मिडिल ईस्ट को लेकर भारत का मास्टरस्ट्रोक, अरब देशों के विदेश मंत्रियों के साथ PM मोदी की बैठक, PAK का गाजा प्लान फेल!
पीएम मोदी के प्रस्तावित इज़रायल दौरे और ट्रंप के गाजा पीस प्लान व पीस बोर्ड पर बनी संशय की स्थिति के बीच भारत ने एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक चला है. इससे पहले कि मुस्लिम देशों में पाकिस्तान प्रोपेगेंडा फैलाता और साजिशें रचता, भारत ने अरब देशों को दिल्ली बुला लिया और अच्छे से अपनी बात समझा दी.
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प्रधानमंत्री मोदी के इसी महीने होने वाले संभावित इज़रायल दौरे के बीच भारत-अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक के लिए दिल्ली आए अरब देशों के विदेश मंत्रियों, अरब लीग के महासचिव और अरब प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से पीएम मोदी की मुलाकात हुई है. कहा जा रहा है कि तेल अवीव दौरे से पहले अरब देशों के विदेश मंत्रियों से यह बैठक बड़े कूटनीतिक मायने रखती है. सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी के इज़रायल दौरे के दौरान रक्षा, तकनीक सहित कई बड़े समझौतों और FTA पर भी बातचीत होने की संभावना है.
PM मोदी का मिडिल ईस्ट में गजब गेम!
ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की बैठक में भारत के मिडिल ईस्ट में रोल और गाजा पीस प्लान सहित पीस बोर्ड पर भारत के स्टैंड से अरब देशों को अवगत कराना जरूरी था, जो कर दिया गया. सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी के दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ते रणनीतिक सहयोग को नई गति मिलने वाली है.
अरब देशों के विदेश मंत्रियों के साथ पीएम मोदी की बैठक
वहीं अरब देशों के विदेश मंत्रियों, अरब लीग के महासचिव और अरब प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने भारत और अरब देशों के बीच गहरे और ऐतिहासिक जनसंपर्कों को रेखांकित किया, जो वर्षों से दोनों पक्षों के रिश्तों को प्रेरित और मजबूत करते आ रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने आने वाले वर्षों में भारत-अरब साझेदारी के लिए अपनी दृष्टि प्रस्तुत की और व्यापार व निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य देखभाल तथा अन्य प्राथमिक क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई, ताकि दोनों क्षेत्रों के लोगों को पारस्परिक लाभ मिल सके.
भारत ने फिलिस्तीन की मांग का किया समर्थन!
प्रधानमंत्री ने फिलिस्तीन के लोगों के प्रति भारत के निरंतर समर्थन की पुनः पुष्टि की और चल रहे शांति प्रयासों, विशेषकर गाजा शांति योजना का स्वागत किया. उन्होंने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की दिशा में अरब लीग द्वारा किए गए महत्वपूर्ण प्रयासों की सराहना भी की.
दिल्ली में भारत-अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक!
आपको बता दें कि भारत ने शनिवार को नई दिल्ली में भारत-अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक (IAFMM) की मेजबानी की. इस उच्चस्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने की. बैठक में अरब लीग के सभी 22 सदस्य देशों के विदेश मंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि, साथ ही अरब लीग के महासचिव भी शामिल हुए.
एक दशक बाद हुई बैठक
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह बैठक लगभग एक दशक के अंतराल के बाद आयोजित हुई. पहली भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक वर्ष 2016 में बहरीन में हुई थी. विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक से हमारे मौजूदा सहयोग को और मजबूत करने, साझेदारी का विस्तार करने और इसे और गहरा करने की उम्मीद है.”
2016 में हुई पहली बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने सहयोग के पांच प्राथमिक क्षेत्रों-अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति-की पहचान की थी और इन क्षेत्रों में कई गतिविधियों का प्रस्ताव रखा गया था. अधिकारियों के मुताबिक, मौजूदा बैठक में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करने और इन प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाने के तरीकों पर फोकस किया गया, जो भारत और अरब देशों के बीच बढ़ते राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक जुड़ाव को दर्शाता है.
फिलिस्तीनी विदेश मंत्री का भारत को लेकर बड़ा बयान
इसी बीच दिल्ली पहुंचीं फिलिस्तीन की विदेश एवं प्रवासी मामलों की मंत्री वारसेन अगाबेकियन शाहीन ने सीधा और दो-टूक बयान दिया. विदेश मंत्री जयशंकर से मुलाकात के बाद उन्होंने साफ कहा कि “भारत ही वह महान देश है, जो इज़रायल-फिलिस्तीन युद्ध को रुकवा सकता है. पीएम मोदी की इज़रायल से दोस्ती और अरब देशों से मजबूत रिश्ते उन्हें दुनिया का सबसे बड़ा मध्यस्थ बनाते हैं.” इसके साथ ही फिलिस्तीन ने भारत से गाजा के पुनर्निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने की मांग भी की है.
इजरायल को लेकर भारत ने अपना स्टैंड किया क्लियर!
ऐसे में पीएम मोदी के इज़रायल दौरे और इज़रायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के संभावित दिल्ली दौरे से पहले भारत ने अरब देशों को अपने स्टैंड से स्पष्ट रूप से अवगत करा दिया है. सूत्रों के मुताबिक भारत ने यह भी साफ किया है कि वह ट्रंप के पीस बोर्ड को लेकर कोई सकारात्मक रुख नहीं अपना रहा है और न ही उसमें शामिल होने को आतुर है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि भारत शांति और खुशहाली का पक्षधर नहीं है. भारत लगातार संयुक्त राष्ट्र के मंच से वैश्विक शांति की वकालत करता आया है और उसका मानना है कि युद्ध का समाधान केवल और केवल बातचीत से ही संभव है.
पाकिस्तान का प्लान गाजा फेल!
भारत ने गाजा को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया है कि वह गाजा और फिलिस्तीन में शांति तथा मानवाधिकारों की बहाली से जुड़े हर कदम का समर्थन करता है. भारत विकास सहायता और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के जरिए लगातार इन प्रयासों को सहयोग देता आया है. भारत ने यह भी साफ किया है कि किसी देश के साथ उसके द्विपक्षीय संबंधों का यह अर्थ नहीं है कि वह किसी दूसरे देश के खिलाफ है. उदाहरण के तौर पर, इज़रायल के साथ भारत के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं, लेकिन ईरान और सऊदी अरब जैसे इस्लामी देशों के साथ भी भारत के रिश्ते मजबूत और संतुलित हैं. इतना ही नहीं, बीते हफ्ते भारत ने ईरान के मुद्दे पर पश्चिमी देशों के प्रस्ताव के खिलाफ वोट भी किया था.
पाकिस्तानी प्रोपेगेंडे की निकली हवा!
भारत ने अरब देशों के विदेश मंत्रियों को दिल्ली में होस्ट कर पाकिस्तान के भारत-विरोधी प्रोपेगेंडा की हवा निकाल दी है. इसके साथ ही मुस्लिम उम्मा का अगुवा बनने की पाकिस्तान की कोशिशों पर भी पानी फेर दिया है. इससे पहले यूएई के राष्ट्रपति के भारत दौरे ने भी पाकिस्तान के सऊदी अरब और तुर्की के साथ मिलकर इस्लामिक नाटो बनाने के प्लान को झटका दिया था, क्योंकि उसी दौरान भारत-यूएई रक्षा समझौता हुआ था.
कुल मिलाकर, भारत ने मिडिल ईस्ट को लेकर अपना मास्टरस्ट्रोक चल दिया है. इससे पहले कि पाकिस्तान झूठ और प्रोपेगेंडे का प्रचार-प्रसार करता, भारत ने अरब देशों के विदेश मंत्रियों को दिल्ली बुलाकर अपनी मंशा और रणनीति पूरी तरह स्पष्ट कर दी.
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