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बांग्लादेश में गूंजा 'जय श्री राम' का नारा, ढाका में हजारों हिंदू सड़कों पर उतरे; आखिर क्या है पूरा मामला?

बांग्लादेश में भगवान राम की तस्वीर के कथित अपमान और राम प्रतिमा निर्माण पर रोक के विरोध में हजारों हिंदू ढाका की सड़कों पर उतरे. प्रदर्शनकारियों ने मशाल मार्च निकालकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

Image Source: X/@salah_shoaib Via IANS
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बांग्लादेश में धार्मिक असहिष्णुता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं. देश की राजधानी ढाका में हज़ारों हिंदू भगवान राम की तस्वीर के कथित अपमान और भव्य मूर्ति निर्माण को रोके जाने के विरोध में हाथ में मशाल लेकर बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरें. स्थानीय मीडिया के अनुसार, गाइबांधा जिले में भगवान राम की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाने के विरोध में एक प्रदर्शन के दौरान कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने कथित तौर पर उनकी तस्वीर का अपमान किया था.

दरअसल, प्रस्तावित मूर्ति का निर्माण अभी भी रुका हुआ है, इसलिए शुक्रवार को हजारों हिंदुओं ने मशालें लेकर ढाका में मार्च किया, 'जय श्री राम' के नारे लगाए और मूर्ति के अपमान के लिए कथित तौर पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. बांग्लादेशी अखबार ब्लिट्ज के एडिटर सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'बांग्लादेश में हिंदू ‘जय श्री राम’ का नारा लगाकर इस्लामिस्टों के खिलाफ विरोध जता रहे हैं! बांग्लादेश में हजारों हिंदू मशालें लेकर सड़कों पर उतर आए और रंगपुर विभाग के गैबांधा जिले में सनातन कॉम्प्लेक्स के खिलाफ इस्लामवादियों की हालिया बदनामी और भगवान राम की तस्वीरों का अपमान करने के खिलाफ ‘जय श्री राम’ का नारा लगाया. उन्होंने पूरे देश में ऐसा विरोध करने का ऐलान किया है और पहली बार (अपमान का) जवाब देने की कसम खाई है.'

क्या है पूरा मामला?

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स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी उपजिला में स्थित श्रीश्री राधागोविंद और काली मंदिर परिसर में भगवान राम की दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा के निर्माण पर रोक लगा दी गई. यह आदेश वहां के अधिकारियों ने दिया. मंदिर के सलाहकार श्यामल कुमार महंत ने पिछले हफ्ते के गुरुवार को शाम मंदिर के सभागार में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा की. इससे पहले देश के प्रमुख अल्पसंख्यक अधिकार संगठन बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन एकता परिषद ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया है.

हिंदू संगठनों ने दिया 72 घंटे का अल्टीमेटम

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बांग्लादेश के रंगपुर में हिंदू समुदाय के प्रदर्शन को पुलिस द्वारा रोकने की कोशिश के दौरान हल्की झड़प की स्थिति बन गई. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इसी महीने गाइबांधा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों ने भगवान राम की तस्वीर के साथ कथित तौर पर अपमानजनक व्यवहार किया था, जिससे समुदाय में नाराजगी फैल गई. प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP सरकार इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सकी है. उन्होंने घटना में शामिल आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए प्रशासन को 72 घंटे का समय दिया है. हिंदू संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे बड़े स्तर पर रैलियां और विरोध-प्रदर्शन आयोजित करेंगे. साथ ही, मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर शनिवार को धार्मिक मामलों के मंत्रालय को एक ज्ञापन भी सौंपने की तैयारी की गई है.

परिषद ने की कड़ी कार्रवाई की मांग

संगठन के अनुसार, एक सांप्रदायिक समूह द्वारा निकाले गए जुलूस के दौरान भगवान राम की तस्वीर का अपमान किया गया। परिषद ने आरोप लगाया, 'पिछले कई दिनों से कुछ कट्टरपंथी तत्व पलाशबाड़ी में भगवान श्रीराम की प्रतिमा को और मंदिर परिसर को नुकसान पहुंचाने की धमकियां दे रहे हैं.' परिषद का कहना है, 'इन समूहों द्वारा सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ नफरत फैलाने का अभियान भी चलाया जा रहा है.' संगठन ने चेतावनी दी कि ऐसी गतिविधियां किसी भी समय व्यापक सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले सकती हैं. परिषद ने कहा, 'लोकतांत्रिक और बहुलतावादी समाज में इस प्रकार की उकसावे वाली और भड़काऊ गतिविधियां पूरी तरह अस्वीकार्य हैं.' संगठन ने बांग्लादेश सरकार से मांग की कि सांप्रदायिक शक्तियों पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाए ताकि सामाजिक सौहार्द और शांति बनी रहे' संगठन ने भगवान राम की तस्वीर के अपमान और धार्मिक भावनाएं भड़काने में शामिल लोगों की तत्काल गिरफ्तारी तथा कड़ी सजा की भी मांग की है. साथ ही सभी धर्मनिरपेक्ष नागरिकों, सामाजिक संगठनों और लोकतांत्रिक राजनीतिक दलों से इन गतिविधियों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की है.

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राम प्रतिमा परियोजना पर रोक से बढ़ा विवाद

इस बीच, स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पलाशबाड़ी में प्रस्तावित भगवान राम की विशाल प्रतिमा के निर्माण कार्य को भी प्रशासन ने रोक दिया है. मंदिर के सलाहकार श्यामल कुमार महंत ने हाल ही में इसकी घोषणा की थी. आलोचकों का आरोप है कि यह फैसला इस्लामी कट्टरपंथी समूहों के दबाव में लिया गया.

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बताते चलें कि बांग्लादेशी अखबार ब्लिट्ज के संपादक सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने भी इस घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए कहा कि स्थानीय जिहादी और इस्लामवादी संगठनों के विरोध के बाद मंदिर परियोजना की गतिविधियां रोक दी गई हैं. यह मामला अब बांग्लादेश में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर नई बहस का विषय बन गया है.

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