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हिजाब पगड़ी की परमिशन, बिंदी-तिलक पर फरमान… लेंसकार्ट की ‘स्टाइल गाइड’ पर बवाल के बाद घुटनों पर आए CEO!

लेंसकार्ट के कथित स्टाइल गाइड पर बवाल मचा हुआ है. अब CEO पीयूष बंसल ने इस पूरे मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए सफाई दी है.

Image Source- X/@peyushbansal/Grok
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Lenskart Controversy: लेंस और चश्मे के फ्रेम बनाने वाली दिग्गज कंपनी लेंसकार्ट (Lenskart) उस वक्त विवादों में आ गई जब उसने अपने ही कर्मचारियों को धर्म के चश्ने से देखना शुरू कर दिया. आरोप है कि लेंसकार्ट ने अपने यहां कर्मचारियों को पगड़ी और हिजाब पहनने की इजाजत तो दी, लेकिन बिंदी-तिलक पर रोक लगा दी. लेंसकार्ट का ये स्टाइल कोड सामने आया तो जाहिर है विवाद खड़ा होना ही था. 

दरअसल, फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने लेंसकार्ट की कर्मचारी गाइडलाइन का एक लेटर साझा किया था. इस गाइड में लिखा था, कर्मचारी तिलक, बिंदी और सिंदूर नहीं लगा सकते. जबकि कुछ शर्तों के साथ पगड़ी और हिजाब पहनने की अनुमति है. इस लेटर के साथ अशोक पंडित ने कंपनी की इस कथित पॉलिसी को कॉर्पोरेट जिहाद करार दिया. उन्होंने लोगों से लेंसकार्ट को बायकॉट करने की मांग की. 

Lenskart के CEO पीयूष बंसल ने क्या कहा? 

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विवाद बढ़ने के बाद लेंसकार्ट के CEO पीयूष बंसल (Peyush Bansal) ने सफाई दी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लंबा चौड़ा पोस्ट करते हुए लिखा, यह कंपनी की मौजूदा HR पॉलिसी नहीं है. हालांकि उन्होंने यह माना कि यह ट्रेनिंग के दौरान का पुराना दस्तावेज है. बिंदी-तिलक को लेकर गलत बातें लिखी गईं हैं जो कभी नहीं होनी चाहिए थी.

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‘मैंने देखा है कि लेंसकार्ट के बारे में एक गलत नीति दस्तावेज वायरल हो रहा है. मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि यह दस्तावेज हमारे वर्तमान दिशानिर्देशों को प्रतिबिंबित नहीं करता है. हमारी नीति में किसी भी तरह की धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं है, जिसमें बिंदी और तिलक भी शामिल हैं और हम नियमित रूप से अपने दिशानिर्देशों की समीक्षा करते रहते हैं.'

पीयूष बंसल मे कहा, ‘हमारी ग्रूमिंग नीति वर्षों से विकसित हुई है और पुराने संस्करण आज हमारी पहचान को नहीं दर्शाते हैं. इस स्थिति से हुई भ्रम और चिंता के लिए हम क्षमा चाहते हैं. एक कंपनी के रूप में, हम निरंतर सीखते और विकसित होते रहते हैं. हमारी भाषा या नीतियों में किसी भी प्रकार की त्रुटि को दूर किया गया है और आगे भी किया जाता रहेगा. भारत भर में हमारे हजारों कर्मचारी हैं जो प्रतिदिन हमारे स्टोर्स में अपने धर्म और संस्कृति को गर्व से प्रदर्शित करते हैं, वे ही लेंसकार्ट हैं.’ 

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‘पॉलिसी दस्तावेज में हुई गड़बड़ी’

पीयूष बंसल ने आगे कहा, 'लेंसकार्ट की स्थापना भारत में, भारतीयों ने की, भारतीयों के लिए की गई है. हमारे लोगों के अपनाए जाने वाले प्रत्येक प्रतीक और प्रत्येक परंपरा हमारी कंपनी की पहचान का हिस्सा हैं मैं इसे कभी भी खतरे में नहीं पड़ने दूंगा.'

पीयूष बंसल ने सफाई देते हुए आगे कहा, मौजूदा समय में प्रसारित हो रहा दस्तावेज़ एक पुराना आंतरिक प्रशिक्षण दस्तावेज़ है. यह कोई मानव संसाधन नीति नहीं है. हालांकि, इसमें बिंदी/तिलक के बारे में एक गलत पंक्ति थी जिसे लिखा ही नहीं जाना चाहिए था और यह हमारे मूल्यों या वास्तविक व्यवहार को प्रतिबिंबित नहीं करती है. 17 फरवरी को, सार्वजनिक चर्चा शुरू होने से काफी पहले, जब हमें इसका पता चला, तो हमने इसे तुरंत हटा दिया. 

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पीयूष बंसल ने मानी चूक 

पीषूय बंसल ने कहा, ‘मुझे इस गलती को पहले ही पकड़ लेना चाहिए था, संस्थापक और CEO होने के नाते, ऐसी चूक की जिम्मेदारी मेरी है. मैंने अपनी टीम को ऐसी सभी सामग्रियों की कड़ी समीक्षा करने के लिए कहा है और मैं व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करूंगा कि भविष्य में इस पर ध्यान दिया जाए. हम यह भी पता लगा रहे हैं कि यह हमारे प्रशिक्षण सामग्री में कैसे शामिल हो गया.'

लेंसकार्ट CEO ने साफ किया कि उनकी कंपनी किसी भी तरह की धार्मिक अभिव्यक्ति को प्रतिबंधित नहीं करती है और न ही कभी करेगी. इसमें बिंदी, तिलक या आस्था के ऐसे कोई भी प्रतीक शामिल हैं. 

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कंपनी की किस कथित गाइडलाइन से बढ़ा विवाद? 

दरअसल, लेखिका और एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य ने लेंसकार्ट के फाउंडर को टैग करते हुए एक्स पर स्टाइल गाइड की फोटो शेयर की थी. जिसमें लिखा था, हाय पीयूष बंसल, क्या आप कृपया यह साफ कर सकते हैं कि लेंसकार्ट में हिजाब की अनुमति क्यों है, लेकिन बिंदी/कलावा की नहीं?

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जिसके बाद कंपनी को लोगों की भारी नाराजगी का सामना करना पड़ा. सिंदूर के बारे में कहा गया था कि अगर सिंदूर लगाया जा रहा है, तो उसे बहुत कम मात्रा में लगाना चाहिए और वह माथे पर नहीं गिरना चाहिए. इसमें यह भी कहा गया है कि बिंदी लगाने की इजाजत नहीं है, हिजाब पहनने की इजाजत है बुर्का नहीं पहन सकते. गाइड में कहा गया था कि अगर हिजाब-पगड़ी पहनी जा रही है, तो उसका रंग काला होना चाहिए. कलावा का जिक्र करते हुए कहा गया है. धार्मिक धागे/रिस्टबैंड उतार देने चाहिए। इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया पर यूजर्स ने लेंसकार्ट को घेर लिया था. 

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