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शांति समझौते पर मंडराया खतरा! परमाणु जांच को लेकर ट्रंप की खुली चेतावनी, अमेरिका-ईरान फिर आमने-सामने

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते और सैन्य कार्रवाई रुकने के बावजूद दोनों देशों के बीच तनाव कम होता नहीं दिख रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने परमाणु निरीक्षण को समझौते की अहम शर्त बताते हुए ईरान को चेतावनी दी है, जबकि ईरान ने बमबारी से प्रभावित परमाणु स्थलों के निरीक्षण को लेकर सामने आई खबरों का खंडन किया है.

Image Source: X/ @WhiteHouse/ Xinhua(IANS)
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अमेरिका और ईरान के बीच भले ही युद्ध समाप्त करने को लेकर शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं और सैन्य कार्रवाई भी फिलहाल थम गई है, लेकिन दोनों देशों से सामने आ रही खबरें यह संकेत दे रही हैं कि यह समझौता अभी केवल कागज़ों पर ही प्रभावी नजर आ रहा है. दोनों देशों के बीच तल्खी अब भी बरकरार है, जो आने वाले समय में इस शांति समझौते के लिए चुनौती बन सकती है. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को परमाणु कार्यक्रम की जांच को लेकर ईरान को सीधी चेतावनी दी है. ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि निरीक्षण और पारदर्शिता के बिना किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. उनके इस बयान से साफ है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.

दरअसल, यह विवाद इसलिए गहराता नजर आ रहा है क्योंकि परमाणु ठिकानों के निरीक्षण को लेकर दोनों देशों के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं. एक ओर ईरान ने उन खबरों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि वह संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों को बमबारी से प्रभावित परमाणु स्थलों का दौरा कराने की तैयारी कर रहा है. वहीं दूसरी ओर अमेरिका का कहना है कि निरीक्षण से जुड़ी व्यवस्था पहले ही तय की जा चुकी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित शांति समझौते के तहत अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को ईरान में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी. इसके साथ ही उन्होंने तेहरान के उन बयानों को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें किसी भी प्रकार की निरीक्षण व्यवस्था को स्वीकार करने से इनकार किया गया है. ट्रंप के इस बयान ने साफ कर दिया है कि समझौते के बावजूद कई अहम मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी बने हुए हैं.

ईरान के दावे को ट्रंप ने किया खारिज 

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डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से सामने आए उन दावों को भी खारिज कर दिया, जिनमें परमाणु निगरानी व्यवस्था और उसके दायरे को लेकर सवाल उठाए गए थे. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि तेहरान को समझौते की सभी प्रस्तावित शर्तों की पूरी जानकारी है और इस विषय पर किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए. ईरानी मीडिया और अधिकारियों के बयानों का हवाला देते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी ओर से पेश की जा रही बातें तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं. उन्होंने दो टूक कहा कि यदि ईरान के दावे सही होते, तो वह इस मुद्दे पर चल रही बातचीत और बैठकों को तत्काल रद्द कर देते. ट्रंप ने आगे स्पष्ट किया कि समझौते के तहत अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को उचित समय आने पर ईरान में जाकर निरीक्षण करने की अनुमति मिलेगी. उनके मुताबिक, निरीक्षक तय प्रक्रिया के अनुसार सही समय पर संबंधित स्थलों पर पहुंचेंगे और निगरानी की जिम्मेदारी निभाएंगे.

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क्या है विवाद का जड़?

यह विवाद उस समय और गहरा गया, जब स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत जारी थी. इस दौरान ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें बमबारी से प्रभावित परमाणु स्थलों के निरीक्षण को लेकर सहमति बनने की बात कही गई थी. बघाई ने स्पष्ट किया कि ऐसी किसी जांच प्रक्रिया या उसके समय को लेकर दोनों पक्षों के बीच कोई औपचारिक निर्णय नहीं हुआ है. हालांकि, हाल ही में हुई वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी है. समझौते के तहत ईरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को सीमित करने पर सहमति जताई है, जबकि इसके बदले अमेरिका द्वारा उस पर लगाए गए कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने का प्रस्ताव रखा गया है. बावजूद इसके, निरीक्षण व्यवस्था और परमाणु गतिविधियों की निगरानी को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं.

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ग़ौरतलब है कि है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया था कि तमाम भ्रामक रिपोर्टों और उनकी नजर में अमेरिका की उपलब्धि को कमतर दिखाने की कोशिशों के बावजूद ईरान ने भविष्य में व्यापक और दीर्घकालिक परमाणु निरीक्षण व्यवस्था को स्वीकार कर लिया है. ट्रंप के अनुसार, इस कदम से ईरान के परमाणु कार्यक्रम में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसा बढ़ेगा. उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की निगरानी व्यवस्था किसी भी समझौते की बुनियादी शर्त थी. ट्रंप के मुताबिक, यदि ईरान निरीक्षण को लेकर सहमत नहीं होता, तो दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत जारी रखना संभव नहीं होता और वार्ता प्रक्रिया वहीं रुक जाती.

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