'आधी रात को आदेश जारी करना पड़ा...', मालदा कांड पर CJI सूर्यकांत सख्त, ममता सरकार को लगाई कड़ी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने मालदा में न्यायिक अधिकारियों को घेरने की घटना पर ममता सरकार को फटकार लगाई है. कोर्ट ने इसे न्यायपालिका को डराने की कोशिश बताते हुए अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल तैनात करने का आदेश दिया है.
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Bengal SIR Updates: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 के बीच मतदाता सूची को लेकर चल रहा विवाद अब देश की सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गया है. मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों को घेरकर बंधक बनाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए राज्य की ममता सरकार को जमकर फटकार लगाई है और साफ कहा है कि यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश भी है.
मालदा में क्या हुआ था?
दरअसल, मालदा जिले के कालियाचक इलाके में SIR प्रक्रिया के तहत काम कर रहे सात न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने कई घंटों तक घेर लिया था. ये अधिकारी मतदाता सूची में नामों की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन का काम कर रहे थे. अचानक सैकड़ों की संख्या में लोग बीडीओ कार्यालय के बाहर जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. उनका आरोप था कि बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं. स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि अधिकारी कार्यालय के भीतर ही फंसे रह गए. बताया गया कि इन अधिकारियों में चार महिलाएं भी शामिल थीं. यह विरोध देर रात तक चलता रहा और प्रशासन को हालात संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी.
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों जताई नाराजगी?
इस घटना पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसकी अगुवाई चीफ जस्टिस सूर्य कांत कर रहे थे, उन्होंने तीखी टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि यह घटना न्यायिक अधिकारियों को डराने का सीधा प्रयास है और इससे न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंची है. अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह एक योजनाबद्ध और प्रेरित कदम था. चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें आधी रात में आदेश जारी करना पड़ा, जो अपने आप में इस घटना की गंभीरता को दिखाता है. उन्होंने साफ कहा कि न्यायिक अधिकारियों का मनोबल तोड़ने और जांच प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
केंद्र बल तैनात करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती की जाए. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं.
राज्य सरकार पर उठे सवाल
कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए. चीफ जस्टिस ने कहा कि यह राज्य सरकार द्वारा अपने कर्तव्यों की अनदेखी का मामला लगता है. उन्होंने पूछा कि अधिकारियों को पहले से सूचना होने के बावजूद उनकी सुरक्षित निकासी क्यों सुनिश्चित नहीं की गई. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी. अदालत ने इसे आपराधिक अवमानना के दायरे में आने वाला मामला बताया है. इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव के दौरान प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
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बहरहाल, अब देखना होगा कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं. लेकिन इतना तय है कि सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख ने साफ संदेश दे दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया से किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
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