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Meta RayBan Display: टच नहीं, अब बस देखो और कंट्रोल करो! स्मार्टफोन को चुनौती दे रहा नया डिवाइस

AI: इस डिवाइस को लेकर काफी चर्चा थी, लेकिन वो फ्लॉप साबित हुआ. इससे यह समझ आता है कि केवल AI लगाना काफी नहीं है, डिवाइस का प्रैक्टिकल होना भी जरूरी है.

Meta RayBan Display: टच नहीं, अब बस देखो और कंट्रोल करो! स्मार्टफोन को चुनौती दे रहा नया डिवाइस
Source: Meta RayBan Display
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Meta RayBan Display: पिछले कुछ समय से ये सवाल तेजी से चर्चा में है कि क्या भविष्य में स्मार्टफोन की जगह कोई नया डिवाइस ले सकता है? इस पर कई टेक कंपनियां काम कर रही हैं और कुछ उदाहरण भी हमारे सामने हैं. जैसे कि कुछ समय पहले Humane AI Pin लॉन्च हुआ था, जिसे Apple के एक पूर्व अधिकारी ने बनाया था. इस डिवाइस को लेकर काफी चर्चा थी, लेकिन वो फ्लॉप साबित हुआ. इससे यह समझ आता है कि केवल AI लगाना काफी नहीं है, डिवाइस का प्रैक्टिकल होना भी जरूरी है.

स्मार्ट ग्लासेज़ का क्रेज़ बढ़ा, Meta सबसे आगे

हाल के सालों में AI स्मार्ट ग्लासेज का चलन तेजी से बढ़ा है. खासकर Meta और RayBan के मिलकर बनाए गए स्मार्ट ग्लासेज़ दुनिया भर में हॉट सेलिंग प्रोडक्ट बन चुके हैं। Meta को भरोसा है कि वो इन ग्लासेज़ के ज़रिए एक पूरा डिजिटल इकोसिस्टम तैयार कर सकती है. हाल ही में Meta के CEO मार्क ज़करबर्ग ने कहा कि "भविष्य में जिनके पास स्मार्ट ग्लास नहीं होंगे, वो पीछे रह जाएंगे." भले ही ये एक मार्केटिंग लाइन हो, लेकिन इसमें सच्चाई भी है, क्योंकि तकनीक तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ रही है.

Meta RayBan Display: अब चश्मा ही बन गया स्क्रीन

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Meta ने अपने हालिया Meta Connect इवेंट में अगली जनरेशन के RayBan Display स्मार्ट ग्लासेज लॉन्च किए हैं. ये पहले से काफी एडवांस हैं क्योंकि इनमें अब इनबिल्ट स्क्रीन दी गई है. यानी अब आप इस चश्मे से वीडियो देख सकते हैं, मैप्स पर लाइव नेविगेशन पा सकते हैं और बहुत कुछ कर सकते हैं. इसे अब Augmented Reality (AR) ग्लास कहा जा सकता है. इन ग्लासेज़ में आपको ऐसा नहीं लगेगा कि आंखों के सामने कुछ आ रहा है. स्क्रीन की तरह दिखने वाली चीज़ आपके सामने कुछ फीट दूर प्रोजेक्ट होती है, जिससे आपका विजन ब्लॉक नहीं होता. यह अनुभव लगभग वैसा होता है जैसे आप कार के हेडअप डिस्प्ले (HUD) में कुछ देख रहे हों.

डिस्प्ले होने के बावजूद नहीं होगी परेशानी

बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर चश्मे में स्क्रीन होगी, तो देखने में दिक्कत होगी या ध्यान भटकेगा. लेकिन Meta का कहना है कि ऐसा नहीं है. स्क्रीन इतनी समझदारी से डिज़ाइन की गई है कि यह आपकी नजर के सामने तैरती हुई दिखाई देती है, लेकिन आपके वास्तविक दृश्य को नहीं छुपाती. आप इसे चाहें तो बंद भी कर सकते हैं और फिर ये चश्मा सामान्य सनग्लास की तरह काम करेगा.

क्या स्मार्ट ग्लासेज स्मार्टफोन की जगह ले पाएंगे?

अब सवाल उठता है कि क्या स्मार्ट ग्लासेज वाकई में स्मार्टफोन को पूरी तरह रिप्लेस कर सकते हैं? इसका जवाब फिलहाल है, नहीं पूरी तरह नहीं, लेकिन धीरे-धीरे निर्भरता कम जरूर हो सकती है.वर्तमान में जो AR हेडसेट्स जैसे Apple Vision Pro या Meta Quest हैं, वो भारी होते हैं और लंबे समय तक पहनना मुश्किल होता है. लेकिन स्मार्ट ग्लासेज़ हल्के, पहनने में आसान और कहीं भी यूज़ करने योग्य हैं. अगर आने वाले समय में कंपनियां Vision Pro जैसे सभी फीचर्स को इन छोटे ग्लासेज में समेटने में कामयाब हो जाती हैं, तो ये एक बहुत बड़ा बदलाव होगा.

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Meta RayBan Display में क्या-क्या कर सकते हैं?

इन स्मार्ट ग्लासेज में कई ऐसे फीचर्स दिए गए हैं जो रोज़मर्रा के काम में बहुत काम आ सकते हैं. आप इससे:

  • रील्स या वीडियो देख सकते हैं
  • गाने सुन सकते हैं, और केवल आप ही ऑडियो सुन पाएंगे
  • कॉल और मैसेज कर सकते हैं.
  • रियल टाइम नेविगेशन पा सकते हैं.
  • हैंड जेस्चर से चीजें कंट्रोल कर सकते हैं.
  • इन ग्लासेज़ के साथ एक न्यूरल रिस्ट बैंड भी आता है, जिससे आप हाथ के इशारे से स्क्रीन कंट्रोल कर सकते हैं. यानी बिना हाथ उठाए, आप चश्मे में स्क्रीन पर कुछ भी ओपन या बंद कर सकते हैं.

बाजार में और भी प्लेयर्स हैं

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Meta के अलावा भी कई कंपनियां स्मार्ट ग्लासेज़ पर काम कर रही हैं. हाल ही में Halliday Glasses लॉन्च हुए हैं, जिनमें व्यूफाइंडर है और एक ग्लास में ही स्क्रीन दिखती है. वहीं Meta के Orion Glasses भी जल्द आ सकते हैं, जो Snapchat के AR ग्लासेज का मुकाबला करेंगे. दूसरी तरफ, Apple Vision Pro जैसा डिवाइस अभी भी टेक्नोलॉजिकल तौर पर बेहतरीन है, लेकिन भारी होने की वजह से लंबे समय तक यूज करना मुश्किल होता है.

भविष्य कैसा दिखेगा?

अब सवाल यही है कि आगे क्या होगा? क्या स्मार्टफोन वाकई में गायब हो जाएगा? इसका जवाब है, अभी नहीं, लेकिन Wearable टेक्नोलॉजी में तेजी से सुधार हो रहा है. स्मार्ट ग्लासेज़ धीरे-धीरे स्मार्टफोन की जगह ले सकते हैं या कम से कम कई कामों के लिए स्मार्टफोन की जरूरत को खत्म कर सकते हैं.

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