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राफेल से न्यूक्लियर एनर्जी तक... PM मोदी-मैक्रों की बैठक में हुए बड़े समझौते, भारत-फ्रांस का व्यापार होगा दोगुना

नीस में हुई बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने व्यापार, रक्षा, परमाणु ऊर्जा, तकनीक और अंतरिक्ष समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई. दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य भी तय किया.

Image Source: X/ @narendramodi
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भारत और फ्रांस के रिश्ते एक बार फिर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं. दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा स्तर से दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है. इसके साथ ही रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी है. यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच फ्रांस के खूबसूरत शहर नीस में हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान लिया गया.

दरअसल, यह बैठक केवल एक औपचारिक कूटनीतिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए भारत-फ्रांस साझेदारी की नई दिशा तय करने वाली बातचीत भी साबित हुई. दोनों नेताओं ने कई ऐसे विषयों पर चर्चा की, जिनका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी दिखाई दे सकता है.

भारत इनोवेट्स 2026 से नवाचार को मिला मंच

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द्विपक्षीय वार्ता से पहले प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने संयुक्त रूप से ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम का उद्घाटन किया. इस पहल का उद्देश्य भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स को वैश्विक निवेशकों और तकनीकी साझेदारों से जोड़ना है. इसको लेकर जानकारों का मानना है कि भारत तेजी से नवाचार और तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है. ऐसे में इस तरह के कार्यक्रम भारतीय स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान मजबूत करने का अवसर देंगे.

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PM मोदी ने दिया बड़ा संदेश 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि 'आज मेरे मित्र राष्ट्रपति मैक्रों के साथ हुई बैठकें बहुत ही सफल रहीं. हमारे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही दोस्ती को देखते हुए, हमने अपने संबंधों को 'असाधारण व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक ले जाने का फैसला किया है. हमारी बातचीत मुख्य रूप से रक्षा, तकनीक, अंतरिक्ष, सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी प्रयासों और इनोवेशन जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर केंद्रित रही.'

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व्यापार को दोगुना करने की तैयारी

बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य रहा. वर्तमान में भारत और फ्रांस के बीच व्यापार लगभग 16 अरब डॉलर के आसपास है. अब इसे अगले पांच वर्षों में दोगुना करने की योजना बनाई गई है. विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक उच्चस्तरीय तंत्र विकसित किया जाएगा. साथ ही आर्थिक सुरक्षा संवाद शुरू करने और ‘इनोवेशन रोडमैप 2030’ को लागू करने पर भी सहमति बनी है. फ्रांस, यूरोपीय संघ में भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है. बीते वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं और अब इस सहयोग को नई गति देने की तैयारी की जा रही है.

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रक्षा क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही मजबूत रहा है. इस बैठक में भी रक्षा क्षेत्र प्रमुख एजेंडा रहा. खासतौर पर राफेल लड़ाकू विमान परियोजना को लेकर दोनों पक्षों के बीच विस्तृत चर्चा हुई. भारत की बहुचर्चित एमआरएफए परियोजना के तहत बड़ी संख्या में आधुनिक लड़ाकू विमानों की खरीद पर विचार जारी है. सरकार का फोकस केवल खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्वदेशी निर्माण क्षमता को बढ़ाना भी है. इसके साथ ही पीएम मोदी ने सह-विकास, सह-डिजाइन और सह-उत्पादन की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि भारत भविष्य की रक्षा तकनीकों में साझेदारी आधारित मॉडल को प्राथमिकता देना चाहता है. इससे भारतीय उद्योगों और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा.

परमाणु ऊर्जा में खुलेंगे नए अवसर

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बैठक में नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र पर भी विशेष ध्यान दिया गया. दोनों देशों ने माना कि स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं. महाराष्ट्र की जैतापुर परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर भारत और फ्रांस के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है. इसके अलावा छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर और उन्नत मॉड्यूलर रिएक्टर तकनीक पर भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक संकेत मिले हैं. ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में परमाणु ऊर्जा भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

तकनीक, AI और अंतरिक्ष पर भी बनी सहमति

बैठक के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के वैश्विक नियमन को लेकर संयुक्त कार्य समूह बनाने का फैसला लिया गया. इसके अलावा यूपीआई भुगतान प्रणाली के विस्तार, हाई-स्पीड रेलवे सहयोग, एरोनॉटिक्स प्रशिक्षण और नवाचार क्षेत्र से जुड़े कई समझौतों पर भी हस्ताक्षर हुए. अंतरिक्ष क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने का संकल्प दोहराया. मानव अंतरिक्ष उड़ान और अंतरिक्ष निगरानी जैसे क्षेत्रों में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया.

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वैश्विक चुनौतियों पर साझा सोच

भारत और फ्रांस की बातचीत केवल द्विपक्षीय मुद्दों तक सीमित नहीं रही. पश्चिम एशिया की स्थिति, रूस-यूक्रेन संघर्ष और वैश्विक सुरक्षा जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज की दुनिया में साझेदारी और सहयोग पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है. उन्होंने जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने को लेकर उत्साह जताते हुए वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भारत की सक्रिय भूमिका दोहराई.

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बहरहाल, नीस में हुई यह मुलाकात भारत और फ्रांस के रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है. व्यापार, रक्षा, तकनीक और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में हुए फैसले आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूत बना सकते हैं.

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