मादुरो के महल की रेकी, 150 विमान और 30 मिनट... ट्रंप की सेना ने वेनेजुएला में ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ को कैसे दिया अंजाम
अमेरिकी विशेष बलों ने ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ चलाकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिशन की पुष्टि करते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन तक अमेरिका देश का नियंत्रण संभालेगा. ट्रं
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वेनेजुएला में 2 जनवरी की रात दुनिया की राजनीति में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने वैश्विक शक्ति संतुलन को झकझोर कर रख दिया. अमेरिकी विशेष बलों ने एक गुप्त और अत्यंत सुनियोजित सैन्य अभियान के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया. इस मिशन को अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ नाम दिया था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस ऑपरेशन की सफलता की पुष्टि की और कहा कि वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन तक अमेरिका देश का नियंत्रण अपने हाथ में रखेगा.
अमेरिका ने मिशन को कैसें दिया अंजाम ?
अमेरिकी ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन के अनुसार, यह मिशन 2 जनवरी की रात को अंजाम दिया गया. राष्ट्रपति ट्रंप ने रात 10:46 बजे ईस्टर्न टाइम पर इस ऑपरेशन को अंतिम मंजूरी दी. इसके बाद सैन्य मशीनरी हरकत में आ गई. ठीक रात 1:01 बजे, कराकस समय के अनुसार रात 2:01 बजे, अमेरिकी विशेष बलों ने मादुरो के अत्यंत सुरक्षित परिसर में प्रवेश किया. मादुरो जिस महल में रह रहे थे, वह किसी किले से कम नहीं था. अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि इस महल के हूबहू ढांचे पर अमेरिकी सैनिकों ने महीनों तक अभ्यास किया था. हर गलियारे, हर कमरे और हर सुरक्षा व्यवस्था की बारीकी से जानकारी जुटाई गई थी. यही वजह रही कि मिशन के दौरान किसी भी तरह की चूक नहीं हुई.
ऑपरेशन में अमेरिकी ने झोंकी की ताकत
इस ऑपरेशन में अमेरिका की सैन्य ताकत पूरी तरह झलकती नजर आई. F-22, F-35 और F-18 जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों के साथ B-1 बमवर्षक विमान और ड्रोन्स भी शामिल थे. कुल मिलाकर 150 से अधिक विमानों ने इस मिशन में हिस्सा लिया. कराकस की आसमान में उस रात असामान्य हलचल देखी गई, लेकिन शहर की बिजली बंद होने के कारण आम लोगों को स्थिति का अंदाजा देर से हुआ.
30 मिनट से भी कम में अमेरिकी सैनिकों ने मादुरो को पकड़ा
राष्ट्रपति ट्रंप ने मार-ए-लागो से दिए बयान में कहा कि यह एक डार्क और बेहद खतरनाक मिशन था. सैनिकों के पास भारी ब्लोटॉर्च थे, जिनसे सुरक्षित कमरों के दरवाजे काटे जा सकते थे. हालांकि, मादुरो को सुरक्षित कमरे तक पहुंचने का मौका ही नहीं मिला. अमेरिकी बलों ने उन्हें 30 मिनट से भी कम समय में पकड़ लिया. इस दौरान कराकस में कम से कम सात बड़े विस्फोटों की आवाज सुनी गई, जिससे पूरे शहर में दहशत फैल गई. गिरफ्तारी के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया कि वेनेजुएला में जब तक सुरक्षित और उचित सत्ता हस्तांतरण नहीं हो जाता, तब तक अमेरिका देश का प्रशासन संभालेगा. हालांकि, उन्होंने इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा घोषित नहीं की. अमेरिकी न्याय विभाग ने यह भी पुष्टि की कि मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोर्स पर नार्को-टेररिज्म के गंभीर आरोप हैं. इन मामलों में उन पर अमेरिका में मुकदमा चलेगा. जनरल डैन केन ने बताया कि इस पूरे ऑपरेशन में किसी भी अमेरिकी सैनिक की जान नहीं गई और न ही कोई सैन्य उपकरण खोया गया. वहीं वेनेजुएला के अधिकारियों का दावा है कि इस हमले में उनके कुछ सैनिक और नागरिक मारे गए हैं, लेकिन उन्होंने इसकी सटीक संख्या साझा नहीं की है.
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बताते चलें कि इस ऐतिहासिक मिशन की सफलता के पीछे खुफिया एजेंसियों का मजबूत नेटवर्क था. CIA, NSA और NGA जैसी एजेंसियों ने मिलकर सूचनाओं का ऐसा महाजाल तैयार किया, जिसने ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचाया. जनरल केन ने कहा कि यह मिशन थल सेना, वायु सेना, नौसेना और स्पेस फोर्स के बेहतरीन तालमेल का उदाहरण है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस अभियान में विफलता का कोई विकल्प नहीं था, क्योंकि एक छोटी सी गलती पूरे मिशन को खतरे में डाल सकती थी.
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