फिसड्डी फौज, नक्कारा फील्ड मार्शल… BLA के ताबड़तोड़ हमले, 100 से ज्यादा जवानों की मौत…PAK में आर्मी पर सवाल

BLA के ताबड़तोड़ हमलों ने पाकिस्तान आर्मी की पोल खोलकर रख दी है. उसके सैकड़ों जवान मारे जा चुके हैं. कई महीनों तक चले ऑपरेशन के बावजूद हालात संभल नहीं रहे. इतना ही नहीं, अब लोग कहने लगे हैं कि मुल्क की सुरक्षा उसकी बूते की बात नहीं रही.

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02 Feb 2026
( Updated: 02 Feb 2026
04:52 PM )
फिसड्डी फौज, नक्कारा फील्ड मार्शल… BLA के ताबड़तोड़ हमले, 100 से ज्यादा जवानों की मौत…PAK में आर्मी पर सवाल
बलूच लड़ाकों ने उड़ाई पाक आर्मी की नींद

पाकिस्तान में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पाकिस्तानी सेना और उसके फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की नाक में दम कर दिया है. BLA ने न सिर्फ उसके सैकड़ों सैनिकों को मार गिराया है, बल्कि उसके कई इदारों और कार्यालयों पर भी कब्जा कर लिया है. इसी बीच पाकिस्तान में भारी बहस छिड़ गई है कि उसकी निकम्मी फौज मुल्क को सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है. अब उसकी हैसियत नहीं रही कि वह आम लोगों को सुरक्षा दे सके.

आपको बता दें कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में BLA और पाकिस्तानी सेना के बीच हाल के दिनों में बढ़े हिंसक टकराव ने देश के अंदर ही सेना और सरकार की रणनीति व क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

पाकिस्तान में आर्मी पर उठे सवाल!

पाक सेना और BLA के अपने-अपने दावों के बीच पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार ओसामा बिन जावेद ने तीखा सवाल उठाया है. उन्होंने कहा है कि बलूचिस्तान को लेकर पाक सेना की रणनीति पूरी तरह फेल हो चुकी है. उसका क्रैकडाउन अप्रोच काम नहीं कर रहा. अपने लेख में उन्होंने लिखा कि पाकिस्तानी सेना अकेले बलूचिस्तान के लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकती.

उन्होंने साफ कहा कि बलूचिस्तान की पहाड़ियों में लड़ी जा रही यह लड़ाई सिर्फ हथियारों की नहीं है, बल्कि यह दशकों से चली आ रही नाराजगी, राजनीतिक भेदभाव और आर्थिक अन्याय की कहानी है. उन्होंने एक सूत्र के हवाले से लिखा “एक मिलिट्री किसी मिलिटेंट को खत्म कर सकती है, लेकिन किसी शिकायत को खत्म नहीं कर सकती.”

BLA के हमले से आतंकी भी दहशत में

ये हमला इतने भीषण थे कि पाक आर्मी ही नहीं, आतंकियों में भी डर पैदा कर दिया है. वो भी दहशत में है. लश्कर कमांडर राणा मोहम्मद अशफाक भी इस हमले से हिल गया है. वह अपने एक वीडियो में तिलमिलाते हुआ दिखाई दे रहा है. वह दावा कर रहा है कि यह बलूचिस्तान के इतिहास में BLA विद्रोहियों द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा हमला है. उसने ये भी कहा कि  BLA विद्रोहियों द्वारा किए गए जेल ब्रेक के दौरान कई कैदियों को रिहा कर दिया गया था. राणा मोहम्मद अशफाक ने कहा कि इस बार इन हमलों में जो सबसे खतरनाक बात यह थी कि जनता में इन हमलों का बिल्कुल भी डर देखने को नहीं मिला.

 

 

BLA का ताबड़तोड़ हमला

आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों के भीतर बलूचिस्तान के कई इलाकों में BLA के ताबड़तोड़ और सिलसिलेवार हमलों के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं. एक तरफ पाकिस्तानी सेना दावा कर रही है कि इन झड़पों में करीब 200 लोग मारे गए, जिनमें 31 आम नागरिक, 17 सुरक्षाकर्मी और 145 BLA लड़ाके शामिल हैं. वहीं सेना ने BLA के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें 84 सुरक्षाकर्मियों की मौत की बात कही गई थी. हालांकि BLA अपने दावे पर कायम है और एक के बाद एक सोशल मीडिया पर वीडियो भी जारी कर रहा है.

पाकिस्तानी पत्रकारों का कहना है कि जहां सरकार BLA को सिर्फ एक आतंकी नेटवर्क के तौर पर देखती है, वहीं बलूच समाज के कई लोग इन्हें अपने बेटे और भाई मानते हैं, जिन्होंने हथियार उठा लिए हैं.

पाकिस्तान में BLA का ‘ऑपरेशन हीरोफ’-2

मालूम हो कि बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने बलूचिस्तान के कई इलाकों में ‘ऑपरेशन हीरोफ’ के दूसरे चरण को अंजाम दिया है. पिछले 40 घंटों से जारी इस सैन्य कार्रवाई में BLA ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तानी सेना, पुलिस और फ्रंटियर कोर के 200 से ज्यादा जवानों को मार गिराया है और 17 को बंदी बना लिया है.

जाकारी के मुताबिक खारान, मस्तुंग, दलबंदीन, तुम्प और पसनी में टार्गेट पूरे करने के बाद BLA के लड़ाके अब अपने सुरक्षित ठिकानों पर लौट आए हैं. वहीं कई अन्य इलाकों में ऑपरेशन अब भी सक्रिय रूप से जारी है. इस संघर्ष में BLA के 18 लड़ाके भी मारे गए, जिनमें मजीद ब्रिगेड के 11 फिदायीन शामिल हैं. संगठन ने स्थानीय बलूच नागरिकों से दुश्मन से दूरी बनाए रखने और सक्रिय इलाकों में लड़ाकों की सहायता जारी रखने की अपील की है.

BLA के अटैक को बलूच अवाम का समर्थन

यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तानी सेना के खिलाफ BLA के किसी ऑपरेशन को बलूच जनता और नेताओं का समर्थन मिला हो. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि बलूच अवाम भारी पैमाने पर BLA के लड़ाकों को खाना खिला रही है और पानी पिला रही है.

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ BLA द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन हीरोफ 2.0’ को विभिन्न सशस्त्र संगठनों, राजनीतिक हस्तियों और बलूच आबादी के कुछ वर्गों का समर्थन मिलने का दावा किया गया है. BLA का कहना है कि समन्वित हमले शुरू किए जाने के 30 घंटे से अधिक समय बाद भी उसके लड़ाके कई जिलों में अपनी स्थिति बनाए हुए हैं.

बीते दिनों BLA के प्रवक्ता जीयंद बलूच ने कहा कि “विभिन्न शहरों और अहम इलाकों” में अभियान जारी है और पाकिस्तानी सुरक्षा बल “भारी दबाव” में हैं. उन्होंने दावा किया कि BLA के लड़ाके कई स्थानों पर “नियंत्रण बनाए हुए हैं” और जमीनी हालात लगातार बदल रहे हैं. बयान में कहा गया,“अभियान की प्रगति के अनुसार विस्तृत जानकारी और अंतिम आकलन उचित समय पर जारी किया जाएगा.”

इससे पहले BLA ने दावा किया था कि इस अभियान के क्रियान्वयन में “बलूच राष्ट्र की भूमिका निर्णायक” रही है. संगठन के अनुसार, स्थानीय लोगों ने आवाजाही, संचार और जमीनी नियंत्रण सुनिश्चित कर सहयोग प्रदान किया. यह जानकारी ‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ की रिपोर्ट में दी गई है.

BLA ने क्या कहा?

BLA का कहना है कि जनसमर्थन से “दुश्मन का प्रचार और भय निष्प्रभावी” हुआ है, जिससे विभिन्न जिलों में सैन्य ठिकानों पर दबाव बनाए रखना संभव हो सका. संगठन ने कहा कि यह जनएकता अभियान के जारी रहने और नियंत्रण बनाए रखने का एक बुनियादी कारण रही है.

‘ऑपरेशन हीरोफ 2.0’ को यूनाइटेड बलूच आर्मी (UBA) का भी समर्थन मिला है, जो खुद को “स्वतंत्रता समर्थक” सशस्त्र संगठन बताती है. UBA ने औपचारिक रूप से अभियान के समर्थन की घोषणा करते हुए कहा कि वह अपनी “क्षमता और साधनों” के अनुसार इसमें भाग लेगी.

UBA के प्रवक्ता मजार बलूच ने बयान में कहा कि संगठन अभियान में शामिल लोगों को “पूर्ण नैतिक, वैचारिक और व्यावहारिक समर्थन” दे रहा है. उन्होंने बलूच लड़ाकों के “साहस, दृढ़ता और राष्ट्रीय सम्मान” की प्रशंसा करते हुए कहा कि UBA उनके साथ “पूर्ण एकजुटता” में खड़ी है. UBA ने सभी बलूच संगठनों और कार्यकर्ताओं से “एकता, साझा रणनीति और सामूहिक जिम्मेदारी” दिखाने की अपील की. संगठन ने कहा कि मौजूदा टकराव किसी एक समूह या वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह “राष्ट्रीय गरिमा, स्वतंत्रता और बलूच भूमि पर संप्रभुता” के लिए व्यापक संघर्ष है.

संगठन ने आम जनता से भी आग्रह किया कि जहां कहीं बलूच युवा और राष्ट्रीय कार्यकर्ता मौजूद हों, वहां उन्हें सामाजिक सहयोग और समर्थन दिया जाए, ताकि इस आंदोलन को “संगठित, एकजुट और मजबूत सामूहिक आंदोलन” में बदला जा सके.

बलूच लड़ाकों को अंदर और बाहर, दोनों जगह से समर्थन

इस बीच निर्वासन में रह रहे बलूच नेता मेहरान मर्री ने भी ‘ऑपरेशन हीरोफ 2.0’ के समर्थन की घोषणा की है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बातचीत में मर्री ने कहा कि बलूचिस्तान “एक अत्यंत निर्णायक दौर” में प्रवेश कर चुका है.

उन्होंने कहा कि बलूच लोगों ने दशकों तक अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की, लेकिन अब उनका मानना है कि “स्वतंत्रता किसी बाहरी शक्ति की ओर से उपहार के रूप में नहीं मिलेगी.”

मर्री ने कहा, “बलूच न तो ट्रंप का इंतजार कर रहे हैं और न ही किसी वैश्विक शक्ति पर निर्भर हैं.” उन्होंने दावा किया कि यह आंदोलन अब “राष्ट्रीय मुक्ति संघर्ष” में बदल चुका है, जिसमें “बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक” की भागीदारी है.

'बलूच को ट्रंप की भी मदद की नहीं जरूरत'

उन्होंने पाकिस्तान को “अस्थिर राष्ट्र” बताते हुए कहा कि वह चीन और अमेरिका के प्रभाव के बीच झूल रहा है, जबकि बलूच लोग “मैदान में डटे रहकर अपनी जमीन की रक्षा कर रहे हैं.” मर्री ने कहा कि बलूच समुदाय अपने अधिकार “किसी के सहारे नहीं, बल्कि अपने संघर्ष और बलिदान से” हासिल करेगा.

‘ऑपरेशन हीरोफ 2.0’ की शुरुआत के दौरान BLA ने अपने कमांडर-इन-चीफ बशीर ज़ेब बलूच का एक वीडियो संदेश भी जारी किया था, जिसमें उन्होंने लोगों से अपने घरों से बाहर निकलकर सशस्त्र आंदोलन के इस निर्णायक चरण में शामिल होने की अपील की थी.

उन्होंने कहा कि “यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना का है. जब कोई राष्ट्र एकजुट होता है, तो उसकी शक्ति के बावजूद दुश्मन पराजय से नहीं बच सकता. बलूच राष्ट्र से आग्रह है कि वह बाहर आए और ऑपरेशन हीरोफ का हिस्सा बने.”

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