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कश्मीर में अचानक सैकड़ों कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को छुट्टी पर क्यों भेजा गया? वजह जानें

लश्कर से जुड़े आतंकी संगठन की ओर से धमकियां दी गई थी. कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम और कॉन्टैक्ट डिटेल्स वाली एक कथित धमकी भरी चिट्ठी सामने आई थी.

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11 Aug 2026
( Updated: 11 Aug 2026
05:25 PM )
कश्मीर में अचानक सैकड़ों कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को छुट्टी पर क्यों भेजा गया? वजह जानें
Image Source- IANS
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जम्मू कश्मीर में सैकड़ों कर्मचारियों को 25 अगस्त तक ड्यूटी पर न आने के लिए कहा गया है. इनमें ज्यादातर कश्मीरी पंडित हैं. इन्हें प्रशासनिक छुट्टी पर भेज दिया गया है. इसके पीछे की वजह इन कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़ी है. 

दरअसल, कश्मीर घाटी में हाल के कुछ हमलों और पंडित कर्मचारियों को मिल रही धमकियों के बीच राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. NDTV की एक रिपोर्ट में कश्मीर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है. 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों और अलर्ट के बीच कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद अहम है. 

कर्मचारियों को सुरक्षित जगहों पर भेजा गया

एक तरफ कश्मीर में कर्मचारियों को मिल रही धमकियों की जांच की जा रही है. तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री के स्पेशल रोजगार पैकेज के तहत नियुक्त कर्मचारियों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी गई है.

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दरअसल, लश्कर से जुड़े आतंकी संगठन की ओर से धमकियां दी गई थी. कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम और कॉन्टैक्ट डिटेल्स वाली एक कथित धमकी भरी चिट्ठी सामने आई थी. चिट्ठी में जिनके नाम थे उन्हें सुरक्षित ठिकाने पर भेजा गया है, कई कर्मचारियों को ड्यूटी पर न आने के लिए कहा गया है. यानी जो घाटी से बाहर नहीं जा सके, उन्हें भी बाहर न निकलने की सलाह दी गई है. 

प्रधानमंत्री स्पेशल रोजगार पैकेज के तहत मिली थी नौकरी 

हालांकि पुलिस कर्मचारियों को मिली धमकी की जांच कर रही है लेकिन उससे पहले एहतियातन कदम उठाए गए हैं. कश्मीर में करीब 6 हजार पंडित कर्मचारी हैं. जिन्हें साल 2010 में प्रधानमंत्री स्पेशल रोजगार पैकेज के तहत सरकारी नौकरी दी गई थी. उस समय केंद्र में UPA की सरकार थी. इस योजना के पीछे सरकार का मकसद 1990 में अलगाववादी आंदोलन शुरू होने के बाद अपनी मातृभूमि से पलायन करके गए कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास में मदद करना था. ये पहली बार नहीं है जब कश्मीर में कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं. साल 2022 में आतंकवादियों कश्मीरी पंडितों को टारगेट किया था. 

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कश्मीर घाटी में आतंकी एक्टिविटी और आतंकवादियों के खिलाफ लगातार ऑपरेशन चलाया जा रहा है. जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में सुरंग निर्माण स्थल के पास संदिग्ध गतिविधि देखे जाने के बाद मंगलवार को सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया है. अधिकारियों के अनुसार, निर्माण स्थल पर तैनात एक सुरक्षा गार्ड ने मंगलवार सुबह संदिग्ध गतिविधि देखी और एहतियात के तौर पर तीन से चार राउंड फायरिंग की. 

अधिकारियों ने कहा, ‘किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई खबर नहीं है. इस घटना के बाद, ‘आज सुबह करीब 6 बजे जम्मू-कश्मीर पुलिस, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और सीआरपीएफ के जवानों ने भाटा दुरियन, संगीओट और आसपास के जंगली इलाकों में एक संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया.’ 

उन्होंने कहा कि अब तक सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच कोई मुठभेड़ या गोलीबारी नहीं हुई है. पुंछ जिले के मेंढर सेक्टर में संदिग्ध गतिविधि की सूचना के बाद टनल के पास बड़े पैमाने पर संयुक्त तलाशी अभियान चलाया गया. इसके अलावा सुरनकोट और मनकोट में भी अतिरिक्त अभियान जारी हैं. 

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चप्पा-चप्पा छान रहे सुरक्षाबल

राजौरी जिले में भी सीमा से सटे इलाकों और नौशेरा के आसपास अभियान तेज कर दिए गए हैं. यह कदम खुफिया इनपुट और गांवों के क्षेत्रों में संदिग्ध लोगों के देखे जाने की स्थानीय रिपोर्टों के बाद उठाया गया है.

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सुरक्षा बलों ने पिछले समय में भी पुंछ और राजौरी के सीमावर्ती जिलों में कई बार संदिग्ध गतिविधियों और एलोसी के पास सुरक्षा अलर्ट के बाद बड़े पैमाने पर संयुक्त घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाए हैं. सुरक्षा बलों ने पीर पंजाल क्षेत्र में समन्वित, खुफिया आधारित घेराबंदी और तलाशी अभियान को तेज कर दिया है. इसमें पुंछ और राजौरी दोनों जिलों के विशिष्ट ग्रामीण क्षेत्रों और घने जंगल वाले इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. 

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