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'कांशीराम के नाम पर राजनीति का ढोंग...', मायावती का कांग्रेस पर तीखा हमला, बोलीं- इनके हथकंडों से सावधान रहें

बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि जिसने डॉ अंबेडकर का सम्मान नहीं किया, वह आज कांशीराम के नाम पर राजनीति कर रही है.

'कांशीराम के नाम पर राजनीति का ढोंग...', मायावती का कांग्रेस पर तीखा हमला, बोलीं- इनके हथकंडों से सावधान रहें
Rahul Gandhi/ Mayawati (File Photo)
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बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उसे दलितों के अपमान का प्रतीक बताया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए अपने बयान में मायावती ने कहा कि जिस पार्टी ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडक (B. R. Ambedkar) का सम्मान नहीं किया, वह आज मान्यवर कांशीराम के नाम पर राजनीति करने का दिखावा कर रही है. उन्होंने अपने समर्थकों को आगाह करते हुए कहा कि कांग्रेस के ऐसे राजनीतिक हथकंडों से सावधान रहना जरूरी है.

अंबेडकर के सम्मान को लेकर उठाए सवाल

मायावती ने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि कांग्रेस ने लंबे समय तक देश की सत्ता संभाली, लेकिन उस दौरान बाबा साहेब अंबेडकर को वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे. उन्होंने याद दिलाया कि देश के संविधान के निर्माण में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाले बाबा साहेब को कांग्रेस सरकारों ने दशकों तक नजरअंदाज किया. मायावती ने सवाल उठाया कि जो पार्टी बाबा साहेब का सम्मान नहीं कर सकी, वह आज कांशीराम जी के नाम पर सम्मान और आदर की बातें कैसे कर सकती है.

बसपा गठन के पीछे का कारण बताया

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बसपा प्रमुख ने अपने बयान में यह भी कहा कि अगर कांग्रेस ने दलितों और वंचित वर्गों के हितों को गंभीरता से लिया होता, तो शायद मान्यवर कांशीराम को अलग से पार्टी बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ती. उनके अनुसार, दलित समाज की उपेक्षा और अनदेखी ही वह कारण बनी, जिसकी वजह से कांशीराम जी ने बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की और सामाजिक न्याय की लड़ाई को नई दिशा दी.

कांग्रेस और सपा दोनों पर साधा निशाना

मायावती ने इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ-साथ समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा. उन्होंने उस समय को याद किया जब कांशीराम जी का निधन हुआ था. मायावती के अनुसार, उस वक्त केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन उन्होंने एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया. वहीं उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार होने के बावजूद राजकीय शोक की घोषणा तक नहीं की गई. मायावती ने कहा कि यह दोनों पार्टियों की दलित महापुरुषों के प्रति संकीर्ण सोच को दर्शाता है.

छोटे दलित संगठनों को भी दी चेतावनी

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बसपा सुप्रीमो ने कुछ छोटे दलित संगठनों और राजनीतिक दलों पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि कुछ संगठन और नेता कांशीराम जी के नाम का इस्तेमाल केवल अपनी राजनीति चमकाने के लिए कर रहे हैं. उनके मुताबिक ये संगठन दूसरी पार्टियों के हाथों में खेलते हुए बसपा को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. मायावती ने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे ऐसे प्रयासों से सतर्क रहें और पार्टी की मूल विचारधारा को मजबूत बनाए रखें.

15 मार्च को कार्यक्रम भव्य बनाने की अपील

अपने संदेश के अंत में मायावती ने भावुक अपील करते हुए कहा कि 15 मार्च को मान्यवर कांशीराम जी की जयंती है. इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को भव्य और सफल बनाया जाए. उन्होंने कहा कि बसपा ही वह पार्टी है जो कांशीराम जी के सिद्धांतों और विचारों पर मजबूती से खड़ी है और दलितों, पिछड़ों तथा अल्पसंख्यकों के अधिकारों की लड़ाई लगातार लड़ रही है.

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बताते चलें कि उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं, ऐसे में उसके पहले मायावती का समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के विरोध में दिख रहा यह आक्रामक रूख इस बात को बता रहा है कि बीजेपी के विजय रथ को रोकने के लिए अखिलेश यादव और राहुल गांधी की जोड़ी को बीजेपी के साथ-साथ बसपा का भी कड़ा सामना करना पड़ेगा.

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