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हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण बना जनउत्सव, जय श्रीराम” और "गंगा मैया की जय" उद्घोष से गूंजता रहा समारोह

Ganga Expressway: जनसमूह के बीच से उठती “मोदी-मोदी” और “योगी-योगी” की गूंज ने पूरे माहौल को और ऊर्जावान बना दिया.  इस आत्मीय स्वागत को देखकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों ने मुस्कुराते हुए हाथ जोड़कर जनता का अभिवादन किया. मंच पर उपस्थित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भी जनता जनार्दन को प्रणाम कर उसके उत्साह का सम्मान किया.

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29 Apr 2026
( Updated: 29 Apr 2026
05:11 PM )
हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण बना जनउत्सव, जय श्रीराम” और "गंगा मैया की जय" उद्घोष से गूंजता रहा समारोह
Image Source: UP Information
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गंगा एक्सप्रेसवे के ऐतिहासिक लोकार्पण अवसर पर हरदोई का कार्यक्रम स्थल उस समय जन-उत्सव में बदल गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंच पर पहुंचे. उनके आगमन के साथ ही हजारों की भीड़ स्वतः स्फूर्त भाव से कुर्सियों से खड़ी हो गई और पूरा पंडाल “भारत माता की जय”, “जय श्रीराम”, “गंगा मैया की जय” तथा “हर-हर गंगे” के उद्घोष से गूंजायमान हो उठा.

“मोदी-मोदी” और “योगी-योगी” की गूंज ने पूरे माहौल को और ऊर्जावान बना दिया

जनसमूह के बीच से उठती “मोदी-मोदी” और “योगी-योगी” की गूंज ने पूरे माहौल को और ऊर्जावान बना दिया.  इस आत्मीय स्वागत को देखकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों ने मुस्कुराते हुए हाथ जोड़कर जनता का अभिवादन किया. मंच पर उपस्थित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भी जनता जनार्दन को प्रणाम कर उसके उत्साह का सम्मान किया.

भीषण गर्मी के बावजूद दूर-दराज के जिलों से पहुंचे लोगों का जोश और उत्साह का भाव देखने लायक था. विकास और आस्था के इस संगम ने माहौल को उत्सव में बदल दिया, जहां हर चेहरा इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने को उत्साहित दिखा. लोग हाथ उठाकर अभिवादन कर रहे थे तो कई अपने मोबाइल में इस यादगार पल को कैद करने में जुटे थे.

कार्यक्रम स्थल का समूचा दृश्य यह अहसास करा रहा था कि गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि जन-आकांक्षाओं और विकास की एक नई यात्रा का उत्सव है, जिसका इंतजार लोगों को लंबे समय से था..

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पूर्व और पश्चिम यूपी को जोड़ता विकास कॉरिडोर

गंगा एक्सप्रेसवे 594 किमी लंबा ग्रीनफील्ड, एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे है, जो मेरठ से प्रयागराज तक 12 जिलों को एक सशक्त आर्थिक धुरी में पिरोता है. 6 लेन (भविष्य में 8 लेन तक विस्तार योग्य) वाला यह मेगा प्रोजेक्ट लगभग 36-37 हजार करोड़ रुपये की लागत से पीपीपी मॉडल पर विकसित किया गया है. यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की विकसित औद्योगिक बेल्ट को पूर्वांचल के कृषि और श्रम-आधारित क्षेत्रों से सीधे जोड़ते हुए उत्पादन, आपूर्ति और बाजार के बीच दूरी को कम करता है. परिणामस्वरूप, यह केवल यातायात का मार्ग नहीं, बल्कि निवेश, उद्योग और रोजगार को गति देने वाला वह कनेक्टिविटी इंजन है, जो प्रदेश की आर्थिक ताकत को नई ऊंचाई देने की क्षमता रखता है.

यात्रा से व्यापार तक समय की बचत, लागत में कमी

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गंगा एक्सप्रेसवे के संचालन में आने के साथ मेरठ से प्रयागराज की यात्रा अब महज 6-7 घंटे में पूरी हो सकेगी, जबकि पहले यही दूरी तय करने में 10-12 घंटे लगते थे. यह समय की बचत सीधे तौर पर लॉजिस्टिक्स लागत में कमी का आधार बनेगी. तेज और निर्बाध आवागमन से सप्लाई चेन अधिक प्रभावी होगी, जिससे कृषि उत्पादों को खेत से बाजार तक पहुंचने में कम समय लगेगा और उनकी गुणवत्ता व मूल्य दोनों सुरक्षित रहेंगे. साथ ही, ई-कॉमर्स, वेयरहाउसिंग और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को नई गति मिलेगी. दरअसल, समय की यह बचत ही आर्थिक दक्षता में बदलती है और यही दक्षता किसी भी राज्य की विकास गति को कई गुना बढ़ा देती है.

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