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ईरान से शांति समझौते के बाद ट्रंप का यू-टर्न? बोले- प्रतिबंधों में नहीं मिलेगी ढील, अब सब कुछ तेहरान पर निर्भर
ईरान के साथ शांति समझौते के ऐलान के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि तेहरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं दी जाएगी. दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं, जिससे तनाव पूरी तरह खत्म होता नहीं दिख रहा.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रवैये ने कई बार दुनिया के सामने बड़े-बड़े संकट खड़े किए हैं. इसी कड़ी में एक बार फिर ईरान को लेकर उनके सुर बदलते नजर आ रहे हैं. दरअसल, एक दिन पहले ही ट्रंप ने ईरान के साथ ऐतिहासिक शांति समझौते का ऐलान किया था. साथ ही यह जानकारी भी सामने आई थी कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते पर 19 जून को हस्ताक्षर किए जाएंगे. इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि ईरान के खिलाफ लागू आर्थिक प्रतिबंधों में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समझौते का मतलब यह नहीं है कि तेहरान को आर्थिक छूट मिल जाएगी. दूसरी ओर, कई महत्वपूर्ण मामलों पर दोनों देशों के रुख में अब भी बड़ा अंतर है, जिसके कारण आपसी अविश्वास और तनाव बना हुआ है
दरअसल, G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए फ्रांस के एवियान पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत के दौरान ईरान को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि आगे की स्थिति पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान समझौते की शर्तों और अपनी प्रतिबद्धताओं का कितना पालन करता है. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उनका प्रस्तावित समझौता पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए परमाणु समझौते से अलग और अधिक प्रभावी है.
ट्रंप ने स्पष्ट किया अपना रूख
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पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित समझौते में ईरान के लिए किसी प्रकार की प्रतिबंध राहत का प्रावधान नहीं रखा गया है. उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी तरह की रियायत इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान अपने दायित्वों और शर्तों का कितना पालन करता है. ट्रंप के अनुसार, यदि तेहरान अपेक्षित कदम उठाता है, तभी आगे की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है. इस दौरान ट्रंप ने 2015 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए परमाणु समझौते की आलोचना भी की. उन्होंने दावा किया कि वर्तमान समझौते का मसौदा पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और प्रभावी है. ट्रंप ने कहा कि वह इस दस्तावेज को सार्वजनिक करना चाहते हैं ताकि लोग इसकी शर्तों को स्वयं देख सकें. साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि जेनेवा में उनकी ओर से अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे.
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अमेरिका और ईरान के बीच हुए इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर
इसी बीच मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम को लेकर तैयार किए गए समझौते को डिजिटल माध्यम से मंजूरी दी जा चुकी है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि सहमति पत्र (MoU) पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष एवं प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बाघर गालिबाफ ने इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर किए हैं. हालांकि, इस दावे को लेकर ईरानी सरकार या उसके किसी आधिकारिक प्रतिनिधि की तरफ से अब तक कोई औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है.
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बताते चलें कि युद्धविराम और शांति समझौते की खबर सामने आते ही वैश्विक वित्तीय बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दामों में गिरावट दर्ज की गई, जिसे लेकर राष्ट्रपति ट्रंप ने भी संतोष व्यक्त किया. संघर्ष समाप्त होने की उम्मीदों के बीच दुनिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी निवेशकों का भरोसा लौटा और कारोबार में तेजी देखने को मिली. वहीं वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को शुक्रवार से पूरी तरह खोलने की तैयारी की जा रही है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि समझौते से जुड़ी सभी प्रमुख शर्तों और प्रावधानों को अगले 24 से 48 घंटों के भीतर सार्वजनिक कर दिया जाएगा, जिससे इस ऐतिहासिक डील की पूरी तस्वीर दुनिया के सामने आ सकेगी.