'हम पूरी तरह तैयार हैं...', ईरान में जारी हिंसा के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की सख्त चेतावनी, जानें पूरा मामला
ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा हुई तो अमेरिका उनकी मदद के लिए तैयार है. तेहरान से शुरू हुआ आंदोलन अब कई प्रांतों में फैल चुका है और हिंसा में कम से कम सात लोगों की मौत की खबर है.
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ईरान एक बार फिर उबाल पर है. बीते कुछ सालों में शुरू हुए सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी गूंज सुनाई देने लगी है. इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सख्त बयान सामने आया है, जिसने ईरानी शासन की चिंता और बढ़ा दी है. ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाता है और उन्हें बेरहमी से मारता है, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आएगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर किया पोस्ट
डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को अपने सोशल प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर यह चेतावनी जारी की. उन्होंने लिखा कि अमेरिका पूरी तरह तैयार है. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान के कई प्रांतों में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. इस सप्ताह शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा में कम से कम सात लोगों की मौत की खबर है. सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें थमने का नाम नहीं ले रही हैं.
पूरे ईरान में हो रहे प्रदर्शन
ईरान की राजधानी तेहरान से शुरू हुआ यह आंदोलन अब देश के अन्य हिस्सों तक फैल चुका है. सबसे ज्यादा हिंसा लोरेस्टान प्रांत के अजना शहर में देखने को मिली. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि गुस्साए लोग सड़कों पर उतर आए, कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया और खामेनेई शासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई. यह दृश्य इस बात का संकेत हैं कि जनता का गुस्सा अब चरम पर पहुंच चुका है. ट्रंप की चेतावनी ने इस आंदोलन को और हवा दे दी है. जानकारों का मानना है कि अमेरिका की ओर से ऐसा बयान ईरान के लिए दबाव बढ़ाने वाला साबित हो सकता है. हालांकि इससे हालात और हिंसक होने का खतरा भी जताया जा रहा है. ईरानी शासन पहले से ही घरेलू मोर्चे पर घिरा हुआ है और अब अंतरराष्ट्रीय बयानबाजी ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है.
ईरान में क्यों शुरू हुआ बवाल?
आखिर लोग सड़कों पर क्यों उतरे. इसकी सबसे बड़ी वजह है ईरान की डूबती अर्थव्यवस्था. सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के नेतृत्व वाले शासन के तहत देश की आर्थिक हालत लगातार खराब होती चली गई. हाल ही में ईरानी करेंसी रियाल डॉलर के मुकाबले गिरकर 42 हजार के पार पहुंच गई. यह रियाल की अब तक की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है. इस गिरावट ने आम लोगों की जिंदगी पर सीधा असर डाला है. आर्थिक संकट इतना गहरा हो गया कि सेंट्रल बैंक के प्रमुख मोहम्मद रजा फरजिन को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. इसके साथ ही देश में महंगाई ने भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है. महंगाई दर 42 फीसदी से ज्यादा हो चुकी है. खाने-पीने का सामान, दवाइयां और रोजमर्रा की जरूरतें आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं. लोगों की आय घट रही है और खर्च लगातार बढ़ रहा है.
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बताते चलें कि सालों से सुधार के वादे सुनते आ रहे लोगों को जब कोई उम्मीद नजर नहीं आई, तो उनका सब्र टूट गया. यही वजह है कि अब जनता सड़कों पर उतर आई है और सरकार के खिलाफ खुला विद्रोह कर रही है. ऐसे हालात में डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी ने ईरान के बिगड़ते राजनीतिक और सामाजिक संकट को एक नई दिशा दे दी है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ईरानी शासन इस चुनौती से कैसे निपटता है और क्या हालात काबू में आ पाते हैं या नहीं.
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