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जब महात्मा गांधी ने एक साथ 60 कुत्तों को मारने का आदेश दिया था... कम पाप और ज्यादा पाप वाली दलील देकर सुनाया था फैसला, जानिए पूरी कहानी?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली-एनसीआर के आवारा कुत्तों को सड़कों, गलियों और पब्लिक प्लेस से उठाकर आश्रय स्थल में छोड़े जाने के फैसले का जमकर विरोध हो रहा है. इस मामले के बीच में अहिंसा के पुजारी और देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का एक फैसला भी चर्चाओं में है, जब उन्होंने एक साथ 60 कुत्तों को मारने का आदेश दिया था.

जब महात्मा गांधी ने एक साथ 60 कुत्तों को मारने का आदेश दिया था... कम पाप और ज्यादा पाप वाली दलील देकर सुनाया था फैसला, जानिए पूरी कहानी?
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सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली- एनसीआर में आवारा कुत्तों को आश्रय स्थल में रखने का निर्देश दिया है. अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि जो भी लावारिस कुत्ते खुलेआम गलियों, मोहल्लों और सड़कों पर घूम रहे हैं, उनकी वजह से जनता को बड़ा खतरा है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि यह फैसला समाज हित में है, लेकिन कोर्ट के आदेश का देशभर में विरोध हो रहा है. देश के अलग-अलग वर्गों के लोगों ने अपनी राय दी है. इनमें नेताओं से लेकर बॉलीवुड सेलिब्रिटी और अलग-अलग इंडस्ट्रीज के लोगों की राय भी शामिल है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल खड़ा किया है. वहीं जो भी डॉग लवर्स हैं. उनका कहना है कि समाज से कुत्तों को अलग नहीं किया जा सकता? अब इस बहस के बीच इस बहस के बीच दुनिया में अहिंसा के सिद्धांत को बढ़ावा देने वाले महात्मा गांधी की वह राय भी सामने आ रही है, जिसमें उन्होंने एक साथ 60 ऐसे कुत्तों को मारने की अनुमति दी थी, जो पागल हो गए थे. उस दौरान गांधी की फैसले पर खूब सवाल उठाए गए थे, लेकिन उन्होंने यह फैसले को क्यों लिया था? इसको लेकर विस्तार से अपनी बात रखी थी. क्योंकि वह अहिंसा के विरोधी थे, चाहे वह इंसान पर हो या फिर जानवरों पर. 

जब महात्मा गांधी ने 60 कुत्तों को मारने का आदेश दिया था

दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को आश्रय स्थल में छोड़े जाने के बहस के बीच दुनिया में अहिंसा के सिद्धांत को बढ़ावा देने वाले महात्मा गांधी के उस फैसले पर भी चर्चा हो रही है, जब उन्होंने एक साथ 60 ऐसे कुत्तों को मारने की अनुमति दी थी, जो पागल हो गए थे. दरअसल, यह वाकया साल 1926 का है. जब टेक्सटाइल कारोबारी अंबालाल साराभाई की मिल में 60 कुत्ते पागल हो गए थे. उन पागल कुत्तों से लोगों को बड़ा खतरा था. उसके बाद साराभाई ने इन्हें मारने का आदेश दिया था, लेकिन समाज के लोगों ने इसका विरोध जताया था. ऐसे में बढ़ते विवाद को देखते हुए साराभाई ने महात्मा गांधी की राय लेना उचित समझा, जिसके बाद वह महात्मा गांधी से मिलने साबरमती आश्रम गए. वहां पर उन्होंने कुत्तों को मारने की पूरी कहानी बताई. फिर उनकी बात को समझते हुए महात्मा गांधी ने कहा कि आखिर और क्या किया जा सकता है? 

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महात्मा गांधी पर भी उठे थे सवाल

60 पागल कुत्तों के मारने को लेकर महात्मा गांधी ने अपनी रजामंदी जताई थी. इसके बाद उन पर भी सवाल उठे थे कि अहिंसा के पुजारी गांधी ने मसले पर क्यों अपनी सहमति जताई? उसके बाद यंग इंडिया अखबार के जरिए गांधी जी ने इस पर विस्तृत रूप से अपनी बात रखी थी.

महात्मा गांधी की ज्यादा पाप की दलील

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यंग इंडिया अखबार में महात्मा गांधी ने विस्तृत रूप से 60 पागल कुत्तों के मारने के फैसले पर सहमति जताने के हो रहे विरोध में लिखा था कि 'इस बात में कोई 2 राय नहीं हो सकती कि हिंदू दर्शन किसी भी जीव की हत्या को पाप मानता है. मैं समझता हूं कि सभी पंथ इस सिद्धांत पर सहमत होंगे, लेकिन समस्या तब आती है, जब इसे व्यवहार में लाना होता है. हम कीटनाशकों का इस्तेमाल करके रोगाणुओं को मारते ही हैं. यह एक हिंसा है, लेकिन कर्तव्य भी है. वहीं एक पागल कुत्ते को मारना न्यूनतम हिंसा है. अगर कोई जंगल में एकांत रहता है, तो फिर वह इस तरह की हिंसा नहीं करेगा और न ही इसकी उसे जरूरत पड़ेगी.

कम पाप की दलील 

महात्मा गांधी ने इस कुत्तों के मारे जाने की दलील पर कम पाप को लेकर कहा कि यदि कोई शहर में रहता है, तो फिर उसके लिए अहिंसा का सिद्धांत और ड्यूटी को लेकर विरोधाभास की स्थिति होगी. ऐसे में शहर में रहने वाले उस व्यक्ति को उन लोगों की भी रक्षा करनी है, जो उस पर ही निर्भर है. यदि वह कुत्ते को मारता है, तो पाप होगा और यदि नहीं मारता है, तो उससे भी बड़ा पाप करेगा, इसलिए वह कम पाप को चुनेगा ताकि बड़े पाप से बच सके.'

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आवारा कुत्तों पर महात्मा गांधी ने समाज को दी थी नसीहत

महात्मा गांधी ने आवारा कुत्तों को लेकर समाज को एक नसीहत भी थी. उन्होंने कहा था कि कोई सभ्यता कितनी भी दयावान हो, इससे यह पता चलता है कि उसके बीच पल रहे जानवरों की क्या स्थिति है? अगर कुत्ते आवारा घूम रहे हैं तो इससे यह पता चलता है कि समाज में प्राणी मात्र के प्रति दया का भाव है. कुत्ता एक वफादार साथी होता है. दुनिया में कुत्तों और घोड़े की वफादारी के कई उदाहरण हैं. साला किसका यह मतलब नहीं है कि हमें उन्हें रखना चाहिए और उनके इस तरह सम्मान करना चाहिए जैसे हम अपने अन्य साथियों का करते हैं. उन्हें यूं ही नहीं घूमने देना चाहिए. 

आवारा कुत्तों को सड़कों पर रखने पर क्या बोले थे महात्मा गांधी? 

अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी ने आवारा कुत्तों को सड़कों पर रखने या उन्हें छोड़ने को शर्मनाक बताया था. उनका कहना था कि एक मानवीय व्यक्ति को अपने आय का हिस्सा अलग रखना चाहिए. वह आय किसी ऐसे संगठन को देना चाहिए, जो कुत्तों की देखभाल करता हो. अगर वह ऐसा नहीं कर सकता है, तो उसे कुत्तों के प्रश्न पर चिंता छोड़ देनी चाहिए और अपनी मानवता को अन्य पशुओं के लिए लगा देना चाहिए. 

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर से आवारा कुत्तों को हटाने का दिया आदेश

बता दें कि कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर के अधिकारियों को आदेश देते हुए कहा है कि आवारा कुत्ते जो भी सड़कों पर घूम रहे हैं. उन्हें सड़कों से उठाकर आश्चर्य स्थल में रखा जाए. आवारा कुत्तों के काटने से खासकर बच्चों में रेबीज फैलने का खतरा रहता है. यह एक गंभीर स्थिति है. 

कोर्ट के फैसले का चल रहा विरोध

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर के आवारा कुत्तों के लिए जो फैसला सुनाया है. उसको लेकर देश भर में विरोध-प्रदर्शन चल रहा है. इनमें नेट से लेकर बॉलीवुड सेलिब्रिटी और कई अलग-अलग इंडस्ट्रीज के लोगों ने विरोध जताया है. इसके अलावा पशुओं का पालन- पोषण करने वाली कई एनजीओ भी इसके खिलाफ हैं. वहीं अब विरोध के चलते हुए यह भी खबर सामने आ रही है कि सुप्रीम कोर्ट इस फैसले को वापस लेने या इसे बदलने पर विचार कर सकता है.

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