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H-1B वीजा के लिए देने होंगे 99 लाख रुपये! अमेरिका के नए प्रस्ताव से भारतीयों को बड़ा झटका
H-1B Visa: अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने प्रस्ताव दिया है कि सालाना तय सीमा के तहत आने वाले हर H-1B वीजा आवेदन पर 1,03,265 डॉलर की अतिरिक्त फीस लगाई जाए.
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H-1B Visa: अमेरिका ने H-1B वीजा को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव रखा है, जिसका सीधा असर भारत समेत दूसरे देशों से अमेरिका जाकर नौकरी करने की इच्छा रखने वाले लोगों पर पड़ सकता है. अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने प्रस्ताव दिया है कि सालाना तय सीमा के तहत आने वाले हर H-1B वीजा आवेदन पर 1,03,265 डॉलर की अतिरिक्त फीस लगाई जाए. खास बात यह है कि यह रकम मौजूदा H-1B आवेदन शुल्क से अलग होगी.यानी कंपनियों या नियोक्ताओं को पहले से लगने वाली फीस के ऊपर यह अतिरिक्त रकम भी देनी पड़ सकती है.
किन H-1B आवेदनों पर लगेगा शुल्क?
यह प्रस्ताव सभी H-1B वीजा आवेदनों पर लागू नहीं होगा. DHS के मुताबिक, यह शुल्क केवल उन आवेदनों पर लगाया जाएगा जो हर साल तय की जाने वाली H-1B सीमा के अंदर आते हैं. वहीं, सीमा से बाहर रखे जाने वाले कुछ H-1B आवेदन इस अतिरिक्त शुल्क के दायरे में नहीं होंगे. अमेरिका में हर साल सामान्य श्रेणी के लिए 65,000 H-1B वीजा उपलब्ध होते हैं. इसके अलावा अमेरिकी विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री या उससे ऊपर की पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा की व्यवस्था है. प्रस्तावित 1,03,265 डॉलर का शुल्क इन सालाना निर्धारित वीजा श्रेणियों से जुड़े आवेदनों पर लागू करने की बात कही गई है.
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इतना ज्यादा शुल्क क्यों?
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अमेरिकी सरकार का कहना है कि इस अतिरिक्त रकम का इस्तेमाल H-1B कार्यक्रम से जुड़े अलग-अलग सरकारी विभागों के खर्च की भरपाई के लिए किया जाएगा. सरकार ने इसे मौजूदा H-1B याचिका शुल्क में शामिल करने के बजाय अलग शुल्क रखने का प्रस्ताव दिया है, ताकि इससे मिलने वाली रकम का हिसाब रखना और उसका इस्तेमाल दिखाना आसान हो.
हालांकि, इतनी बड़ी फीस का बोझ कंपनियों पर पड़ने के कारण विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर कंपनियों की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है. भारतीय आईटी और टेक प्रोफेशनल्स के लिए यह प्रस्ताव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका में काम करने वाले बड़ी संख्या में भारतीय कर्मचारी H-1B वीजा पर निर्भर रहते हैं.
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नौकरी जाने पर 60 दिन की राहत भी खतरे में
H-1B वीजा धारकों के लिए सिर्फ फीस ही चिंता की वजह नहीं है. अमेरिका में नौकरी जाने के बाद विदेशी कर्मचारियों को आम तौर पर नई नौकरी तलाशने के लिए 60 दिनों तक की मोहलत मिलती है. यह व्यवस्था 2017 में शुरू की गई थी, ताकि नौकरी खत्म होने के तुरंत बाद कर्मचारी और उनके आश्रितों को अमेरिका छोड़ने की मजबूरी न हो. अब इस 60 दिन की राहत को खत्म करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है. अगर ऐसा होता है, तो नौकरी जाने वाले कुछ गैर-आप्रवासी वीजा धारकों को बहुत कम समय में नई नौकरी ढूंढनी पड़ सकती है, वरना उन्हें अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है.
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H-1B वीजा से जुड़े ये प्रस्ताव अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों के लिए नियमों को पहले से ज्यादा सख्त बना सकते हैं. खासकर भारतीय टेक और आईटी प्रोफेशनल्स के लिए आने वाले समय में H-1B के जरिए अमेरिका में नौकरी करना पहले की तुलना में अधिक महंगा और चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
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Input -IANS