×
जिस पर देशकरता है भरोसा

दुनिया को इलेक्शन मैनेजमेंट सिखाएगा भारत का चुनाव आयोग, दिल्ली के सम्मेलन में शामिल होंगे 100 देशों के प्रतिनिधि

भारत निर्वाचन आयोग 21 से 23 जनवरी तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट 2026 का आयोजन करेगा. सम्मेलन से पहले आयोग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ बैठक कर 36 थीमैटिक ग्रुप्स पर चर्चा की

दुनिया को इलेक्शन मैनेजमेंट सिखाएगा भारत का चुनाव आयोग, दिल्ली के सम्मेलन में शामिल होंगे 100 देशों के प्रतिनिधि
Gyanesh Kumar/ ECI
Advertisement

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी चुनावी विशेषज्ञता और लोकतांत्रिक परंपराओं का प्रदर्शन करने जा रहा है. 21 से 23 जनवरी तक राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में पहला इंडिया इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IICDEM-2026) आयोजित किया जाएगा. यह सम्मेलन लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में भारत द्वारा आयोजित अब तक का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन माना जा रहा है. इसका सम्मेलन का उद्देश्य दुनिया भर के चुनाव प्रबंधन संस्थानों के साथ भारत के अनुभव साझा करना और वैश्विक चुनावी चुनौतियों पर सामूहिक समाधान तलाशना है.

सम्मलेन से पहले चुनाव आयोग ने की बैठक 

इस बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से पहले चुनाव आयोग ने गुरुवार को दिल्ली में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की. इस बैठक में सम्मेलन के दौरान संचालित होने वाले 36 थीमैटिक ग्रुप्स पर विस्तार से चर्चा की गई. अधिकारियों के अनुसार, ये थीम चुनाव प्रबंधन से जुड़े हर अहम पहलू को कवर करती हैं, जिनमें मतदाता सूची, चुनावी तकनीक, पारदर्शिता, निष्पक्षता, समावेशन और सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं. चुनाव आयोग का कहना है कि इन 36 थीमैटिक ग्रुप्स का मकसद विभिन्न देशों के चुनाव प्रबंधन निकायों के अनुभवों को एक साझा ज्ञान भंडार के रूप में विकसित करना है. इन समूहों का नेतृत्व राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी करेंगे, जबकि इनमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक विशेषज्ञ भी योगदान देंगे. इससे भारत के संघीय ढांचे और जमीनी अनुभवों को वैश्विक विमर्श से जोड़ने की कोशिश की जा रही है.

IIIDEM ने आयोजित किया सम्मेलन 

Advertisement

तीन दिवसीय यह सम्मेलन भारत इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट द्वारा निर्वाचन आयोग के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है. सम्मेलन की थीम रखी गई है, समावेशी, शांतिपूर्ण, लचीली और सतत दुनिया के लिए लोकतंत्र. यह थीम मौजूदा वैश्विक राजनीतिक हालात को देखते हुए काफी अहम मानी जा रही है, जहां कई देशों में लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं.

100 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब भारत 2026 के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल IDEA की काउंसिल ऑफ मेंबर स्टेट्स की अध्यक्षता ग्रहण करने जा रहा है. इससे भारत की भूमिका वैश्विक लोकतांत्रिक विमर्श में और मजबूत होने की उम्मीद है. सम्मेलन में दुनिया भर के चुनाव प्रबंधन निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले करीब 100 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे. इसके अलावा वैश्विक संगठनों, भारत में स्थित विदेशी मिशनों और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े शिक्षाविदों तथा व्यावहारिक विशेषज्ञों की भी मौजूदगी रहेगी. सम्मेलन के कार्यक्रम में उद्घाटन सत्र, ईएमबी लीडर्स प्लेनरी, ईएमबी वर्किंग ग्रुप मीटिंग्स और ईसीआईनेट के शुभारंभ जैसे महत्वपूर्ण सत्र शामिल होंगे. ईसीआईनेट को निर्वाचन सहयोग के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है. इसके साथ ही थीमैटिक सत्रों में वैश्विक चुनावी मानकों, चुनावी प्रक्रियाओं में नवाचार और सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं पर गहन चर्चा की जाएगी.

40 से अधिक होंगी द्विपक्षीय बैठकें

Advertisement

सम्मेलन के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधु तथा डॉ. विवेक जोशी लगभग 40 से अधिक द्विपक्षीय बैठकें करेंगे. इन बैठकों में विभिन्न देशों के ईएमबी प्रमुखों के साथ आपसी सहयोग और अनुभव साझा करने पर फोकस रहेगा. इसके अतिरिक्त चार आईआईटी, छह आईआईएम, 12 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय और भारतीय जन संचार संस्थान जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान भी इस आयोजन का हिस्सा बनेंगे. प्रतिभागियों को भारत की चुनावी प्रणाली, प्रक्रियाओं और तकनीकी नवाचारों से रूबरू कराया जाएगा, जिन्हें विश्व स्तर पर एक मॉडल माना जाता है.

विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर उठा रहा सवाल 

यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब देश के भीतर चुनाव आयोग को लेकर विवाद भी गहराते नजर आ रहे हैं. विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य, चुनाव आयोग पर आरोप लगा रहे हैं कि वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के जरिए लाखों वैध मतदाताओं के नाम हटाकर लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है. उत्तर प्रदेश में 2.89 करोड़ नाम हटाए जाने, पश्चिम बंगाल में अमर्त्य सेन और मोहम्मद शमी जैसी हस्तियों को नोटिस मिलने और असम व तमिलनाडु से आई शिकायतों ने इस बहस को और तेज कर दिया है.

Advertisement

बताते चलें कि वहीं चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ भाजपा इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे मतदाता सूची की शुद्धता के लिए जरूरी प्रक्रिया बता रहे हैं. ऐसे माहौल में यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भारत के लिए न सिर्फ अपनी चुनावी पारदर्शिता को दुनिया के सामने रखने का मौका है, बल्कि लोकतंत्र पर उठ रहे सवालों के बीच अपनी संस्थागत मजबूती दिखाने की भी एक अहम परीक्षा मानी जा रही है.

टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें