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कौन हैं मोजतबा खामेनेई? जिन्हें ईरान के 88 धर्मगुरुओं ने बनाया देश का नया सुप्रीम लीडर

युद्ध जैसे हालात के बीच ईरान को नया सुप्रीम लीडर मिल गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को 88 धर्मगुरुओं की सभा ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने देश का तीसरा सर्वोच्च नेता नियुक्त किया है.

कौन हैं मोजतबा खामेनेई? जिन्हें ईरान के 88 धर्मगुरुओं ने बनाया देश का नया सुप्रीम लीडर
Mojtaba Khamenei (File Photo)

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच Iran की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. रिपोर्ट्स के अनुसार देश को नया सर्वोच्च नेता मिल गया है. दिवंगत नेता अली खामेनेई (Ali Khamenei) के बेटे मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है. यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान का टकराव Israel और United States के साथ लगातार बढ़ रहा है. इसलिए इस नियुक्ति को क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.

88 धर्मगुरुओं की सभा ने दी मंजूरी

रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की शक्तिशाली संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स (Assembly of Experts) ने नए सुप्रीम लीडर के नाम पर अंतिम मुहर लगाई. 88 धर्मगुरुओं की इस परिषद ने निर्णायक वोट के बाद मोजतबा खामेनेई को देश की इस्लामिक व्यवस्था का तीसरा सर्वोच्च नेता नियुक्त करने की घोषणा की. परिषद की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह फैसला देश की स्थिरता और सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है. ईरान में सुप्रीम लीडर का पद बेहद शक्तिशाली माना जाता है, क्योंकि वही देश की सेना, विदेश नीति और कई महत्वपूर्ण संस्थाओं पर अंतिम निर्णय लेते हैं.

कौन हैं मोजतबा खामेनेई?

मोजतबा खामेनेई दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के दूसरे पुत्र हैं. हालांकि ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में नेतृत्व वंशानुगत नहीं माना जाता, लेकिन धार्मिक और सैन्य हलकों में उनका प्रभाव लंबे समय से मजबूत रहा है. विशेष रूप से रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के साथ उनके करीबी संबंधों की चर्चा होती रही है. माना जाता है कि पिछले कई वर्षों से वे पर्दे के पीछे से सत्ता संचालन में अहम भूमिका निभा रहे थे. इसी कारण उनका नाम पहले से ही संभावित उत्तराधिकारी के रूप में चर्चा में था.

तीन सदस्यीय समिति संभाल रही थी जिम्मेदारी

अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरान में नेतृत्व को लेकर कुछ समय तक अनिश्चितता बनी रही. बताया जाता है कि Tehran में हुए हमले के बाद उनकी मौत हो गई थी. इसके बाद लगभग एक सप्ताह तक देश में नया नेता तय नहीं हो सका. इस दौरान शासन की जिम्मेदारी एक तीन सदस्यीय समिति को सौंपी गई थी. हालांकि लंबे समय तक नेतृत्व खाली रहने से देश के कुछ वर्गों में असंतोष भी दिखाई देने लगा था. कई लोगों का मानना था कि युद्ध जैसे हालात में सेना और जनता का मनोबल बनाए रखने के लिए एक मजबूत नेतृत्व का होना जरूरी है.

इजरायल की कड़ी चेतावनी

इधर इजरायल ने ईरान के नए संभावित नेता को लेकर सख्त रुख अपनाया है. Israel Defense Forces ने चेतावनी देते हुए कहा कि वह खामेनेई के उत्तराधिकारी और उन्हें नियुक्त करने वाले लोगों पर भी नजर रखेगा. बयान में कहा गया कि अगर जरूरत पड़ी तो इजरायल कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा. इस चेतावनी ने पहले से ही तनावपूर्ण माहौल को और गंभीर बना दिया है.

सुरक्षा कारणों से गोपनीय रही प्रक्रिया

इजरायल की धमकियों और बढ़ते सैन्य तनाव को देखते हुए नए सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा गया. विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियुक्ति केवल ईरान की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे मध्य पूर्व की रणनीतिक स्थिति प्रभावित हो सकती है. आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया नेतृत्व अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष को किस दिशा में ले जाता है.

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बताते चलें कि  मोजतबा खामेनेई के सुप्रीम लीडर बनने के बाद अब पूरी दुनिया की नजर ईरान की अगली रणनीति पर टिकी है. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच नया नेतृत्व क्षेत्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को किस दिशा में ले जाएगा, यह आने वाला समय ही तय करेगा. हालांकि इतना तय है कि यह फैसला ईरान ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक राजनीति पर असर डाल सकता है.

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