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संकट के वक्त भारत का 'सच्चा दोस्त' बनकर सामने आया ये देश, खोल दिया LPG का भंडार

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत के लिए एक दोस्त देश सामने आया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधा से भारत की 60% सप्लाई पर असर. इस बीच 5 मार्च को 11,000 टन का नया शिपमेंट भारत के लिए रवाना हुआ.

President of Argentina Javier Milley/ Narendra Modi (File Photo)
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मिडिल ईस्ट में बीते 28 फरवरी से चल रही जंग के चलते उपजे गंभीर एलपीजी संकट के बीच भारत से लगभग 20,000 किलोमीटर दूर स्थित एक दक्षिण अमेरिकी देश एक बड़े मददगार के रूप में सामने आया है. दरअसल ईरान की सख्ती के चलते इन दिनों समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित है. विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के बंद होने से भारत की ऊर्जा सप्लाई चेन पर गहरा असर पड़ा है, क्योंकि भारत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी (LPG) आयात इसी मार्ग से होता है. 

अर्जेंटीना बना संकटमोचक

इस मुश्किल दौर में अर्जेंटीना भारत के लिए एक मजबूत सहयोगी बनकर उभरा है. ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ता तालमेल साफ नजर आ रहा है. साल 2026 की पहली तिमाही में ही अर्जेंटीना ने भारत को 50,000 टन एलपीजी निर्यात किया है, जो पूरे 2025 के आंकड़े से दोगुने से भी ज्यादा है. खास बात यह है कि संकट गहराने से पहले ही ‘बाहिया ब्लांका’ बंदरगाह से लगभग 39,000 टन एलपीजी भारत पहुंच चुकी थी. इसके बाद 5 मार्च को 11,000 टन का एक और शिपमेंट भारत के लिए रवाना किया गया. यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि 2024 से पहले अर्जेंटीना भारत को एलपीजी सप्लाई नहीं करता था.

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राजनयिक रिश्तों को मिली नई गति

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ऊर्जा सहयोग के इस नए अध्याय ने दोनों देशों के रिश्तों को भी मजबूती दी है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार भारत में अर्जेंटीना के राजदूत ने साफ कहा है कि उनका देश भारत की ऊर्जा सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार है. अर्जेंटीना के पास गैस के बड़े भंडार मौजूद हैं और दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत जारी है. पिछले साल अर्जेंटीना की राष्ट्रीय तेल और गैस कंपनी के शीर्ष अधिकारियों ने भारत का दौरा किया और ऊर्जा मंत्री हरदीप पुरी के साथ कई अहम बैठकें हुईं. इससे साफ है कि यह साझेदारी आने वाले समय में और मजबूत हो सकती है.

भारत की रणनीति की हो रही सराहना

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इस पूरे घटनाक्रम में भारत की ऊर्जा विविधता रणनीति को भी सराहा जा रहा है. सरकार अब 40 से अधिक देशों के साथ ऊर्जा आपूर्ति नेटवर्क बना रही है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके. अर्जेंटीना इस नई रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है. यह कदम भविष्य में ऐसे संकटों से निपटने के लिए बेहद कारगर साबित हो सकता है.

लंबी दूरी बनी बड़ी चुनौती

हालांकि यह सहयोग राहत लेकर आया है, लेकिन इसके साथ कुछ बड़ी चुनौतियां भी जुड़ी हैं. अर्जेंटीना के बाहिया ब्लांका से गुजरात के दाहेज बंदरगाह तक की दूरी करीब 20,000 किलोमीटर है. इतनी लंबी दूरी तय करने में समय ज्यादा लगता है और परिवहन लागत भी काफी बढ़ जाती है. इसके अलावा खराब मौसम और समुद्री जोखिम भी इस प्रक्रिया को और जटिल बना देते हैं.

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घरेलू स्तर पर सरकार के बड़े कदम

सिर्फ आयात पर निर्भर रहने के बजाय भारत सरकार ने घरेलू स्तर पर भी कई अहम फैसले लिए हैं. कमर्शियल एलपीजी के कोटे में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, जिससे होटल और फूड सेक्टर को राहत मिली है. साथ ही, घरों में ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन को तेजी से बढ़ाया जा रहा है.

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बताते चलें कि मौजूदा संकट ने भारत को एक नई दिशा में सोचने पर मजबूर किया है. अर्जेंटीना के साथ बढ़ता सहयोग यह दिखाता है कि मुश्किल समय में भी नए रास्ते निकाले जा सकते हैं. अगर यही रणनीति जारी रही, तो भारत भविष्य में अपनी ऊर्जा जरूरतों को और मजबूत तरीके से पूरा कर पाएगा.

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