कहां है नान्याजी महाराज मंदिर, बालाजी भगवान को भोज में चढ़ाई जाती है टॉफी-चॉकलेट, रोग-परेशानियों से मिलती है मुक्ति
मंदिर में मांगलिक अवसरों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगती है और मंदिर के बाहर भंडारे का आयोजन भी मंदिर कमेटी की तरफ से किया जाता है. मंदिर के मुख्य गर्भगृह में बालाजी महाराज की प्रतिमा होने की वजह से मंगलवार को मंदिर में भक्त चॉकलेट और टॉफी लेकर भोग के रूप में चढ़ाते हैं.
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भारत देश के कोने-कोने मे ऐसे कई धार्मिक स्थल हैं, जहां भगवान को भोग में हलवा, खीर, मिठाई और 56 लगते हैं लेकिन राजस्थान के सीकर में एक ऐसा मंदिर है, जहां भगवान को चॉकलेट और टॉफी का भोज लगता है. राजस्थान के लोग दूर-दूर से इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं और मनोकामना पूरी होने पर विशेष अनुष्ठान और भोग का आयोजन करते हैं.
राजस्थान में कहां है ये मंदिर
राजस्थान के सीकर जिले में चारण का बास जगह के पास नान्याजी महाराज मंदिर है, जो ज्यादा पुराना नहीं है, लेकिन लोगों की आस्था मंदिर पर बहुत है. माना जाता है कि मंदिर में दर्शन मात्र से रोग दूर होते हैं और सारी मनोकामना की पूर्ति होती है. मंदिर के मुख्य गर्भगृह में बालाजी महाराज और उनके परम भक्त की प्रतिमा एक साथ विराजमान हैं. यह मंदिर न सिर्फ सीकर का धार्मिक प्रतीक है, बल्कि सांस्कृतिक महत्व का केंद्र भी है. सीकर की चौबीस कोसीय परिक्रमा में इस मंदिर से होकर भी गुजरना पड़ता है, तभी परिक्रमा पूर्ण मानी जाती है.
मंदिर में भक्त चॉकलेट और टॉफी लेकर भोग के रूप में चढ़ाते हैं
मंदिर में मांगलिक अवसरों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगती है और मंदिर के बाहर भंडारे का आयोजन भी मंदिर कमेटी की तरफ से किया जाता है. मंदिर के मुख्य गर्भगृह में बालाजी महाराज की प्रतिमा होने की वजह से मंगलवार को मंदिर में भक्त चॉकलेट और टॉफी लेकर भोग के रूप में चढ़ाते हैं.
भक्त अपनी श्रद्धानुसार दुकान से टॉफी लेते हैं
खास बात यह भी है कि मंदिर के बाहर एक ही टॉफी और चॉकलेट की दुकान है, लेकिन वहां कोई दुकानदार मौजूद नहीं है. भक्त अपनी श्रद्धानुसार दुकान से टॉफी लेते हैं और वहीं पर पैसे रखकर चले जाते हैं. मान्यता है कि उस पूरे क्षेत्र का ध्यान खुद नान्याजी महाराज करते हैं. मंदिर खेतों के बीचों-बीच बना है, जहां दर्शन करने से सुकून और शांति दोनों मिलती है.
ये मंदिर सीकर के बाकी सभी मंदिरों से अलग है
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मंदिर के बाहर एक छोटा कुआं भी बना है, जिसमें लगातार धुनी जलती रहती है. भक्त मंदिर में बालाजी के पास दीया न लगाकर बाहर कुएं के पास उनके नाम का दिया जलाते हैं और अपने साथ कुएं में जल रही धुनी की राख भी लेकर आते हैं. यह मंदिर सीकर के बाकी सभी मंदिरों से अलग है और उनकी मान्यता आस-पास के गांवों में बहुत है. अगर आप सीकर में घूमने आ रहे हैं तो इस मंदिर में दर्शन जरूर करें.
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