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'स्वच्छतम पटना, स्वच्छतम बिहार' की ओर तेज़ी से बढ़े कदम, '3R' फॉर्मूले ने दिखाया कमाल, स्वच्छता में पटना देशभर के 21 शहरों में शामिल, नगर निगम को मिला सम्मान

Reuse, Reduce और Recycle के मॉडल पर काम करते हुए पटना ने स्वच्छता की दिशा में बड़ी छलांग लगाई है. देशभर के 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में पटना को 21वां स्थान मिला है, जबकि गंगा टाउन कैटेगरी में यह चौथे पायदान पर पहुंचा. दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में पटना नगर निगम को सम्मानित किया गया. पिंक टॉयलेट, लू कैफे, निगम नीर, वेस्ट गाड़ियों से बनी एम्बुलेंस जैसी पहलें और नागरिकों की भागीदारी ने इस उपलब्धि को और भी खास बना दिया. पटना अब स्वच्छतम बिहार की ओर आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहा है.

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17 Jul 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:26 AM )
'स्वच्छतम पटना, स्वच्छतम बिहार' की ओर तेज़ी से बढ़े कदम, '3R' फॉर्मूले ने दिखाया कमाल, स्वच्छता में पटना देशभर के 21 शहरों में शामिल, नगर निगम को मिला सम्मान
Image: NMF News
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कभी स्वच्छता की दौड़ में पीछे छूटता नजर आने वाला पटना आज देशभर के हजारों शहरों के बीच अपनी स्वच्छ छवि और प्रतिबद्धता के साथ एक नई पहचान बना चुका है. स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए पटना नगर निगम को दिल्ली के विज्ञान भवन में सम्मानित किया गया. 10 लाख से अधिक आबादी वाले 44 शहरों की श्रेणी में पटना को 21वां स्थान प्राप्त हुआ है. इसके साथ ही गंगा किनारे बसे शहरों की रैंकिंग में पटना को चौथा स्थान और जीएफसी 3 स्टार का गौरव भी प्राप्त हुआ है.

स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 की थीम “3R” – यानि Reuse, Reduce और Recycle पर आधारित थी, जिस पर पटना नगर निगम ने प्रभावी ढंग से कार्य किया. नगर आयुक्त अनिमेष कुमार पराशर ने इसे निगम कर्मियों की मेहनत और प्रतिबद्धता का परिणाम बताया. उन्होंने बताया कि निगम ने बेकार पड़ी गाड़ियों का पुनः उपयोग कर पिंक टॉयलेट, लू कैफे, निगम नीर, मेवहॉल एम्बुलेंस जैसी सुविधाएं विकसित की हैं, जो जनता के लिए उपयोगी साबित हो रही हैं.

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जनजागरूकता से बदली‌ पटना की छवि

सर्वेक्षण के अंतर्गत सिटीजन फीडबैक श्रेणी में भी पटना ने चौथा स्थान प्राप्त किया है, जो यह दर्शाता है कि यह उपलब्धि सिर्फ सरकारी प्रयासों का परिणाम नहीं, बल्कि इसमें आमजन की जागरूकता और भागीदारी भी बराबर की भागीदार रही है. नागरिकों से फीडबैक जुटाने के लिए विशेष अभियान चलाए गए, जिसमें मोबाइल ऐप, सोशल मीडिया, नुक्कड़ नाटक, जागरूकता रैलियां, स्कूल और कॉलेजों में प्रतियोगिताएं जैसी गतिविधियों के ज़रिए लोगों को जोड़ा गया. निगम की टीम ने घर-घर जाकर फीडबैक फॉर्म भरवाए जिससे न केवल भागीदारी बढ़ी, बल्कि लोगों में स्वच्छता को लेकर जागरूकता और समझ भी गहरी हुई.

स्वच्छता के लिए किए गए कई टिकाऊ प्रयास

पटना नगर निगम द्वारा शहर के 650 सार्वजनिक स्थलों की सफाई कर उन्हें स्वच्छ स्थल के रूप में विकसित किया गया. इन स्थलों पर सफाई कर्मियों के साथ पिकनिक का आयोजन कर उनका मनोबल भी बढ़ाया गया. इसके साथ ही निगम ने डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन, सूखे और गीले कचरे का पृथक्करण, कंपोस्टिंग यूनिट्स की स्थापना और वॉशरूम मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत करने जैसे टिकाऊ प्रयास किए हैं.

'सड़क शत्रु' पहल का दिखा असर

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शहर में 'नो लिटरिंग जोन', 'स्वच्छता एप्लिकेशन', 'स्वच्छ गार्डन' जैसी योजनाओं को भी लागू किया गया है. सड़क पर कचरा फेंकने वालों को 'सड़क शत्रु' के रूप में चिह्नित कर न केवल उन्हें जागरूक किया गया, बल्कि सार्वजनिक रूप से स्वच्छता की शपथ भी दिलाई गई. इन सख्त लेकिन सकारात्मक पहलों ने स्वच्छता को एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित किया है.

इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड सेंटर का कमाल

आधुनिक तकनीक के प्रयोग में भी पटना नगर निगम ने उल्लेखनीय पहल की है. सफाई और जल निकासी कार्यों की निगरानी को स्मार्ट और त्वरित बनाने के लिए सभी 75 वार्डों में हाईटेक वॉकी-टॉकी उपकरणों का उपयोग शुरू किया गया है, जिससे पटना देश के उन गिने-चुने नगर निकायों में शामिल हो गया है जो स्मार्ट संचार प्रणाली अपनाकर कार्य करते हैं. बरसात के मौसम में जल निकासी की बेहतर निगरानी हेतु सभी संप हाउस को स्मार्ट इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड सेंटर से जोड़ दिया गया है, जिससे रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हुई है.

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दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित इस सम्मान समारोह में नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव श्री अभय कुमार सिंह, माननीय महापौर श्रीमती सीता साहू, उप महापौर श्रीमती रेशमी कुमारी, सशक्त स्थाई समिति के सदस्यगण, नगर आयुक्त श्री अनिमेष कुमार पराशर, अपर नगर आयुक्त श्री आशिष कुमार, उप नगर आयुक्त श्री रामाशीष तिवारी, स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर डॉ. नीतू कुमारी नवगीत, सफाई कर्मचारी सुलेखा और मानती, एवं पटना नगर निगम की टीम उपस्थित रही. यह सम्मान न केवल नगर निगम के प्रयासों का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जब प्रशासन और नागरिक एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं रह जाता.

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