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बांग्लादेश में नहीं थम रहा हिंदुओं पर अत्याचार, कट्टरपंथियों ने हिंदू कारोबारी खोकन दास को जलाया जिंदा, हुई मौत

बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले माहौल हिंसक बना हुआ है. अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर लगातार हमले हो रहे हैं. शरीयतपुर जिले में हिंदू व्यवसायी खोकन चंद्र दास पर भीड़ ने धारदार हथियारों से हमला कर पेट्रोल डालकर आग लगा दी.

बांग्लादेश में नहीं थम रहा हिंदुओं पर अत्याचार, कट्टरपंथियों ने हिंदू कारोबारी खोकन दास को जलाया जिंदा, हुई मौत
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बांग्लादेश में आगामी आम चुनाव से पहले देश का माहौल लगातार तनावपूर्ण और हिंसक होता जा रहा है. सांप्रदायिक घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. खासतौर पर अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हो रहे हमलों ने न सिर्फ देश के भीतर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है. हालिया घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या चुनावी माहौल में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा पा रही है.

ताजा मामला शरीयतपुर जिले के दामुड्या इलाके का है, जहां एक हिंदू व्यवसायी खोकन चंद्र दास की बर्बर हमले के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई. खोकन चंद्र दास दवा और मोबाइल बैंकिंग की एक छोटी सी दुकान चलाते थे. वह एक सामान्य जीवन जीने वाले व्यक्ति थे, जिनकी किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं बताई जा रही है. नए साल की पूर्व संध्या 31 दिसंबर की रात, जब वह दुकान बंद कर ऑटो-रिक्शा से घर लौट रहे थे, तभी केउरभांगा बाजार के पास दंगाइयों की एक भीड़ ने उन्हें रोक लिया.

धारदार हथियारों से किया गया हमला 

प्रत्यक्षदर्शियों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमलावरों ने पहले खोकन चंद्र दास पर धारदार हथियारों से हमला किया. इसके बाद उन पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई. जान बचाने के लिए खोकन पास के एक तालाब में कूद गए, लेकिन तब तक वह गंभीर रूप से झुलस चुके थे. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद उनकी मौत हो गई.

व्यवसायी की पत्नी ने बताया कैसे हुई घना 

इस दर्दनाक घटना के बाद खोकन की पत्नी सीमा दास का बयान सामने आया है, जिसने पूरे मामले को और भी भावुक बना दिया है. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनके पति एक साधारण और मेहनती इंसान थे. किसी से कोई झगड़ा या दुश्मनी नहीं थी. वह समझ नहीं पा रही हैं कि इतनी बेरहमी से उन्हें क्यों मारा गया. सीमा दास का कहना है कि उनके पति ने हमलावरों को पहचान लिया था, इसी वजह से उन्हें जिंदा जलाने की कोशिश की गई. परिवार अब सिर्फ इंसाफ की मांग कर रहा है. 

कई घटनाओं का शिकार हो चुके हैं हिंदू 

यह घटना कोई अकेला मामला नहीं है. बीते कुछ हफ्तों में हिंदुओं पर हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं. 24 दिसंबर को 29 वर्षीय अमृत मंडल की कथित तौर पर भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. इससे पहले 18 दिसंबर को मयमनसिंह में 25 वर्षीय दीपु चंद्र दास को झूठे ईशनिंदा आरोप में फैक्ट्री के भीतर मार दिया गया. बाद में उसके शव को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई. पिछले दो हफ्तों में यह हिंदुओं पर हमले की चौथी बड़ी घटना बताई जा रही है. बता दें कि इस घटना के बाद गौर करने वाली बात यह है कि बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव होने हैं. चुनावों की घोषणा के बाद से ही देश के विभिन्न हिस्सों में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं बढ़ी हैं. मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि चुनाव से पहले कट्टरपंथी ताकतें जानबूझकर डर और ध्रुवीकरण का माहौल बना रही हैं, ताकि राजनीतिक लाभ उठाया जा सके.

कई घटनाओं पर अंतरिम सरकार ने झाड़ा पल्ला 

मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने इन घटनाओं की निंदा तो की है, लेकिन कई मामलों में यह कहकर पल्ला झाड़ लिया गया कि हिंसा के पीछे सांप्रदायिक नहीं, बल्कि आपराधिक या वसूली से जुड़े कारण थे. पीड़ित परिवारों और मानवाधिकार संगठनों ने इन दलीलों पर सवाल उठाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है.

भारत ने दी प्रतिक्रिया 

भारत ने इन घटनाओं पर कड़ी चिंता जताते हुए इसे बेहद गंभीर बताया है. वहीं अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी हिंदू युवक की हत्या को भयावह करार देते हुए बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है. स्थानीय पुलिस ने इस मामले में दो युवकों के खिलाफ केस दर्ज किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं.

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फिलहाल बांग्लादेश एक नाजुक दौर से गुजर रहा है. चुनावी माहौल में बढ़ती हिंसा ने लोकतंत्र और मानवाधिकारों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार इन घटनाओं पर कितनी सख्ती से कार्रवाई करती है और क्या अल्पसंख्यक समुदाय को सुरक्षित माहौल मिल पाता है या नहीं.

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