×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं का नया दौर... CM योगी ने 1228 नर्सिंग अधिकारियों को बांटे नियुक्ति पत्र; 976 CHC पर शुरू हुई ये व्यवस्था

योगी सरकार डिजिटल तकनीक के जरिए हर व्यक्ति तक बेहतर इलाज पहुंचाने पर जोर दे रही है. यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज से 9.25 करोड़ लोग जुड़े हैं, जबकि 14 करोड़ से ज्यादा आभा आईडी जारी हो चुकी हैं, जिससे इलाज की प्रक्रिया आसान और व्यवस्थित हो गई है.

यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं का नया दौर... CM योगी ने 1228 नर्सिंग अधिकारियों को बांटे नियुक्ति पत्र; 976 CHC पर शुरू हुई ये व्यवस्था
Source: X/ @myogiAdityanath
Advertisement

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. सूबे की योगी सरकार अब सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि डिजिटल तकनीक के जरिए हर व्यक्ति तक बेहतर और आसान स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है. इसी दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई अहम उपलब्धियों और योजनाओं का जिक्र करते हुए प्रदेश के हेल्थ सेक्टर की नई तस्वीर पेश की.

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में तेजी से काम हुआ है. यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के तहत करीब 9.25 करोड़ लोग जोड़े जा चुके हैं. यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए कितनी गंभीर है. इसके साथ ही डिजिटल हेल्थ आईडी यानी आभा आईडी के रूप में 14 करोड़ 28 लाख से ज्यादा कार्ड जारी किए जा चुके हैं. इससे मरीजों को एकीकृत स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं और इलाज की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गई है.

ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंची टेलीमेडिसिन सुविधा

Advertisement

ग्रामीण इलाकों के लिए भी सरकार ने खास रणनीति अपनाई है. प्रदेश के 976 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टेलीमेडिसिन और टेली-कंसल्टेशन की सुविधा शुरू की गई है. इसका सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिल रहा है जो दूर-दराज के क्षेत्रों में रहते हैं और विशेषज्ञ डॉक्टर तक पहुंच नहीं बना पाते. अब वे अपने नजदीकी केंद्र पर ही बड़े डॉक्टरों से सलाह ले सकते हैं. इसके अलावा रियल टाइम डिजीज ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया गया है, जिससे बीमारियों की निगरानी और रोकथाम में काफी मदद मिल रही है.

नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति और मेडिकल शिक्षा में सुधार

लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 1228 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र दिए गए. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने एक नई दिशा पकड़ी है. पहले जहां स्वास्थ्य सेवाओं में अव्यवस्था और बाहरी हस्तक्षेप की शिकायतें आती थीं, वहीं अब “वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज” की योजना के जरिए हर जिले में मेडिकल और नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं. इसका मकसद साफ है कि हर जिले में डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके.

एक समान पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली की पहल

Advertisement

मेडिकल शिक्षा को एकरूपता देने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय के माध्यम से सभी मेडिकल कॉलेजों को एक मंच पर लाया जा रहा है. सहारनपुर, आजमगढ़, चंदौली और बिजनौर जैसे जिलों के मेडिकल कॉलेज अब एक समान पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली के तहत संचालित हो रहे हैं. इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है.

मेडिकल कॉलेजों का विस्तार और पीपीपी मॉडल

प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है. 22 नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण के साथ स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया जा रहा है. गोरखपुर और रायबरेली में एम्स बेहतर तरीके से संचालित हो रहे हैं. वहीं पीपीपी मॉडल के तहत भी कई मेडिकल कॉलेज सफलतापूर्वक चल रहे हैं. महाराजगंज, संभल और शामली जैसे जिलों में यह मॉडल पब्लिक ट्रस्ट पार्टनरशिप के रूप में विकसित हो रहा है, जहां आम जनता भी स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश के लिए आगे आ रही है.

Advertisement

मेडिकल सीटों में बड़ा इजाफा

सीएम योगी ने बताया कि चिकित्सा शिक्षा में सीटों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ है. नर्सिंग में 7000 और पैरामेडिकल में 2000 सीटें बढ़ाई गई हैं. एमबीबीएस की सीटें जो पहले 5390 थीं, अब बढ़कर 12700 हो गई हैं. वहीं पीजी सीटों की संख्या 1221 से बढ़कर 5056 तक पहुंच गई है. यह बढ़ोतरी आने वाले समय में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी को काफी हद तक दूर कर सकती है.

नर्सिंग शिक्षा और उन्नत चिकित्सा सुविधाएं

प्रदेश के 18 मेडिकल कॉलेजों में बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई शुरू हो चुकी है और नए कॉलेजों के साथ इस व्यवस्था को और विस्तार दिया जा रहा है. उन्नत चिकित्सा सुविधाओं की बात करें तो संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान ने कई नई उपलब्धियां हासिल की हैं. यहां डायबिटीज और किडनी मरीजों के लिए एडवांस्ड सेंटर बनाया गया है, जहां दोनों बीमारियों का इलाज एक ही छत के नीचे संभव है. इसके अलावा 500 बेड का पीडियाट्रिक सेंटर और रीनल ट्रांसप्लांट जैसी सुविधाएं भी शुरू की गई हैं.

Advertisement

आधुनिक इलाज और टेली आईसीयू की सुविधा

डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में भी किडनी, लीवर और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी आधुनिक सुविधाएं शुरू हो चुकी हैं. टेली आईसीयू सुविधा के जरिए छह मेडिकल कॉलेजों को जोड़ा गया है, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल सके. वहीं किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय ने 2025 की एनआईआरएफ रैंकिंग में देशभर में आठवां स्थान हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है.

आपातकालीन सेवाएं और कैंसर इलाज में सुधार

आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने के लिए विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में लेवल-2 ट्रॉमा सेंटर बनाए जा रहे हैं. साथ ही बाबू कल्याण सिंह सुपर स्पेशलिटी कैंसर संस्थान में एडवांस्ड मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड रिसर्च सेंटर की स्थापना की गई है, जो कैंसर मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है.

Advertisement

यह भी पढ़ें

बता दें कि उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का यह बदलता स्वरूप सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों के जीवन में वास्तविक सुधार लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. अब चुनौती यही है कि इन योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद तक समय पर पहुंचे और स्वास्थ्य सेवाओं का यह नया मॉडल पूरे देश के लिए उदाहरण बन सके.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें