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विकास बना जाहिद तो लोकेश बना सलीम… हिंदू युवकों का मुस्लिम ‘कोड नेम’, शाकिब ने ऐसे रची थी देश को दहलाने की साजिश

UP ATS ने पाकिस्तानी आतंकियों से कनेक्शन के आरोप में जिन चार लोगों को अरेस्ट किया था, उन पर बहुत बड़ा खुलासा हुआ है. इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड शाकिब था, जो भारत में कई जगह दहशत फैलाने का फुल प्रूफ प्लान बना रहा था.

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05 Apr 2026
( Updated: 05 Apr 2026
11:14 AM )
विकास बना जाहिद तो लोकेश बना सलीम… हिंदू युवकों का मुस्लिम ‘कोड नेम’, शाकिब ने ऐसे रची थी देश को दहलाने की साजिश
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उत्तर प्रदेश ATS के हत्थे चढ़े संदिग्ध आतंकियों पर बड़ा खुलासा हुआ है. ये लोग दुबई में बैठे सरगना के इशारों पर भारत में दहशत फैलाने की साजिश रच रहे थे, इस बार इनका मोहरा हिंदू लड़के बने, जिन्हें मुस्लिम कोड देकर आतंकी मंसूबो को अंजाम देने की पूरी प्लानिंग थी. 

ये सनसनीखेज खुलासा ATS की गिरफ्त में आए आतंकी शाकिब ने किया है. ATS के मुताबिक, शाकिब को दुबई में बैठे सरगना आकिब से निर्देश मिले थे. जिनमें कहा गया था कि इस बार न तो शहादत देनी है और न ही इंटेलीजेंस एजेंसियों के शक के दायरे में आना है. इसलिए शाकिब ने धर्म का जाल बुनते हुए हिंदू लड़कों को मुस्लिम कोड नेम दिया, फिर उन्हें भारी रकम का लालच देकर देश विरोधी गतिविधि के लिए उकसाया. 

लोकेश बना सलीम, विकास बना जाहिद….

ATS ने 3 मार्च को लखनऊ से पाकिस्तानी आतंकी हैंडलर्स और आतंकी गतिविधियों के आरोप में अरेस्ट किया था. इनमें शाकिब (सरगना), विकास गहलावत, लोकेश उर्फ पपला पंडित और अरबाब शामिल हैं. 

शाकिब अरबाब के जरिए हिंदू युवकों का ब्रेनवॉश किया. इसका जरिया बना सोशल मीडिया. जिहाद को भड़काने के लिए अरबाब ने लोकेश का कोड नेम ‘सलीम’ रखा, जबकि विकास का कोड नेम ‘जाहिद ‘रखा. शाकिब ने सबसे पहले लोकेश को आतंकी नेटवर्क से जोड़ा, इसके बाद लोकेश ने विकास को भी इसमें शामिल किया. इसके बाद दोनों मिलकर गूगल लोकेशन से अलग-अलग जगहों की रेकी करने लगे. 

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शाकिब ने हिंदू युवकों का कैसे उठाया फायदा? 

शाकिब भारत में इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड था, जो भारत में कई जगह दहशत फैलाने का फुल प्रूफ प्लान बना रहा था. शाकिब ने विकास और लोकेश के धर्म और नाम का फायदा उठाते हुए उन्हें हिंदू धार्मिक स्थलों और संवेदनशील जगहों पर रेकी के लिए भेजता था, जैसे प्रसिद्ध मंदिर, जहां हिंदू युवकों पर न तो शक होता था न ही कोई पूछताछ. शाकिब के इस नेटवर्क का नाम डेविल था और डेविल का ये गिरोह दीवारों पर पैंफ्लेट चस्पा करने के बहाने रेकी कर रहा था. 

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ये चारों टेलीग्राम के जरिए कनेक्ट थे, जिसमें जिहादी एक्टिविटी को बढ़ाने वाले वीडियोज, वहीं, बातचीत के लिए ऐसे ऐप का इस्तेमाल करते थे जिसमें चैट को ट्रैक करना लगभग नामुमकिन है. ADG लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश के मुताबिक, दुबई में बैठा आकिब लंबे समय से भारत में इस तरह का मॉड्यूल चला रहा था. भारत में शाकिब इस मॉडल को जमीन पर उतार रहा था. पाकिस्तानी हैंडलर्स शाकिब को भारत की संवेदनशील लोकेशन भेजने के लिए मोटी रकम देते थे. ATS फिलहाल इस पूरे मामले की गहनता से पड़ताल कर रही है. टीम को आशंका है कि इस मॉड्यूल से जुड़े और भी खुलासे हो सकते हैं, वहीं, ATS ये भी पता लगा रही है कि इस गिरोह के तार देशभर में और कहां-कहां जुड़े हैं, साथ ही फंडिंग कहां से हो रही है. 

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