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जांच, कार्रवाई और तुरंत न्याय… योगी सरकार के महिला सुरक्षा मॉडल ने दिलाया भरोसा, 9 साल में कितनी बदली तस्वीर

योगी सरकार के 9 वर्षों में महिला सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी है. जिससे उनके खिलाफ अपराध में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.

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23 Mar 2026
( Updated: 23 Mar 2026
11:45 AM )
जांच, कार्रवाई और तुरंत न्याय… योगी सरकार के महिला सुरक्षा मॉडल ने दिलाया भरोसा, 9 साल में कितनी बदली तस्वीर
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उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के नौ साल में महिला सुरक्षा को लेकर बहुआयामी और एकीकृत मॉडल विकसित किया गया है.  जिसने कानून-व्यवस्था की तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है.  मिशन शक्ति, एंटी रोमियो स्क्वॉड, आधुनिक तकनीक, सख्त कार्रवाई और मजबूत पुलिस ढांचे के समन्वय से प्रदेश आज महिलाओं और बेटियों के लिए अधिक सुरक्षित वातावरण प्रदान कर रहा है. यही कारण है कि महिला संबंधी मामलों के निस्तारण में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है. 

प्रदेश में महिला सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जहां एक ओर मिशन शक्ति के तहत हर थाने में विशेष केंद्र स्थापित किए गए और उनके संचालन के लिए लगभग 40 हजार पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया, वहीं दूसरी ओर एंटी रोमियो स्क्वॉड जैसे अभियानों ने जमीनी स्तर पर बड़ा प्रभाव डाला. अब तक 5 करोड़ से ज्यादा व्यक्तियों की जांच, 1.85 करोड़ को चेतावनी और 38,835 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति को सख्ती से लागू किया गया है. 

आईटीएसएसओ पोर्टल से यौन अपराधों पर एक्शन 

1090 वूमेन पावर लाइन, महिला हेल्पलाइन 181, जीआरपी और फायर सर्विस जैसी सेवाओं के एकीकरण से महिलाओं के लिए त्वरित सहायता प्रणाली विकसित की गई है. आईटीएसएसओ पोर्टल के जरिए यौन अपराधों की जांच को तकनीक से जोड़ा गया, जिससे पारदर्शिता और तेजी दोनों सुनिश्चित हुई. 

मिशन शक्ति केन्द्र की स्थापना के बाद सितंबर 2025 से दिसंबर 2025 तक अपराध में और गिरावट देखने को मिली. बलात्कार की घटनाओं में 33.92% की कमी और दहेज हत्या में 12.96% की कमी दर्ज की गई है. 

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दोषियों को सजा दिलाने में सबसे तेज

सबसे अहम बात यह है कि केवल अपराध में कमी ही नहीं, बल्कि मामलों के त्वरित निस्तारण में भी प्रदेश ने रिकॉर्ड बनाया है. महिला संबंधी मामलों में 98.90 प्रतिशत निस्तारण दर के साथ उत्तर प्रदेश देश में शीर्ष स्थान पर है. प्रभावी पैरवी के चलते महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ अपराध के 32,575 मामलों, 14,111 पॉक्सो मामलों और 4,564 बलात्कार के मामलों में दोषियों को सजा दिलाई गई है. 

3 महिला PAC बटालियन सक्रिय और 5 नई बटालियन प्रस्तावित

महिला सुरक्षा को संस्थागत रूप देने के लिए पुलिस ढांचे का भी तेजी से विस्तार किया गया है. प्रदेश में 19,839 महिला पुलिसकर्मियों की नियुक्ति, 9,172 महिला बीटों का आवंटन, 3 महिला पीएसी बटालियन सक्रिय और 5 नई बटालियन प्रस्तावित हैं। साथ ही 134 नए थाने, 86 नई पुलिस चौकियां और 78 महिला पुलिस चौकी परामर्श केंद्र स्थापित कर जमीनी स्तर पर सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया गया है. 

योगी सरकार के इस समग्र मॉडल में सख्ती और संवेदनशीलता दोनों का संतुलन देखने को मिलता है, जहां एक ओर अपराधियों पर कठोर कार्रवाई होती है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं को तुरंत सहायता, न्याय और भरोसा मिलता है. 

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महिला सुरक्षा के क्षेत्र में मजबूत और प्रभावी मॉडल

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इसी समेकित रणनीति के चलते आज उत्तर प्रदेश महिला सुरक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत और प्रभावी मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है, जहां कानून का डर और व्यवस्था पर भरोसा दोनों साथ-साथ दिखाई देते हैं. महिला सुरक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का यह मॉडल केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि व्यवस्था में आए भरोसे और बदलाव का प्रमाण है, जहां सुरक्षा अब सिस्टम का हिस्सा बन चुकी है. 

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