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बात-बात पर मां-बहन की गालियां देने वालों को इस गांव ने सिखाया सबक, उठाया ऐसा कदम कि देशभर में बना मिसाल

महाराष्ट्र का एक गांव है जिसने गालियों के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है. गाली जिसे तमाचा नहीं फैशन लगती है उसे सबक सिखाने के लिए ग्राम पंचायत ने बड़ा कदम उठाया है.

बात-बात पर मां-बहन की गालियां देने वालों को इस गांव ने सिखाया सबक, उठाया ऐसा कदम कि देशभर में बना मिसाल

किसी को कशिश की तरह, किसी को इश्क में नमक की तरह, तो किसी को फैशन. आज के दौर में गालियों के साथ बात करना नॉर्मल से भी नॉर्मल हो गया है. बात-बात पर जबान पर मां-बहन की गालियां आ जाती हैं और लोग बड़े आराम से बहन बेटियों को दी गई गाली को स्वीकार भी कर लेते हैं, लेकिन महाराष्ट्र का एक गांव है जिसने गालियों के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है. 

महाराष्ट्र के अहिल्यानगर के कोलगांव गांव में महिलाओं के सम्मान और गरिमा के लिए बहुत बड़ा कदम उठाया है. यहां की ग्राम पंचायत ने तय किया है कि अगर कोई भी शख्स मां-बहन पर, मां बहन का जिक्र कर गाली देता पाया गया तो उस पर 500 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. 

महिलाओं के सम्मान के लिए साथ आए ग्रामीण 

दरअसल, इंटरनेशनल महिला दिवस के दिन कोलगांव में सम्मान कार्यक्रम रखा गया था. इसी कार्यक्रम में सेल्फ हेल्प ग्रुप की सदस्य पूजा जगताप ने यह प्रस्ताव रखा कि गांव में मां-बहन से जुड़ी गालियां देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. इस सुझाव पर चर्चा के लिए गांव में एक बैठक हुई. जिसमें सभी ने एक स्वर में इस पर हामी भरी. 

क्या है जुर्माने का आधार? 

गांव के सरपंच पुरुषोत्तम लगद के मुताबिक, फैसला सोच समझकर लिया गया है. नियम का गलत इस्तेमाल न हो, इसलिए कार्रवाई केवल डिजिटल सबूत पर ही होगी. मतलब घटना का ऑडियो या वीडियो सबूत दिखाना होगा. वहीं, जुर्माने से जो रकम आएगी. उसे विकास कार्यों में ही लगाया जाएगा. 

इस अनोखे प्रस्ताव को रखने वालीं पूजा जगताप का कहना है कि यह मांग गांव की महिलाओं की ही थी. उन्होंने कहा कि आज कल आसानी से गालियां देकर मां-बहनों को अपमानित किया जाता है. कोलगांव की इस छोटे कदम से बड़ा बदलाव आएगा. वे लोग जो अपने बच्चों के लिए भाषा की गालियों वाली विरासत छोड़ रहे हैं. उन्हें भी अब जुर्माने का डर सताएगा और वह गाली देने से बचेंगे. हैरत की बात तो ये है कि महिलाएं भी मां-बहनों वाली गालियां देती हैं. 

भारत के किस शहर में हैं सबसे ज्यादा गालीबाज? 

देश का वो शहर जो उसका दिल है, शान है, ब्यूरोक्रेट्स से लेकर नेताओं तक की मंज़िल है. भारत ही नहीं जिसे दुनिया उसकी विरासत, तहज़ीब और दिल से जानती है. देश की राजधानी दिल्ली अब गालियों की राजधानी बन गई है. ये खुलासा सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन के फाउंडर और महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस डॉक्टर सुनील जागलान के एक सर्वे में हुआ है. 

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इस सर्वे में 11 साल में करीब 70 हजार लोगों को शामिल किया. इन लोगों में युवा, माता-पिता, टीचर, डॉक्टर, ऑटो ड्राइवर, स्कूल और कॉलेज के स्टूडेंट, पुलिसकर्मी, वकील, बिजनेसमैन, सफाईकर्मी, प्रोफेसर, पंचायत सदस्य शामिल थे. सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के लोग सबसे ज्यादा गाली देते हैं, दिल्ली में रहने वाले मां, बहन और बेटी के लिए भर भरकर अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं और हां दिल्ली में मां बहन बेटियों पर अपशब्दों का इस्तेमाल करने में मां बहन बेटियां भी कम नहीं है. यहां सिर्फ मर्द ही नहीं लड़कियां भी गाली देने में सबसे आगे हैं. सर्वे के मुताबिक़, दिल्ली के 80 प्रतिशत लोग गाली देते हैं. 

दिल्ली के बाद टॉप गालीबाज राज्य 

पंजाब में 78 प्रतिशत लोग अपशब्दों या गाली का इस्तेमाल करते हैं
इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश है
UP में 74 % लोग अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं
चौथे नंबर पर बिहार का नाम है
यहां भी UP की तरह ही 74 % लोग अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं
पांचवे पायदान पर है राजस्थान का नाम है. जहां 68 % लोग गाली देकर बात करते हैं. 
छठे नंबर पर है हरियाणा का नाम है, जहां 62 % लोग गालीबाज हैं.

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इस लिस्ट में सातवें पायदान पर महाराष्ट्र है. जहां 58 % लोग अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं. वहीं, लिस्ट में आठवां नाम गुजरात का है. जहां 55 % लोग गाली का इस्तेमाल करते हैं. जबकि मध्य प्रदेश नौंवे स्थान पर है. जहां 48 % लोग गाली देकर बात करते हैं. वहीं, दसवें नंबर पर है पहाड़ी राज्य उत्तराखंड, जहां 45 % लोग गाली में बात करते हैं. 

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