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बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ अमेरिका में भी उठी जोरदार आवाज, एक साथ 25 शहरों में हल्ला बोल

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए हमले के खिलाफ अब आवाज उठनी शुरू हो गई है. जहां भारत अपने स्तर से कार्रवाई कर रहा है, वहीं अब अमेरिका में रहने वाले बांग्लादेशी-भारतीय हिंदुओं ने जबरदस्त हल्ला बोला है.

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04 Feb 2026
( Updated: 04 Feb 2026
06:40 AM )
बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ अमेरिका में भी उठी जोरदार आवाज, एक साथ 25 शहरों में हल्ला बोल
America Protest/ X
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बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती जा रही है. आगामी 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव से पहले देशभर में राजनीतिक हिंसा में तेज़ बढ़ोतरी देखी गई है. जनवरी महीने में हिंसा से जुड़ी घटनाओं में दिसंबर 2025 की तुलना में भारी इजाफा हुआ है. इतना ही नहीं अल्पसंख्यक हिंदुओं पर ना सिर्फ तेजी से हमले बढ़े हैं, बल्कि उन्हें चुन-चुनकर मारा जा रहा है.

करीब एक साल से ज्यादा का समय बीत चुका है अंतरिम सरकार के आए, तब से हिंदुओं का जीना मुश्किल हो गया है. समाज में, व्यापार में, सरकार में, सड़क पर हर जगह कट्टरपंथियों का कब्जा हो गया है. ऐसे में अब पूरी दुनिया से इन जिहादियों के खिलाफ आवाज उठनी शुरू हो गई है.

बांग्लादेश हिंदुओं के समर्थन में अमेरिका में प्रदर्शन!

इसी बीच बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों के साथ हिंसा के खिलाफ अमेरिका में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं. पिछले कुछ दिनों में अमेरिका के 25 शहरों में शांतिपूर्ण जागरूकता रैलियां आयोजित की गईं. कड़ाके की ठंड, बर्फबारी और जमी हुई सड़कों के बावजूद इन रैलियों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. उन्होंने बांग्लादेश में धार्मिक रूप से लक्षित हिंसा के पीड़ितों के प्रति एकजुटता दिखाई. प्रदर्शनकारियों ने सिटी हॉल और सिविक सेंटर्स पर एकजुट होकर प्रदर्शन करते हुए अपने प्रयासों को गैर-राजनीतिक और मानवीय बताया.

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अमेरिका के 25 शहरों में निकाली गई रैली

कई शहरों में आयोजित प्रदर्शनों में स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों और नागरिक नेताओं ने भी हिस्सा लिया. आयोजकों के अनुसार, इससे शांतिपूर्ण नागरिक अभिव्यक्ति और समुदाय-नेतृत्व वाले प्रयासों की अहमियत उजागर हुई, जो वैश्विक मानवाधिकार मुद्दों को सामने लाने में सहायक हैं.

प्रदर्शनकारियों ने मौन रखा और प्रार्थनाएं की. एक मीडिया विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने कमजोर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए शांतिपूर्ण अपील भी जारी की. मिडवेस्ट से लेकर पूर्वी और पश्चिमी तटों तक प्रदर्शनकारियों ने लिंचिंग, आगजनी, यौन हिंसा और लक्षित हत्याओं की रिपोर्ट की गई घटनाओं के खिलाफ प्रदर्शन किए और लोगों को इनके बारे में बताया. इस राष्ट्रव्यापी अभियान का समन्वय दैपायन देब, दीप्ति महाजन, गीता सिकंद और दिव्या जैन ने किया.

चुनाव के बीच बांग्लादेश में बढ़ी हिंसा

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मानवाधिकार संगठन आइन ओ सालिश केंद्र (एएसके) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में राजनीतिक हिंसा की 75 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 616 लोग घायल हुए और 11 लोगों की मौत हो गई. इसके मुकाबले दिसंबर 2025 में 18 घटनाएं सामने आई थीं, जिनमें 268 लोग घायल और चार की मौत हुई थी.

बांग्लादेश में बढ़ा मौत का आंकड़ा

रिपोर्ट में कहा गया है कि 22 जनवरी को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और प्रचार अभियान शुरू होने के बाद हिंसक झड़पों में और तेजी आई. एएसके के अनुसार, 21 से 31 जनवरी के बीच 49 झड़पें हुईं, जिनमें चार लोगों की मौत और 414 लोग घायल हुए. इससे साफ है कि मतदान की तारीख नजदीक आते ही हिंसा बढ़ती जा रही है.

मानवाधिकार संगठन ने यह भी बताया कि बढ़ती राजनीतिक हिंसा के बीच पत्रकारों को भी निशाना बनाया जा रहा है. दिसंबर में जहां ड्यूटी के दौरान 11 पत्रकारों के साथ बाधा या हमले की घटनाएं सामने आई थीं, वहीं जनवरी में यह संख्या बढ़कर 16 हो गई. बांग्लादेश के प्रमुख अखबार द डेली स्टार ने यह जानकारी दी.

हिंसा पर चिंता जताते हुए एएसके ने सभी राजनीतिक दलों से संयम बरतने और चुनाव प्रचार के दौरान शांति बनाए रखने की अपील की है. साथ ही, कानून प्रवर्तन एजेंसियों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया गया है.

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अराजकता की ओर बांग्लादेश

चुनावी अभियान की शुरुआत से ही कई निर्वाचन क्षेत्रों में गोलीबारी, चाकूबाजी, तोड़फोड़ और झड़पों की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें कई लोग घायल हुए और कुछ की जान चली गई. इसके अलावा, कई इलाकों में चुनाव से जुड़ा बुनियादी ढांचा- जैसे कैंप, माइक्रोफोन, कार्यालय, वाहन और यहां तक कि मतदान केंद्रों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे- तोड़फोड़ या लूट का शिकार हुए हैं.

12 फरवरी के चुनाव से पहले बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा लगातार बढ़ रही है. जो राजनीतिक दल पहले अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के साथ मिलकर शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग की निर्वाचित सरकार को हटाने में शामिल थे, वही अब आगामी चुनाव जीतने के लिए आपसी सत्ता संघर्ष में उलझे हुए हैं.

भारत ने क्या कार्रवाई की है!

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जहां तक बांग्लादेश के खिलाफ कार्रवाई की बात है तो भारत अपने तरीके से कार्रवाई कर रहा है. ट्रेड पाबंदी के अवाल बजट 2026 में भी बांग्लादेश और मालदीव को दी जाने वाली सहायाता राशि में कटौती कर दी गई है. वहीं भूटान और नेपाल की मदद राशि को बढ़ा दिया गया है. इसके अलावा भारत ने बांग्लादेश को नॉन फैमिली स्टेशन घोषित कर दिया है. ये उन देशों के लिए होता है जहां कि सुरक्षा के गंभीर हालात होते हैं.

भारतीय राजनयिकों की फैमिली देश लौटी!

भारत अब तक पाकिस्तान, ईराक, अफगानिस्तान और साऊथ सुजान को इस देश का दर्जा देता रहा था अब बांग्लादेश को भी इस सूची में शामिल कर दिया गया है. इसके मुताबिक अब बांग्लादेश में भी भारतीय कर्मी, मिशन, वाणिज्य दूतावास, और अन्य प्रतिष्ठान के कर्मी, अपने साथ अपने परिवार को साथ नहीं रख पाएंगे. इसी कड़ी में भारतीय मिशन के लोगों की फैमिली देश लौट चुकी है.

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अब अमेरिका में भी इसको लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं. विरोध में शामिल अमेरिकी हिंदू गीता सिकंद ने कहा कि रैलियों ने समुदायों और धर्मों के बीच एकता को दर्शाया है. गीता सिकंद ने कहा, "रैलियों में बांग्लादेशी हिंदू अमेरिकियों ने भी हिस्सा लिया. उन्होंने बांग्लादेश में जारी हिंसा के बीच हिंदुओं के अस्तित्व के बारे में गहरी चिंता व्यक्त की." उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश सरकार की उदासीनता चिंताजनक है, क्योंकि उसने हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं.

दिव्या जैन ने इन अभियानों को शांत लेकिन प्रभावशाली संकल्प का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा, "आज हमने जो देखा वह शांत शक्ति थी. यह दर्शाती है कि जागरूकता की शुरुआत सामने आने से होती है."

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