत ब्याज भी चुका रहा था.
पहले मिलती थी राहत
पहले UAE हर साल इस कर्ज को आगे बढ़ा देता था, जिससे पाकिस्तान को राहत मिलती थी. लेकिन हाल ही में इस अवधि को केवल कुछ महीनों के लिए बढ़ाया गया और अब इसे पूरी तरह वापस लेने का फैसला किया गया है. यह बदलाव साफ तौर पर बताता है कि खाड़ी देशों पर युद्ध का कितना गहरा असर पड़ा है. हालांकि फिलहाल पाकिस्तान के पास 21 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, जिससे वह इस कर्ज को चुकाने में सक्षम दिख रहा है. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में पाकिस्तान को फिर से बाहरी मदद की जरूरत पड़ सकती है.
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बताते चलें कि यह घटनाक्रम सिर्फ एक आर्थिक लेन-देन नहीं, बल्कि उस बड़े बदलाव का संकेत है जो युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर देखने को मिल रहा है. अब देखना यह होगा कि हालात कब सामान्य होते हैं और इसका असर कितने लंबे समय तक बना रहता है.
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