वेनेजुएला के पास कुदरत का अकूत खजाना, ट्रंप की नीयत हुई खराब! मादुरो की गिरफ्तारी के पीछे US की कौनसी चाल?
वेनेजुएला पर ट्रंप के हमले के बाद वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मच गया. हमले का मकसद अपराध है या वो खजाना जो वेनेजुएला की धरती के नीचे छिपा है.
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America Venezuela Tension: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला देर रात हवाई हमलों से दहल गया. अमेरिका ने वेनेजुएला के 4 शहरों को निशाना बनाते हुए जोरदार हवाई हमला किया. अमेरिकी मिलिट्री ने खासतौर पर सैन्य ठिकानों को टारगेट किया है. वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने का दावा किया है. जिसके बाद वेनेजुएला में इमरजेंसी लागू हो गई, लेकिन सवाल ये है कि इस हमले के पीछे अमेरिका की असली मंशा क्या है? हमले का मकसद अपराध है या वो खजाना जो वेनेजुएला की धरती के नीचे छिपा है.
डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का दावा है कि वेनेजुएला ने अमेरिकी कंपनियों के तेल अधिकार अवैध रूप से छीन लिए थे. इस हमले के बाद ट्रंप ने वैश्विक तेल बाजार में भी हड़कंप मचा दिया. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ट्रंप की नजर वेनेजुएला के तेल खजाने पर है.
वेनेजुएला के पास कितना तेल भंडार
रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला के पास करीब 303 अरब बैरल कच्चा तेल है. जो कि दुनिया के कुल भंडार का लगभग 18% है. वेनेजुएला के बाद तेल भंडार के मामले में सऊदी अरब 267.2 बिलियन बैरल के साथ दूसरे नंबर पर है. जबकि तीसरे पायदान पर 55 बिलियन बैरल तेल के साथ अमेरिका है. यानी अमेरिका के पास वेनेजुएला के मुकाबले 5 गुना कम तेल है. इसके बावजूद आर्थिक और सैन्य मोर्चे पर अमेरिका वेनेजुएला से कई ज्यादा आगे और शक्तिशाली है.
वेनेजुएला कहां खा गया मात?
अब सवाल उठता है कि जब वेनेजुएला के पास तेल का विशाल भंडार है तो वह गरीब और पिछड़ा देश क्यों है. दरअसल, इसकी वजह भी तेल और तकनीक ही है. क्योंकि यहां का तेल हैवी क्रूड ऑयल (Heavy Crude Oil) है. जो शहद की तरह गाढ़ा और चिपचिपा होता है.
इसे जमीन से निकालने की प्रक्रिया न केवल मुश्किल है साथ ही बेहद खर्चीली भी है. फिर इसे रिफाइन करने के लिए भी हाई लेवल तकनीक की जरूरत है और जैसे तैसे वेनेजुएला ये कर भी ले तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत भी कम मिलेगी. क्योंकि इस तेल में भारी मात्रा में सल्फर मिक्स होता है. ऐसे में वेनेजुएला तो यह सब करेगा नहीं, लेकिन अमेरिका इस प्रोसेस को आसानी से अंजाम दे सकता है. क्योंकि हैवी क्रूड को कैसे रिफाइन करना है, ये तकनीक वह भलिभांति जानता है. क्योंकि उसके पास हाई लेवल तकनीक है.
वेनेजुएला के लिए तेल सम्पदा कितनी मुनाफाभरी है इसका अंदाजा कुछ आंकड़ों से लगाया जा सकता है. साल 2023 के आंकड़े बताते हैं कि सऊदी अरब ने तेल बेचकर 181 अरब डॉलर कमाए, लेकिन वेनेजुएला महज 4.05 अरब डॉलर तक ही रह गया. वहीं, अमेरिका ने भी 125 अरब डॉलर का तेल निर्यात कर दिया. जबकि उसके पास इन दोनों से कम तेल है. तेल निर्यात में अमेरिका को नंबर वन पर रहना है. रिपोर्ट्स में दावा है कि अमेरिका की गल्फ कोस्ट रिफाइनरियां खास तौर पर हैवी क्रूड के लिए बनी हैं. अमेरिका को हल्के नहीं हैवी क्रूड की जरूरत महसूस हो रही है. पहले तो ये जरूरतें वह वेनेजुएला से पूरी करता था, लेकिन अब कनाडा और मेक्सिको से महंगा हैवी ऑयल लेना पड़ता है.
क्या तख्तापलट के बाद वाशिंगटन के हाथ में होगी चाबी?
अमेरिका का मकसद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का तख्तापलट करना है. उसका मानना है कि मादुरो तानाशाह और ड्रग तस्कर हैं, लेकिन इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता ट्रंप की निगाहें वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर टिकी हैं. वेनेजुएला में तख्तापलट के बाद यहां के तेल कुओं की चाबी
वाशिंगटन के हाथों में आने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है. वेनेजुएला पर हमले कर ट्रंप ने न केवल अपराध पर चोट की है बल्कि उसे आर्थिक मोर्चे पर भी कमजोर करने की कोशिश की है. वेनेजुएला के पास संसाधन है लेकिन ट्रंप कार्ड केवल ट्रंप के पास है. जिससे वह अपनी नीति को धार दे रहे हैं.
भारतीय समय के अनुसार अमेरिका ने बीती रात 2 बजे वेनेजुएला पर भीषण हमला किया. राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि वेनेजुएला अमेरिका में ड्रग तस्करी को अंजाम देता था. वह मादुरो को बड़ा ड्रग तस्कर मानते हैं. एयरस्ट्राइक के बाद ट्रंप ने मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया एडेलो को हिरासत में लेने का दावा किया.
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