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हरीश राणा के परिवार को मिलेगी 10 लाख की मदद, CM योगी ने किया ऐलान, परिवार से मिले अधिकारी

24 मार्च को हरीश राणा ने दिल्ली AIIMS में अंतिम सांस ली थी. हरीश राणा केस ने सुप्रीम कोर्ट के जजों को भी इमोशनल कर दिया था. 11 मार्च को कोर्ट ने उन्हें इच्छामृत्यु की इजाजत दी थी.

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26 Mar 2026
( Updated: 26 Mar 2026
01:13 PM )
हरीश राणा के परिवार को मिलेगी 10 लाख की मदद, CM योगी ने किया ऐलान, परिवार से मिले अधिकारी
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Harish Rana: 13 साल तक कोमा में रहने वाले हरीश राणा ने दुनिया को अलविदा कह दिया. सुप्रीम कोर्ट से मिली इच्छामृत्यु की इजाजत के बाद दिल्ली AIIMS में उन्होंने अंतिम सांस ली. इन 13 साल में परिवार ने अपने बेटे को ठीक करने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन हरीश के शरीर में सांस के सिवा कुछ नहीं था. एक शरीर जो जिंदा लाश के समान था. अब हरीश के निधन के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिवार के लिए अहम घोषणा की है. 

CM योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासनिक अधिकारी हरीश राणा के घर गाजियाबाद पहुंचे. जहां उन्होंने परिवार से मुलाकात की और आर्थिक सहायता की पेशकश की. अधिकारियों ने अशोक राणा से 10 लाख की आर्थिक मदद देने की बात कही. 

परिवार ने CM योगी का जताया आभार 

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परिवार के मुताबिक, CM योगी के निर्देश पर गाजियाबाद के जिलाधिकारी, गाजियाबाद डेवलपमेंट ऑथोरिटी के वीसी और कमिश्नर घर पहुंचे थे, उन्होंने परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिया. जिस पर परिवार ने CM योगी का आभार जताया. 

पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने दिया इच्छामृत्यु का फैसला 

हरीश राणा 13 साल तक कोमा में थे. सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को इच्छामृत्यु की इजाजत दी थी. हरीश राणा साल 2013 से कोमा में थे और लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे. हरीश राणा का केस ऐसा मामला है जिसमें पहली बार किसी को इच्छा से मरने की इजाजत मिली है. 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हरीश राणा को दिल्ली AIIMS शिफ्ट किया गया था. फिर AIIMS प्रशासन ने पहले पानी का पाइप और फिर खाने की ट्यूब हटा दी थी. जिससे हरीश राणा की फीडिंग रुक गई थी. यानी AIIMS ने हरीण राणा को जिंदा रखने के लिए दिया जा रहा बाहरी सपोर्ट और इलाज हटा दिया था. 

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फैसला सुनाते वक्त भावुक हो गए थे सुप्रीम कोर्ट के जज

सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को फैसला सुनाते वक्त कहा था, हरीश राणा के माता-पिता ने कई साल तक अपने बेटे की निस्वार्थ देखभाल की. उनका परिवार कभी भी उनका साथ देने से पीछे नहीं हटा. हरीश राणा के पिता और परिवार की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पादरीवाला भावुक हो गए. 

हॉस्टल से गिरे थे हरीश राणा 

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32 साल के हरीश राणा गाजियाबाद के रहने वाले थे. साल 2013 में चंडीगढ़ में वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे. एक दिन उनके साथ बड़ा हादसा हो गया जिसने न केवल उनकी जिंदगी बदल दी बल्कि उनके लिए जिंदगी को बोझ बना दिया. हरीश राणा हॉस्टल की चौथी मंजिल की बालकनी से नीचे गिर गए. सिर में गंभीर चोट लगी और वह कोमा में चले गए. डॉक्टर्स की निगरानी में मिली इच्छामृत्यु के बाद 24 मार्च को निधन हो गया. इसके बाद उनका 25 मार्च को अंतिम संस्कार कर दिया गया. उनके छोटे भाई आशीष ने उनके पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी.

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