बंगाल में चुनाव से पहले SIR पर बवाल... 7 अधिकारियों का 8 घंटे तक घेराव, जानें पूरा मामला
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची को लेकर विवाद बढ़ गया है. मालदा के कालियाचक में ग्रामीणों ने नाम हटाए जाने के विरोध में सात न्यायिक अधिकारियों को करीब आठ घंटे तक बीडीओ कार्यालय में घेर लिया.
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Bengal SIR Updates: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है. इस बीच मतदाता सूची को लेकर उठा विवाद अब सड़क से लेकर प्रशासनिक दफ्तरों तक पहुंच गया है. मालदा जिले के कालियाचक इलाके में बुधवार को जो हुआ, उसने पूरे राज्य का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. यहां सात न्यायिक अधिकारियों को करीब आठ घंटे तक एक बीडीओ कार्यालय के भीतर घेरकर रखा गया, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया.
क्यों घिरे अधिकारी?
जानकारी के मुताबिक, ये सभी अधिकारी मतदाता सूची में नामों की जांच से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए पहुंचे थे. शाम करीब 4 बजे जब वे कार्यालय से बाहर निकलने लगे, तभी बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने गेट के बाहर धरना शुरू कर दिया. लोगों का आरोप था कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में उनके नाम हटा दिए गए हैं. गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने साफ कह दिया कि जब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं होगा, तब तक अधिकारी बाहर नहीं जा सकेंगे.
NH-12 पर प्रदर्शन का असर
स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण होती गई. प्रदर्शन इतना बढ़ गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग NH-12 को भी कई जगहों पर जाम कर दिया गया. लोगों ने सड़कों पर बांस, टूटे कांच और फर्नीचर रखकर रास्ता बंद कर दिया. इतना ही नहीं, टायर जलाकर विरोध जताया गया और कुछ जगहों पर लोग सड़क पर ही खाना बनाते नजर आए. यह दृश्य किसी बड़े जनआंदोलन से कम नहीं लग रहा था.
विरोध कैसे फैला पूरे इलाके में?
प्रशासन के अनुसार, विरोध की शुरुआत सुबह सुजापुर इलाके से हुई थी, जो देखते ही देखते जलालपुर, मोथाबाड़ी, जोदुपुर और कालियाचक तक फैल गई. स्थानीय लोगों का दावा है कि इलाके में एक लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं. कई लोगों का कहना है कि उन्होंने जरूरी दस्तावेज भी जमा किए थे, इसके बावजूद उनके नाम काट दिए गए. इस पूरे मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है. स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि अपील के लिए जो ट्रिब्यूनल बनाए जाने थे, वे अभी तक शुरू नहीं हुए हैं. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही राज्य में 19 ट्रिब्यूनल स्थापित करने का निर्देश दिया था. ऐसे में लोगों को न्याय पाने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिख रहा है, जिससे नाराजगी और बढ़ रही है.
पुलिस ने कैसे संभाली स्थिति?
करीब आठ घंटे तक चले इस तनावपूर्ण घटनाक्रम के बाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया और अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला. हालांकि इस दौरान भीड़ ने पुलिस वाहन पर पथराव भी किया. राहत की बात यह रही कि इस पूरी घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है. घटना के बाद राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. वहीं पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर मालदा पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश की.
राजनीतिक बयानबाजी तेज
इस मुद्दे पर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधीन है और जिम्मेदारी भी उसी की है. वहीं भाजपा ने राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था बिगड़ने का आरोप लगाया है.
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बहरहाल, यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर उठा यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा मुद्दा बन सकता है. राज्य में दो चरण में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है वहीं 4 मई की मतगणना होगी. जिसके बाद यह स्थिति साफ़ होगी कि राज्य में चुनावी हलचल की बीच एक-दूसरे पर बयानबाज़ी कर रहे तमाम सियासी दलों के रणनीति में किसको सफलता मिलती है.
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