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पाकिस्तान में खुद गई CPEC की कब्र, BLA के हमलों से खौफ में चीन, डूब गया पूरा पैसा, बोरिया बिस्तर समेटने की तैयारी

भारत के सामने ड्रैगन की दादागिरी नहीं चली. अरब सागर तक पहुंचने का ख्वाब देखने वाला चीन अब BLA-TTP के हमलों से दहशत में है और CPEC फेल होने के बाद अब पाकिस्तान से बोरिया बिस्तर समेटने की तैयारी है!

शहबाज शरीफ, शी जिनपिंग (फाइल फोटो)

पाकिस्तान में लगातार गहराती राजनीतिक और सुरक्षा अस्थिरता चीन के बहुचर्चित चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपेक) के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि चीनी अधिकारी इस्लामाबाद तक सुरक्षित रूप से यात्रा नहीं कर पाते हैं, तो चीन को पाकिस्तान के साथ अपने जुड़ाव के दायरे पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है. फिलहाल इस्लामाबाद के सामने खड़ी हर नई चुनौती सीपेक की प्रगति के लिए खतरा बनती जा रही है और क्षेत्र में बीजिंग के अरबों डॉलर के निवेश को कमजोर कर रही है.

पाकिस्तान से बोरिया बिस्तर समेटने की तैयारी में चीन

कहा जा रहा है कि अगर पाकिस्तान अगर फौरन चीनी नागरिकों और इंजीनियर्स की सुरक्षा तुरंत सुनिश्चित नहीं करता है तो चीन अपने इस अरबों डॉलर के प्रोजेक्ट और पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों पर पुनर्विचार कर सकता है. लागातार हमलों ने सीपेक ही नहीं पाकिस्तान और चीन, दोनों के आर्थिक और सामरिक मंसूबे की कब्र खोद दी है.

CPEC डूबने की कगार पर

इटली के इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल पॉलिटिकल स्टडीज (आईएसपीआई) की रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान पर अपनी पकड़ मजबूत करने तथा पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी सीमाओं पर आर्थिक रूप से समृद्ध और स्थिर क्षेत्र बनाने की चीन की महत्वाकांक्षाएं हालिया घटनाक्रमों के चलते कठिन होती नजर आ रही हैं.

रिपोर्ट के मुताब जमीनी हालात बद से बदतर हो रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक चीन भारी दहशत में नजर आ रहा है. चीन को अपने प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करने के लिए भी पाकिस्तान जाने में डर लग रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 के अंत में ग्वादर हवाई अड्डे का उद्घाटन ऑनलाइन करना पड़ा था क्योंकि चीनी वरिष्ठ अधिकारियों की सुरक्षा की गारंटी नहीं थी. बलूचिस्तान में ‘बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी’ (BLA) के हमलों ने सीपेक की कमर तोड़ दी है. ग्वादर बंदरगाह, जो चीन के लिए अरब सागर का दरवाजा है, वहां काम करना अब जान जोखिम में डालने जैसा है.

BLA और TTP के हमलों ने पाक की नाक में किया दम

रिपोर्ट में याद दिलाया गया कि अक्टूबर 2025 में पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था, जब दोनों देशों की साझा सीमा पर घातक मिसाइल हमले हुए. सितंबर 2021 में काबुल में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से ही पाकिस्तान और अफगान तालिबान के रिश्तों में लगातार गिरावट देखी जा रही है.

रिपोर्ट के मुताबिक, “करीब एक दशक पहले इस्लामाबाद पर 62 अरब डॉलर का दांव लगाने के बाद बीजिंग अब क्षेत्र में स्थिरता को लेकर बेहद चिंतित है. घरेलू उग्रवाद में बढ़ोतरी और शत्रुतापूर्ण पड़ोस के बीच पाकिस्तान की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं, जो चीन के लिए चिंता का विषय है.”

बीजिंग का मंसूबा फेल

सीपेक के तहत चीन ने पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर आर्थिक निवेश बढ़ाया है. बीजिंग के लिए सीपेक का मुख्य उद्देश्य बुनियादी ढांचे के नेटवर्क के माध्यम से अरब सागर तक सीधी पहुंच सुनिश्चित करना है, जिसका केंद्र बलूचिस्तान प्रांत का ग्वादर बंदरगाह है. हालांकि रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि पाकिस्तान में जारी आंतरिक अशांति चीन को अपने निवेश से अपेक्षित लाभ हासिल करने से रोक रही है. इससे कई सीपेक परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं और अनेक मोर्चों पर प्रगति ठप हो गई है.

ग्वादर पोर्ट का काम भी फेल

बलूचिस्तान में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लगातार हमलों ने सीपेक की प्रमुख परियोजनाओं, खासकर ग्वादर बंदरगाह के विकास में गंभीर बाधाएं खड़ी की हैं. सुरक्षा हालात इतने खराब हो गए कि 2024 के उत्तरार्ध में सीपेक से वित्तपोषित ग्वादर हवाई अड्डे का उद्घाटन वरिष्ठ अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर खतरे के कारण ऑनलाइन करना पड़ा.

इसके अलावा, पाकिस्तान को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से भी गंभीर सुरक्षा चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, टीटीपी ने खैबर पख्तूनख्वा में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और चीनी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लगातार निशाना बनाया है. पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने बलोचों के हमले के बाद 40 घंटे की जवाबी कार्रवाई में अब तक 200 की मौत हुई है. इनमें 31 नागरिक, 17 सुरक्षाकर्मी और बीएलए के 145 लड़ाके शामिल हैं. 

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