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बलूचिस्तान की चीख यूरोप तक पहुंची! EU की फटकार से हिल गया पाकिस्तान, बंद होगी मुफ्त की कमाई!
Pakistan: यूरोपीय संघ (EU) ने अपनी नई GSP+ मूल्यांकन रिपोर्ट में पाकिस्तान की मानवाधिकार स्थिति, कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर गंभीर चिंता जताई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर पाकिस्तान ने हालात सुधारने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो उसे मिलने वाली बड़ी व्यापारिक रियायतें बंद की जा सकती हैं.
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Pakistan: पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचनाओ के घेरे में आ गया है. इस बार यूरोपीय संघ (EU) ने अपनी नई GSP+ मूल्यांकन रिपोर्ट में पाकिस्तान की मानवाधिकार स्थिति, कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर गंभीर चिंता जताई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर पाकिस्तान ने हालात सुधारने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो उसे मिलने वाली बड़ी व्यापारिक रियायतें बंद की जा सकती हैं. यह चेतावनी पाकिस्तान के लिए इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है और यूरोपीय बाजार में मिलने वाली यह सुविधा उसके निर्यात के लिए काफी महत्वपूर्ण है..
क्या है GSP+ और पाकिस्तान के लिए यह क्यों है इतना जरूरी?
GSP+ यानी (Generalized Scheme of Preferences Plus) यूरोपीय संघ की एक विशेष व्यापार योजना है. इसके तहत कुछ विकासशील देशों को यूरोपीय बाजार में अपना सामान कम या बिना आयात शुल्क के बेचने की सुविधा मिलती है. इसका मकसद इन देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और व्यापार को बढ़ावा देना होता है. पाकिस्तान को यह सुविधा साल 2014 से मिल रही है और इसका सबसे बड़ा फायदा वहां के कपड़ा और चमड़ा उद्योग को मिला है. रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ वर्ष 2024 में ही पाकिस्तान को इस योजना के तहत करीब 73.2 करोड़ यूरो की टैक्स छूट मिली. यही वजह है कि यह योजना पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम मानी जाती है.
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रिपोर्ट में किन मुद्दों पर जताई गई चिंता?
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यूरोपीय संघ का कहना है कि व्यापारिक रियायतों के साथ यह भी जरूरी है कि संबंधित देश मानवाधिकारों, लोकतंत्र और कानून के शासन का सम्मान करे. लेकिन रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान इन मामलों में अपेक्षित सुधार नहीं कर पाया है. रिपोर्ट में बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे इलाकों में कथित जबरन गुमशुदगी और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर चिंता जताई गई है. इसके अलावा पत्रकारों की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और असहमति रखने वाले लोगों पर कार्रवाई जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईशनिंदा कानून और कुछ साइबर कानूनों के दुरुपयोग को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं.
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महिलाओं, अल्पसंख्यकों और बच्चों के अधिकारों पर भी सवाल
यूरोपीय संघ की रिपोर्ट में महिलाओं और धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को भी बड़ा मुद्दा बताया गया है. रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी नागरिकों को समान अधिकार और सुरक्षा मिले. साथ ही बाल मजदूरी को पूरी तरह खत्म करने, न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है. यूरोपीय संघ का कहना है कि केवल वादे करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इन क्षेत्रों में जमीन पर बदलाव दिखाई देना चाहिए.
2027 तक सुधार नहीं हुए तो खत्म हो सकती है व्यापारिक छूट
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यूरोपीय संघ ने साफ संकेत दिया है कि पाकिस्तान के पास सुधार के लिए सीमित समय है... अगर वर्ष 2027 तक मानवाधिकार, कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक सुधारों के मामले में ठोस प्रगति नहीं दिखाई देती, तो GSP+ योजना के तहत मिलने वाली व्यापारिक सुविधाएं वापस ली जा सकती हैं. इसका मतलब होगा कि पाकिस्तान से यूरोप जाने वाले सामान पर फिर से भारी आयात शुल्क लग सकता है, जिससे वहां के निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा कम हो जाएगी..
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है बड़ा असर
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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान GSP का दर्जा खो देता है, तो इसका सबसे बड़ा असर उसके टेक्सटाइल और चमड़ा उद्योग पर पड़ेगा. यूरोप पाकिस्तान के सबसे बड़े निर्यात बाजारों में से एक है. अगर व्यापारिक छूट खत्म हो जाती है तो वहां के उत्पाद महंगे हो जाएंगे, जिससे उनकी मांग घट सकती है. इसका असर उद्योगों, रोजगार और विदेशी मुद्रा आय पर भी पड़ सकता है. ऐसे में पाकिस्तान के लिए आने वाले कुछ साल बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि उसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अपेक्षाओं के अनुरूप सुधार करके अपने व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखना होगा..