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PAK सेना का एक और सरेंडर, इस बार BLA ने टिकवाए घुटने! रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का संसद में कबूलनामा, हाथ से निकला बलूचिस्तान

पाकिस्तान अपने सबसे बड़े और अकूत खनिज संसाधनों वाले प्रांत बलूचिस्तान से नियंत्रण खोता जा रहा है. पाक के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में हार मान ली है. उन्होंने खुलकर स्वीकार किया कि पाकिस्तानी सेना कमजोर पड़ रही है. उनके बयान में हार और लाचारी साफ झलक रही है.

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04 Feb 2026
( Updated: 04 Feb 2026
01:40 PM )
PAK सेना का एक और सरेंडर, इस बार BLA ने टिकवाए घुटने! रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का संसद में कबूलनामा, हाथ से निकला बलूचिस्तान
Khwaja Asif in PAK NA (Screengrab)
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पाकिस्तान को साल 2025 में पहले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारतीय सेना से करारी मार पड़ी, फिर अफगानिस्तान के तालिबान लड़ाकों ने उसे सबक सिखाया. अब साल की शुरुआत भी उसके लिए अच्छी नहीं रही. अब बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के लड़ाकों ने पाक सेना को तगड़ा झटका दिया है और उसे अपने इलाकों से खदेड़ दिया है.

हाल ही में पाकिस्तानी सेना और बलूच विद्रोहियों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें दोनों पक्षों के कई लोग मारे गए. इस घटना ने पाक फौज की ताकत और सक्षमता की पोल खोल दी है. लोग कहने लगे हैं कि मुनीर फेल हो गया है, उससे सुरक्षा संभाली नहीं जा रही. न आम लोगों की सुरक्षा हो पा रही है और न ही चीनी निवेश की. यही वजह है कि रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं कि चीन पाकिस्तान से अपना निवेश समेट सकता है.

इसी बीच BLA के भीषण हमलों को लेकर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने खुद कबूल कर लिया कि उनकी फौज नाकारा और फिसड्डी साबित हो रही है. आसिफ ने माना कि बलूचिस्तान में हालिया हिंसा में बढ़ोतरी के बीच देश के सुरक्षा बल बलूच विद्रोहियों के खिलाफ कमजोर पड़ गए हैं.

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ख्वाजा आसिफ के ये सिर्फ बयान नहीं हैं, बल्कि इस बात के साफ संकेत हैं कि क्षेत्रफल के लिहाज से पाकिस्तान का सबसे बड़ा और खनिज संसाधनों से भरपूर सूबा अब उसके हाथ से निकलता जा रहा है. आसिफ ने एक तरह से मान लिया है कि उनकी मुसल्लह अफवाज BLA के सामने पानी भरती नजर आ रही है. कहा जा रहा है कि उनके शब्दों से पाक फौज की खुली हार झलक रही थी. ऐसा लग रहा था मानो वे रो रहे हों और हार स्वीकार कर चुके हों. इतना ही नहीं, ऐसा भी महसूस हुआ कि वे अपनी ही फौज से कोई पुराना हिसाब चुकता कर रहे हों.

बलूचिस्तान प्रांत इस्लामाबाद यानी पाकिस्तान से आज़ादी के लिए लड़ रहा है. पिछले तीन दिनों में चलाए गए काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन में बलूच विद्रोहियों और अन्य हथियारबंद समूहों के कुल 197 लोग मारे गए. इस दौरान सरकारी मीडिया ने भी माना कि सुरक्षाबलों के करीब 22 जवान भी मारे गए. अपनी नाकामी छिपाने के लिए पाकिस्तान ने इस हिंसा को भारत से जोड़ने की कोशिश की. पाक सरकार ने इस समूह को ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ नाम दिया, ताकि बलूच विद्रोह को जबरन भारत से जोड़ा जा सके.

शारीरिक तौर पर कमजोर पड़ रहे सुरक्षाबल: ख्वाजा आसिफ

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नेशनल असेंबली में ख्वाजा आसिफ ने कहा, “बलूचिस्तान भौगोलिक दृष्टि से पाकिस्तान का 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सा है. इसे नियंत्रित करना किसी घनी आबादी वाले शहर से कहीं ज्यादा मुश्किल है. इसके लिए भारी संख्या में फोर्स चाहिए. हमारे सैनिक तैनात हैं और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन इतने बड़े इलाके की रखवाली और पेट्रोलिंग में वे शारीरिक तौर पर कमजोर पड़ रहे हैं.”

नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए आसिफ ने देश के सबसे बड़े लेकिन सबसे कम आबादी वाले प्रांत में सुरक्षाबलों के सामने आने वाली भौगोलिक चुनौतियों का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि अलगाववादी ताकतों ने कम से कम 12 जगहों पर एकसाथ हमले किए. पाकिस्तानी अखबार *द एक्सप्रेस ट्रिब्यून* के मुताबिक, पूरे प्रांत में चलाए गए बड़े काउंटर टेरर ऑपरेशन में कम से कम 177 विद्रोही मारे गए.

BLA से बातचीत से सरकार का इनकार

ख्वाजा आसिफ ने बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) से किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों समेत आम नागरिकों की हत्या के जिम्मेदार आतंकियों से कोई बातचीत नहीं होगी. उन्होंने दावा किया कि अपराधी गैंग और अलगाववादी समूहों के बीच सांठगांठ है, जहां अपराधी BLA के नाम पर काम करते हैं और स्मगलिंग को संरक्षण देते हैं.

आसिफ ने कहा कि बलूचिस्तान में कबायली बुजुर्गों, नौकरशाही और अलगाववादी नेताओं के बीच गठजोड़ बन चुका है. उन्होंने दावा किया कि पहले स्मगलर्स तेल की तस्करी से रोज़ाना 4 अरब पाकिस्तानी रुपये तक कमा लेते थे.

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रक्षा मंत्री के मुताबिक सरकार ने स्मगलिंग रोकने के लिए सख्ती की, जिसके बाद चमन बॉर्डर पर बड़े विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. कुछ लोगों का कहना है कि सरकार को राष्ट्रवादी आंदोलनों से बातचीत करनी चाहिए, लेकिन आसिफ ने दावा किया कि ये प्रदर्शन व्यावसायिक हितों से प्रेरित थे. इस बीच बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने इस ऑपरेशन को इतने कम समय में की गई सबसे बड़ी इंटेलिजेंस-आधारित कार्रवाइयों में से एक बताया. उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई BLA के कई हमलों के बाद की गई.

बलूचियों को क्यों उठाना पड़ा हथियार?

ईरान और अफगानिस्तान की सीमा से सटे बलूचिस्तान में दशकों से बलूच अलगाववादियों के नेतृत्व में विद्रोह चल रहा है. वे ज्यादा स्वायत्तता और प्रांत के प्राकृतिक संसाधनों में बड़ा हिस्सा चाहते हैं. बलूच लोगों का आरोप है कि सुरक्षाबलों द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन लगातार बढ़े हैं, जिसके चलते वे पाकिस्तान से अलग होने की लड़ाई लड़ रहे हैं. जबरन गुमशुदगी, न्यायेतर हत्याएं और झूठे मामलों के आरोप आम हो चुके हैं.

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पाकिस्तान से अलग रहना चाहते हैं बलूच लोग

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कलात रियासत के पाकिस्तान में विलय के तुरंत बाद ही बलूच विरोध शुरू हो गया था. 1948, 1958-59, 1962-63, 1973-77 और 2000 के दशक की शुरुआत से लेकर अब तक लगातार विद्रोह होते रहे हैं. यह प्रांत खनिज संपदा, प्राकृतिक गैस, कोयला, तांबा, सोना और ग्वादर जैसे रणनीतिक बंदरगाह से भरपूर है. इसके बावजूद बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे गरीब प्रांत बना हुआ है, जहां सड़कें, अस्पताल, स्कूल, बिजली और रोजगार के अवसर बेहद सीमित हैं.

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